श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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[ दश-निरन्तर
| दश देह धरि' करे ६/७६ | दैर्घ्य-विस्तारे येइ ३/४२ | नाम-सङ्कीर्त्तन-सर्व १/९६ |
| दाड़िम्ब बीज-सम दन्ते ५/१८८ | दोँहार ये सम-रस ४/२५७ | ना याह संन्यासि-गोष्ठी ७/५५ |
| दामोदरस्वरूप हैते ४/१०४ | द्वारकाते रुक्मिण्यादि ६/७१ | नारायण अंशी येइ २/८५ |
| दास-भाव-सम नहे ६/४४ | द्वारका-मथुरा-गोकुल ५/१६ | नारायण, चतुर्व्यूह ४/११ |
| दास-सखा-पिता-माता ३/१२ | द्वारकार चतुर्व्यूह द्वितीय ५/४० | नारायणरूपे करेन विविध ५/२६ |
| दास्य-भावे आनन्दित ६/४६ | 'द्वितीय चतुर्व्यूह' एइ ५/४१ | नारायणरूपे सेइ तनु ५/२७ |
| दास्य, सख्य, वात्सल्य ३/११, ४/४२ | नारायणेर नाभिनाले ५/११० | |
| ध | 'नार'-शब्द कहे २/३८ | |
| दीप हैते यैछे बहु २/८९ | धरणीर मध्ये सप्त ५/११० | नारेर अयन याते २/४२, २/४६ |
| दुइजन लञा प्रभुर ५/१४६ | धर्म-अर्थ-काम-वाञ्छा १/९० | निजगण लञा खेले ५/२५ |
| दुइनाम-मिलने हैल ६/२९ | धर्म छाड़ि' रागे दुँहे ४/३१ | निज निज भाव सबे ४/४३ |
| दुइ पाशे राधा ललिता ५/२१५ | धर्म स्थापन करे, अधर्म ५/११३ | निजपादपद्म प्रभु दिला ५/१८२ |
| दुइ प्रभु सेवे महाप्रभुर ७/१४ | धैर्य धरिते नारि, हैलाम ७/७८ | निज-प्रेमानन्दे कृष्ण ४/२०१ |
| दुइ भाइ एकतनु ५/१७५ | निज-प्रेमास्वादे मोर ४/१२६ | |
| दुइ भाइ हृदयेर १/९८ | न | निजभावे करे कृष्ण ४/४३ |
| दुइ भागवत द्वारा १/१०० | 'नन्दसुत' बलि' २/९ | निज सृष्टिशक्ति प्रभु ६/१९ |
| दुइ भागवत-सङ्गे १/९८ | नवद्वीपे शचीगर्भ-शुद्ध ४/२७२ | निजाङ्ग-स्वेदजल ५/९६ |
| दुइरूपे हय भगवानेर १/६८ | नवमेघ-जिनि कण्ठध्वनि ३/४१ | नित्यानन्द अवधूत ६/४७ |
| दुइ लीला चैतन्येर ३/४८ | नमस्कार करिते, का'र ५/१६४ | नित्यानन्द-गुणे लेखाय ५/२३३ |
| दुइ सेनापति कैल ७/१६४ | ना आमि जगते बसि ५/८९ | नित्यानन्द गोसाञि ३/७३ |
| दुइ सेनापति बुलेन ३/७४ | ना करे वेदान्त-श्रवण ७/४१ | नित्यानन्द-दया मोरे ५/२१६ |
| दुइ हेतु अवतरि' ४/३९ | ना कहिले, केह इहार ४/२३१ | नित्यानन्द ना मान, ५/१७५ |
| दुई वस्तु भेद नाहि ४/९६ | नाच, गाओ, भक्तसङ्गे ७/९२ | नित्यानन्द पूर्ण करे ५/१५६ |
| दुँहार रूपगुणे दुँहार ४/३० | ना जानि राधार प्रेमे ४/१२३ | नित्यानन्द-प्रति ताँर ५/१७३ |
| दुःख ना मानिह यदि ७/१०२ | नाना अवतार करे ५/८० | नित्यानन्द प्रभु, मोर ५/१६० |
| दुःखी हञा प्रभु-पाय ७/४९ | नाना-भक्तभावे करेन ६/१०८ | नित्यानन्द-प्रभुर गुण ५/२३४ |
| दुस्त्यज आर्यपथ ४/१६८ | नाना यत्न करि आमि ४/२६३ | नित्यानन्द बलि' यबे ५/१६७ |
| दूर हैते पुरुष करे ५/६५ | नाना रत्नराशि हय ७/१२६ | नित्यानन्द-महिमा-सिन्धु ५/१५७ |
| देखिया ना देखे ३/८५ | नानारूपे विलसये चतुर्व्यूह ५/२३ | नित्यानन्दराय-प्रभुर १/४० |
| देखिलेन, बसियाछेन ७/५८ | ना पारि सहिते, एबे ७/५० | नित्यानन्द-स्वरूप पूर्वे ५/१४९ |
| देवगणे ना पाय याँहार ५/११४ | नाम-प्रेममाला गाँथि ४/४० | नित्यानन्द-स्वरूपेर ५/१९३ |
| 'देवी' कहि द्योतमाना, ४/८४ | नाम बिना कलिक़ाले ३/९९, ७/७४ | निन्दक, पाषण्डी, यत ७/२९ |
| देहकान्त्ये हय तैंहो ३/५६ | 'निमित्तांशे' करे तैंहो ६/१७ | |
| देहे आत्मबुद्धि-हय ७/१२३ | नाम लैते लैते मोर ७/७७ | निरन्तर कहे शिव ६/७८ |
४६६ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत