भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 499, कुल 2549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 499

यहाँ पृष्ठ का सम्पूर्ण पाठ प्रस्तुत है:

[top right] अंश-अन्त ]


प्रयोजनीय अंशकी पद्य-सूची

[वर्णक्रमानुसार प्रथम और द्वितीय चरण]

स्तम्भ १सन्दर्भस्तम्भ २सन्दर्भस्तम्भ ३सन्दर्भ
अंश-अवतार, आर१/६५अतएव 'कृष्ण'-शब्द२/८२अद्वैत-आचार्य-कोटि६/२०
अंश-अवतार-पुरुष१/६६अतएव गोपीगणेर नाहि४/१७२अद्वैत आचार्य गोसाञि३/७३, ५/१४७, ६/६
'अंश' ना कहिया, केने६/२४अतएव चैतन्य गोसाञि२/११०अद्वैत आचार्य प्रकट३/९४
अंश-शक्त्यावेशरूपे२/९८अतएव तुमि हओ२/३९अद्वैत आचार्य-प्रभुर१/३९
अंश' हैते 'अङ्ग', यात६/२४अतएव नाम हैल अद्वैत६/२८अद्वैत, नित्यानन्द३/७१, ६/१०३
अंशांशि-रूपे शास्त्रे५/१५४अतएव निस्तारिला५/२०९अद्वैत-प्रसादे लोक६/११२
अंशिनी राधा हैते४/७६अतएव विष्णु तखन४/१३अद्वैत-महिमा अनन्त६/११३
अंशी-अंशे देखि ज्येष्ठ६/९६अतएव ब्रह्मवाक्ये२/५८अद्वैत-रूपे 'उपादान'६/१६
अंशेर अंश येइ, 'कला'५/७३अतएव भक्तगणे करि४/२३७अधम जीवेर यैछे५/१५८
अकृष्णवरणे ताँर३/५६अतएव मधुर रस कहि४/४६अधमेरे दिल प्रभु५/२३०
अगण्य, अनन्त यत५/६७अतएव 'राधिका'-नाम४/८७अनन्त, अपार-तार५/५२
अग्नि, ज्वालाते-यैछे४/९७अतएव श्रीकृष्णचैतन्य५/१३३'अनन्त' कहिते नारे५/४७
अग्निशक्त्ये लौह यैछे५/६०अतएव विप्र आगे२/७८अनन्त ब्रह्माण्ड बहु२/४३
अङ्ग-उपाङ्ग-नाम३/५९अतएव समस्तेर४/९५अनन्त ब्रह्माण्ड सृष्टि६/८
अङ्गप्रभा, अंश२/६अतएव सर्वपूज्या,४/८९अनन्त ब्रह्माण्डे रुद्र६/७७
'अङ्ग'-शब्दे अंश३/७, ३/६७, ६/२१अतएव सूर्य ताँर२/२७अनन्तरूपे एकरूप२/१००
'अङ्ग'-शब्देर अर्थ३/६६अतएव सेइ भाव४/५०अनन्त वैभव ताँर५/११५
अङ्गने बसिया तेंहो५/१६९अतएव सेइ सुख४/१९५अनन्तशय्याते ताँहा५/१००
अङ्गेर अवयव३/६७, ७१अतएव हओ तुमि२/४२अनन्त स्फटिके यैछे२/१९
अङ्गोपाङ्ग अस्त्र३/६६अति गूढ़ हेतु सेइ४/१०४अनायासे हय निज१/२१
अङ्गोपाङ्ग तीक्ष्ण३/७२अतिहीन-ज्ञाने करे४/२४अनुकूलवाते यदि पाय४/२५३
अचिन्त्य ऐश्वर्य एइ५/९०अतृप्त हइया करे४/१५०अनुवाद आगे, पाछे२/७
अज्ञान-तमेर नाम१/९०अत्यन्त निगूढ़ एइ४/१६०'अनुवाद' कहि तारे२/७६
अतएव अधीश्वर तुमि२/४१अथवा, कृष्णके तिँहो३/५३अनुवाद ना कहिया२/७५
अतएव आर सब६/८२अथवा भक्तेर वाक्य५/१२७अनेक प्रकाश हय१/७६
अतएव कहि किछु४/२३२'अद्भुत, अनन्त, पूर्ण४/१३८अन्तरङ्ग-भक्त करि'७/१७
अतएव काम-प्रेमे४/१७१अद्वयज्ञान तत्त्ववस्तु२/६५अन्तरात्मा-रूपे तिँहो५/८५
अतएव कृष्ण मूल५/६१अद्वितीय, नन्दात्मज७/७
अद्वैत-आचार्य-ईश्वरेर६/३२

[footer] पद्य-सूची | ४५७