श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 672, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ 12/58-64 “श्वेतमञ्जरी श्रीगौराङ्गके अत्यन्त प्रिय वही श्रीमद्भागवताचार्य हैं, जिन्होंने ‘कृष्णप्रेमातरङ्गिणी’ नामक ग्रन्थकी रचना की है।” चैःचः आदिलीला, 10/113 संख्या द्रष्टव्य है। ‘विष्णुदासाचार्य’—ये खेतरि-महोत्सवके समय अच्युतानन्द प्रभुके साथ गये थे (भक्तिरत्नाकर की दशम तरङ्ग द्रष्टव्य है)। ‘अनन्त आचार्य’—श्रीगौरगणोद्देश-दीपिका 165वाँ श्लोक— “अनन्ताचार्यगोस्वामी या सुदेवी पुरा व्रजे॥ 165 ॥” “व्रजकी सुदेवी अब श्रीअनन्ताचार्य गोस्वामी हैं।” ये श्रीअद्वैतप्रभुके गणोंमें रहनेपर भी, बादमें श्रीगदाधर-शाखामें प्रविष्ट हुए। चैःचः आदिलीला 8वाँ अध्याय संख्या 59-60 द्रष्टव्य है। शाखा-निर्णयामृत 11 श्लोक— “वन्देनन्ताद्भुतरसमनन्ताचार्यसंज्ञकम्। लीलानन्ताद्भुतमयं गौरप्रेम्णो हि भाजनम्॥” इनके शिष्य हरिदास पण्डित गोस्वामी वृन्दावनमें श्रीगोविन्ददेवजीकी सेवाके अध्यक्ष थे। उनके शिष्य श्रीराधाकृष्ण गोस्वामी ‘साधन-दीपिका’ ग्रन्थके रचयिता हैं (भक्तिरत्नाकर द्वितीय तरङ्ग) ॥ 58 ॥ (10) नन्दिनी, (11) कामदेव, (12) चैतन्यदास, (13) दुर्लभविश्वास, (14) वनमालिदास :- नन्दिनी, आर कामदेव, चैतन्यदास। दुर्लभविश्वास, आर वनमालिदास ॥ 59 ॥ अनुवाद—नन्दिनी, कामदेव, चैतन्यदास, दुर्लभ विश्वास और वनमाली दास श्रीअद्वैताचार्यकी अन्य शाखाएँ हैं ॥ 59 ॥ अनुभाष्य—‘नन्दिनी’—श्रीगौरगणोद्देश-दीपिका 89वाँ श्लोक— “नन्दिनी जङ्गली ज्ञेया जया च विजया क्रमात्॥ 89 ॥” “श्रीसीतादेवीकी परिचारिका और शिष्या जया अब नन्दिनी हुई हैं।” ये सम्भवतः श्रीसीतादेवीकी गर्भजात श्रीअद्वैताचार्यकी कन्या हैं (?) ॥ 59 ॥ (15) जगन्नाथ, (16) भवनाथ कर, (17) हृदयानन्द, (18) भोलानाथ :- जगन्नाथ कर, आर कर भवनाथ। हृदयानन्द सेन, आर दास भोलानाथ ॥ 60 ॥ (19) यादव, (20) विजय, (21) जनार्द्दन, (22) अनन्तदास, (23) कानुपण्डित, (24) नारायण :- यादवदास, विजयदास, जनार्द्दन। अनन्तदास, कानुपण्डित, दास नारायण ॥ 61 ॥ (25) श्रीवत्स, (26) हरिदास ब्रह्मचारी, (27) पुरुषोत्तम और (28) कृष्णदास ब्रह्मचारी :- श्रीवत्स पण्डित, ब्रह्मचारी हरिदास। पुरुषोत्तम ब्रह्मचारी, आर कृष्णदास ॥ 62 ॥ (29) पुरुषोत्तम पण्डित, (30) रघुनाथ, (31) वनमाली, (32) वैद्यनाथ :- पुरुषोत्तम पण्डित, आर रघुनाथ। वनमाली कविचन्द्र, आर वैद्यनाथ ॥ 63 ॥ (33) लोकनाथ, (34) मुरारि पण्डित, (35) हरिचरण, (36) माधव पण्डित :- लोकनाथ पण्डित, आर मुरारि पण्डित। श्रीहरिचरण, आर माधव पण्डित ॥ 64 ॥ अनुवाद—जगन्नाथ कर, भवनाथ कर, हृदयानन्द सेन और भोलानाथ दास, यादवदास, विजयदास, जनार्द्दन, अनन्तदास, कानुपण्डित, नारायण दास, श्रीवत्स पण्डित, हरिदास ब्रह्मचारी, पुरुषोत्तम ब्रह्मचारी, कृष्णदास, पुरुषोत्तम पण्डित, रघुनाथ, वनमाली कविचन्द्र, वैद्यनाथ, लोकनाथ पण्डित, मुरारि पण्डित, श्रीहरिचरण और माधव पण्डित श्रीअद्वैताचार्यकी अन्य शाखाएँ हैं ॥ 60-64 ॥ अनुभाष्य—‘हरिदास ब्रह्मचारी’ की गणना श्रीअद्वैताचार्य और श्रीगदाधर पण्डित, दोनोंके गणोंमें होती है। शाखानिर्णयामृतके नौवें श्लोकमें— “श्रीयुतं हरिदासाख्यं ब्रह्मचारिमहाशयम्। परमानन्द-सन्दोहं वन्दे भक्त्या मुदाकरम्॥” “श्रीहरिदास ब्रह्मचारी नामक महाशय परमानन्दके 136 | श्रीचैतन्यचरितामृत