श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुरु-जीवेर ] गुरुतत्त्व कहियाछि ७/३ गुरुवर्ग,-नित्यानन्द ५/१४४ गुरु, वैष्णव, भगवान् १/२० गुरु मोरे मूर्ख देखि' ७/७१ गुरुरूपे कृष्ण कृपा १/४५ गुरु-सम-लघुके कराय ६/५२ गोप-गोपीसङ्गे याँहा ५/२१ गोपिका जानेन कृष्णेर ४/२११ गोपिका-दर्शने ४/१८७, १९० गोपिकार सुखे ४/१८९ गोपिका हयेन प्रिया ४/२१० गोपीगण करेन यबे ४/१८६ गोपीगणेर प्रेमेर ४/१६२ गोपीप्रेमे करे कृष्ण ४/१९८ गोपी-शोभा देखि' कृष्णेर ४/१९२ गोलोके व्रजेर सह ३/५ गोविन्दसर्वस्व ४/८२ गोविन्दानन्दिनी, राधा ४/८२ गोविन्देर प्रतिमूर्त्ति ५/७३ गौड़देशे पूर्व-शैले १/८६ गौणवृत्त्ये येबा भाष्य ७/१०९ गौणार्थ करिल, मुख्य ७/११० गौणार्थ व्याख्या करे सब ७/१३३ ग्रन्थेर आरम्भे करि १/२० ग्रामे ग्रामे कैला ७/१६६ घ घटेर कारण-चक्र ५/६४ घटेर निमित्त-हेतु यैछे ५/६३ घोर नरकेते पड़े ५/२२६ च चतुर्भुज, पीतवास, यैछे ६/३१ चन्दनलेपित-अङ्ग ५/१८७ चन्दनेर अङ्गद-बाला ३/४६ चब्बिश वत्सर छिला ७/३४ चर्मचक्षे देखे ताँरे ५/२० चर्मचक्षे देखे यैछे २/१३ चारि भाव-भक्ति ३/१९ चारि भावे भक्त यत ३/११ चारि मुक्ति दिया करे ५/३० चारिपाशे बेड़ि आछे ५/१९० चारि प्रेम, चतुर्विध ४/४२ चारि हस्त हय ३/४२ चिच्छक्ति-आश्रय तिहो ५/४२ चिच्छक्ति-विलास एक ५/४३ चिच्छक्ति, स्वरूपशक्ति २/१०१ चित्स्वरूप, ताँहा नाहि ५/३३ चित्त दृढ़ हञा लागे २/११८ चिदंशे संवित्-यारे ज्ञान ४/६२ चिदानन्द-देह, ताँर ७/११३ चिद्विभूति आच्छादिया ७/११२ चिदैश्वर्य-परिपूर्ण, अनूर्ध्व ७/१११ चिन्तामणि-भूमि, कल्प ५/२० चिन्मय-जल सेइ परम ५/५४ चिरकाल नाहि करि ३/१४ चैतन्य-कृष्ण-अवतार ३/८३ चैतन्य-कृष्णेर सैन्य ३/६४ चैतन्यगोसाञिके आचार्य ६/४१ चैतन्यगोसाञि मोरे करे ६/५१ चैतन्यप्रभुते ताँर सुदृढ़ ५/१७३ चैतन्यगोसाञिके आचार्य ६/४१ चैतन्यप्रभुर् महिमा कहि २/११९ चैतन्य-महिमा जानि २/११८ चैतन्यसिंहेर नवद्वीपे ३/३० चैतन्येर अवतारे एइ ३/१०९ चैतन्येर दास मुञि ६/८४ चैतन्येर दासे जाने एइ ४/२२६ चैतन्येर दास्य-प्रेमे ६/४७ चैतन्येर दास्ये सबाय ६/४९ चौद्दभुवने याँर सबे ५/२२२ चौद्द मन्वन्तर ब्रह्मार ३/८ छ छत्र, पादुका, शय्या ५/१२३ ज जगतेर भाग्ये गौड़े १/१०२ जगत्कारण नहे, प्रकृति ५/५९ जगत् डुबाइते आमि ७/३१ जगत् डुबिल, जीवेर ७/२७ जगत्-पालक तिँहो ५/११२ जगत्-मङ्गल अद्वैत ६/१२ जगतमोहन कृष्ण, ताँहार ४/९५ जगाइ माधाइ हैते ५/२०५ जड़ हइते कभु नहे ६/१८ जपिते जपिते मन्त्र करिल ७/८१ जय जय नित्यानन्द ५/२०० जल-तुलसी दिया करे ६/९२ जल-तुलसीर सम ३/१०५ जलशायी अन्तर्यामी ३/६९ जले भरि' अर्द्ध ताहा ५/९८ जीवकीट कोथाय पाइबेक ६/३५ जीवतत्त्व-शक्ति, कृष्ण ७/११७ 'जीव'-नाम तटस्थाख्य ५/४५ जीव निस्तारिल कृष्ण ६/२७ जीव निस्तारिते ऐछे २/२२ जगतेर उपादान 'प्रधान' ५/५८ जीवरूप वीर्य तात ५/६५ जीवशक्ति तटस्थाख्य २/१०३ जीव-हृदि, जले वैसे २/४७ जीवेर ईश्वर-पुरुषादि २/४० पद्य-सूची | ४६३