भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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[ जीवेर-ताँहार

जीवेर कल्मष-तमो ३/५९तथापिह मोर हय दास ६/५१ताँर शिक्षा लागि' प्रभु ७/४७
जीवेर निदान तुमि २/३७तथि लागि' पीतवर्ण ३/४०ताँर सम 'गुरु' कृष्णेर ६/५४
जीवेर स्वरूप-यैछे ७/११६तपन-मिश्रेर घरे भिक्षा ७/४६ताँर सुखे सुखवृद्धि ४/१९४
जीवे साक्षात् नाहि १/५८तप्तहेम-सम कान्ति ३/४१ताँरा दास्यभावे करे चरण ६/६२
ज्ञानमार्गे लइते नारे २/१३तबु पूर्वपक्ष कर २/१०८ताँरे कहे,-प्राकृत ७/११३
ज्ञानयोगमार्गे ताँरे भजे २/२६तबे अवतरि' करे जगत् ५/११५ताँरे क्षीरोदशायी कहि २/११०
ज्येष्ठ-भावे अशीते हय ६/९७तबे आत्मा बेचि' ३/१०६ताँरे 'निर्विशेष' कहि ७/१४०
तबे एइ प्रेमानन्देर ४/१३५ताँरे शिखाइल सब ७/४८
तबे चित्ते हय मोर ४/२३५ताँ-सबार कथा रहु ६/६८
डुभृञ् धातुर अर्थ ३/३३तबे त' भ्रातारे आमि ५/१७४ताँ'सबार चरणे मोर १/४१
तबे धैर्य धरि' मने ७/७९ताँ सबार नाहि निजसुख ४/१८८
तबे निज भक्त कैल ७/३९ताँ'सबार पादपद्मे १/३७
तटस्थ हइया हृदि विचार ४/४४तबे विपरीत हैत २/८४ताँहाइ प्रकट कैल ५/९९
तत्काले आमार भ्रातार ५/१७८तबे ये देखिये गोपीर ४/१८१ताँहाके 'अनन्त' कहि ५/१२६
तत तत बाड़े जल ७/२८तबे सब संन्यासी ७/१५१ताँहाकेइ प्रेमे कराय ६/५५
ततरूपे पुरुष करे सबाते ५/६७तबे सूत-गोसाञि मने २/६९ताँहा क्षीरोदधि-मध्ये ५/१११
तत्त्ववस्तु-कृष्ण १/९६तबे से 'अद्वैत'-नाम ३/१०१ताँहा नाहि निजसुख ४/१९९
'तत्त्वमसि'-वाक्य हय ७/१२९तबे हासि' प्रभु मोरे ५/१९४ताँहा बिनु सुखहेतु ४/२१८
तत्त्व येन ईश्वरेर ७/११६तमोनाश करि' १/८९, ९५ताँहा ये रामेर रूप ५/४२
तथापि अचिन्त्यशक्त्ये ७/१२५ताँर अंश 'पुरुष' हय ५/७४ताँहा सबा हैते २/४०
तथापि कहिये ताँर कृपा ५/१५९ताँर अधिष्ठात्री शक्ति ४/९१ताँहा स्वप्ने देखा दिला ५/१८१
तथापि गुरुर धर्म ४/१२९ताँर अवतार ६/८७, ८८ताँहार अङ्गेर शुद्ध २/१२
तथापि जानिये आमि १/४४ताँर अवतार साक्षात् ६/७ताँहार चरण आगे १/३५
तथापि जीवेर कृपाय ५/२९ताँर एक स्वरूप ५/७४ताँहार चरण-कृपा के ५/२२७
तथापि तत्स्पर्श नाइ २/५४ताँर घरे रहिला प्रभु ७/४५ताँहार चरणपद्मे १/३८
तथापि ताँहाते रहु मोर ६/५८ताँर तत्त्व-नाम-गुण, ६/३२ताँहार चरणाश्रित, सेइ ७/२
तथापि ताँहार भक्त ३/८७ताँर दोष नाहि, तैं हो ७/११४ताँहार द्वितीय देह ५/४
तथापि नहिल तिन ४/१२०ताँर धन, ताँर ४/१८२ताँहार नाहिक दोष ७/११०
तथापि प्रकृति-सह ५/८६ताँर नाभिपद्म हैते ५/१०२ताँहार पदारविन्दे १/४२
तथापि बाड़ये सुख ४/१८८ताँर पादपद्मे कोटि १/३९ताँहार प्रकाश-भेद ६/९०
तथापि सर्वदा वाम्य ४/१३०ताँर पादपद्म वन्दो १/४०ताँहार प्रथम वाञ्छा ४/१२१
तथापि से क्षणे क्षणे ४/१२८ताँर भक्त-भक्ति १/१०८ताँहार प्रसादे एइ १/९५
तथापि स्वच्छता तार ४/१४०ताँर युगावतार जानि' ३/३५ताँहार प्रसादे मोर २/१६
तथापिह मणि रहे ७/१२६ताँर शक्ति ताँर सह ४/८६ताँहार प्रेरणाय ताँरे ७/५७

४६४ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत