भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 724, कुल 2549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 724

[ 14/91-97 एइ मत शिशुलीला करे गौरचन्द्र। दिने दिने पिता-मातार बाड़िल आनन्द ॥ 93 ॥ अनुवाद-यह सुनकर वह ब्राह्मण आनन्दित होकर चला गया और जगन्नाथ मिश्र निद्रासे उठकर परम विस्मित हुए। जगन्नाथ मिश्रने अपने बन्धु-बान्धवोंको स्वप्नके विषयमें बतलाया, जिसे सुनकर सभी लोग आश्चर्यचकित हो गये। श्रीगौरचन्द्र इस प्रकार बाल्यलीला करते, जिसे देखकर पिता-माताका आनन्द दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता ॥ 91-93 ॥ निमाइके हाथमें कलम (खड़िया) :- कत दिने मिश्र पुत्रेर हाते खड़ि दिल। अल्प दिने द्वादश-फला अक्षर शिखिल ॥ 94 ॥ अनुवाद-कुछ दिनोंके बाद जगन्नाथ मिश्रने निमाइके हाथोंमें कलम दी और कुछ ही दिनोंमें वे द्वादश-फला अक्षर सीख गये ॥ 94 ॥ अनुभाष्य-'द्वादश-फला'-रेफ, ण, न, म, य, र, ल, व, ऋ, ॠ, ऌ और ॡ फला ॥ 94 ॥ इति अनुभाष्ये चतुर्दश परिच्छेद। चौदहवें अध्यायका अनुभाष्य पूर्ण हुआ। यह बाल्यलीला-सूत्र विस्तारसे श्रीचैतन्यभागवतमें वर्णित :- बाल्यलीला-सूत्र एइ कहिल अनुक्रम। इहा विस्तारियाछेन दास-वृन्दावन ॥ 95 ॥ अतएव बाल्यलीला संक्षेपे सूत्र कैल। पुनरुक्ति-भये विस्तारिया ना कहिल ॥ 96 ॥ अनुवाद-इस प्रकार मैंने बाल्यलीलाको क्रमानुसार सूत्र रूपमें कहा है, क्योंकि श्रीवृन्दावनदास ठाकुरने इन लीलाओंका विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। इसलिये मैंने पुनरुक्तिके भयसे विस्तारपूर्वक न कहकर बाल्यलीलाको संक्षेपमें सूत्ररूपसे ही वर्णन किया है ॥ 95-96 ॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 97 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिखण्डे बाल्यलीला-सूत्रवर्णनं नाम चतुर्दश-परिच्छेदः। अनुवाद-श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है ॥ 97 ॥ श्रीचैतन्यचरितामृत आदिलीला बाल्यलीलाका सूत्ररूपमें वर्णन नामक चौदहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ।