श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ प्रभुर-भिक्षा प्रभुर प्रशंसा करे सब ७/१५४ प्रभुर मिष्टवाक्य शुनि' ७/९९ प्रभु हासि' निमन्त्रण कैल ७/५६ प्राकृत करिया माने ७/११५ प्राकृत चिन्तामणि ताहे ७/१२५ प्राकृताप्राकृत-सृष्ट्ये २/३६ प्राकृत-वस्तुते यदि ७/१२७ प्राभव-वैभव-रूपे २/९७ प्रिया यदि मान करि' ४/२६ प्रीतिविषयसुखे ४/२०० प्रीतिविषयानन्दे तदाश्रय ४/१९९ प्रेम-नाम प्रचारिते ४/५ प्रेमनेत्रे देखे ताँर ५/२१ प्रेमभक्ति शिखाइते आपने ४/९९ प्रेमरस आस्वादिब ४/२६४ प्रेमरस-निर्यास करिते ४/१५ प्रेमवन्याय डुबाइल जगत्नेरे ७/२६ प्रेमसेवा परिपाटी ४/२११ प्रेमार स्वभावे करे चित्त ७/८७ प्रेमार स्वभावे भक्त हासे ७/८८ प्रेमा हैते कृष्ण हय ७/१४५ प्रेमा हैते पाय कृष्णेर ७/१४५ प्रेमे का'रे वंशी मारे ५/१६४ प्रेमे मत्त अङ्ग दाहिने ५/१८९ प्रेमे मत्त नित्यानन्द ५/२०८ प्रौढ़-निर्मलभाव प्रेम ४/४९ ब बलदेव देखि' ये ना ५/१७० बसाइला सभामध्ये ७/६५ बसिया करिला किछु ७/६० बहिर्वस्तु घट-पट १/९७ बहु कान्ता बिना नहे ४/८० बाल्य-पौगण्ड-धर्म २/९८ बाहु तुलि' प्रभु बले ७/१५९ बाहु तुलि' हरि ३/६१ बिम्ब-प्रतिबिम्ब-रूप ४/७७ बुझिबे रसिक भक्त ४/२३२ बुद्धिर गोचर नहे ४/१८५ बृहद्वस्तु 'ब्रह्म' कहि ७/१३८ ब्रह्म-आत्मरूपे ताँरे २/२६ ब्रह्म, आत्मा २/६, ६५ ब्रह्म-ज्ञानादिक सब ४/६७ ब्रह्म, परमात्मा २/१० 'ब्रह्म'-शब्दे मुख्य अर्थे ७/१११ ब्रह्मसायुज्य-मुक्तेर ताँहा ५/३१ ब्रह्मा कहे—'जले २/४८ ब्रह्माण्ड-प्रमाण पश्चाशत् ५/९७ ब्रह्माण्डवृन्देर आत्मा २/५० ब्रह्माण्डे प्रकाश ताँर ५/१९ ब्रह्मादि आनन्द यार नहे ७/८५ ब्रह्मानन्द तार आगे ७/९७ ब्रह्मा बलेन,-'तुमि किना २/३५ ब्रह्मा, विष्णु, शिव १/६७ ब्रह्मार एकदिने तिँहो ३/६ भ भक्त-अवतार तँहि ६/११० 'भक्त-अवतार' ताँर ७/१३ 'भक्त-अवतार'-पद ६/९५ भक्त-अभिमान मूल ६/८६ भक्त आदि क्रमे १/८२ भक्तगण-कोकिलेर ४/२३४ भक्त बलि' अभिमान ६/८७ भक्तभाव अङ्गीकरि' ६/१०३, १०७ भक्तभाव बिनु नहे ताहा ६/१०६ भक्तभावमय ताँर शुद्ध ७/१० भक्तभाव हैते अधिक ६/१०९ भक्तभावे करे ताँर ६/१०१ भक्तवत्सल, सुशील ३/४५ भक्त सहिते हय १/८१ 'भक्तस्वरूप' ताँर ७/१२ भक्ति-उपदेश बिनु ६/२८ भक्तिगन्ध नाहि ३/९६ भक्ति प्रचारिया सब ६/९२ भक्तिबिना जगत्नेर ३/१४ भक्तिभावे शिरे धरि ४/२२८ भक्तियोगे भक्त पाय २/२५ भक्तिर विरोधी कर्म ३/६० भक्तिरसे भरिल ३/३२ भक्तेर इच्छाय ३/१०९, १११ भक्तेर हृदये १/६१ भगवान्-प्राप्ति-हेतु ये ७/१४१ भगवानेर गुण कहे, ५/१२२ भगवानेर भक्त यत १/३८ भगवानेर सत्ता हय ४/६४ 'भवेत्' क्रिया विधिलिङ्; ४/३५ भाइके भर्त्सिनु मुञि ५/१८० भागवत, भारतशास्त्र ३/८३ 'भागवतसन्दर्भ'-ग्रन्थेर ३/७९ भागवतेर सार एइ-बले ७/९३ भाग्ये सेइ प्रेमा तोमाय ७/८६ भाव आस्वादिते दोँ हे ४/५७ भावग्रहणेर हेतु करिल ४/५३ भावुक सब सङ्गे लजा ७/६८ भावुक हइया फेरे ७/४२ भावेर परमकाष्ठा ४/६८ भारहरण-काल ताते ४/९ भाल हैल, पाइले तुमि ७/९१ भिक्षा करि' महाप्रभु ७/१५२ भिक्षा करिलेन सबे ७/१५१ ४६८ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत