भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 805

17/335-336 ] श्रीगुरु-प्रणाम :- कृपाकी आशा रखकर यह कृष्णदास चैतन्यचरितामृतका गान कर रहा है॥ 335-336॥ श्रीस्वरूप-श्रीरूप-श्रीसनातन। श्रीरघुनाथदास, आर श्रीजीव-चरण॥ 335॥ अनुभाष्य-‘श्रीस्वरूप’-श्रीदामोदर-स्वरूप; चैःचः मध्यलीला, 10/102-127संख्या और अनुभाष्य द्रष्टव्य है॥ 335॥ शिरॆ धरि वन्दौँ, नित्य करौँ ताँर आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास॥ 336॥ इति अनुभाष्ये सप्तदश परिच्छेद। सतरहवें अध्यायका अनुभाष्य पूर्ण हुआ। इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिखण्डे यौवनलीलासूत्र-वर्णनं नाम सप्तदशपरिच्छेदः। श्रीचैतन्यचरितामृत आदिखण्डमें यौवनलीलासूत्र-वर्णन नामक सतरहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ। अनुवाद-श्रीस्वरूप दामोदर गोस्वामी, श्रीरूप गोस्वामी, श्रीसनातन गोस्वामी, श्रीरघुनाथदास गोस्वामी और श्रीजीव गोस्वामीके चरणकमलोंको अपने सिरपर धारण करते हुए, उनकी वन्दना करते हुए और नित्य उनकी इति आदिलाीला समाप्ता॥ यह आदिलाीला समाप्त हुई॥ सतरहवाँ अध्याय | 269