भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 734, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 734

[ 15/33-34 जिनका श्रीवृन्दावनदासने विस्तृत रूपसे वर्णन किया है। 'चैतन्यमङ्गल' ग्रन्थके द्वारा ऐसी लीलाओंकी समस्त जगत्में ख्याति हुई है, इसलिये मैंने केवल उनका दिग्दर्शनमात्र कराया है॥ ३३॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ ३४ ॥ इति चैतन्यचरितामृते आदिखण्डे पौगण्ड लीलासूत्र-वर्णनं नाम पञ्चदश परिच्छेदः। अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ ३४॥ श्रीचैतन्यचरितामृत आदिलीला पौगण्ड लीलाका सूत्ररूपमें वर्णन नामक पन्द्रहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ।

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