भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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जगत-तबे ]

  • जगत व्यापिया मोर हबे — 9/40
  • जगत व्यापिल तार के — 9/23
  • जगत व्यापिल तार नहिक — 9/24
  • जगत् आनन्दमय — 13/101
  • जगत् भरिया लोक बले — 13/94
  • जगते यतेक जीव, तार — 10/42
  • “जगद्गुरुते तुमि कर ऐछे — 12/15
  • जगदीश पण्डित, आर हिरण्य — 10/70
  • जगन्नाथ आचार्य प्रभुर प्रिय — 10/108
  • जगन्नाथ कर, आर कर — 12/60
  • जगन्नाथ, जनार्द्दन — 13/58
  • जगन्नाथ देखिते आगे — 10/141
  • जगन्नाथ तीर्थ, विप्र — 10/114
  • जगन्नाथ मिश्र कहे, - 'स्वप्न — 13/84
  • जगन्नाथमिश्र-पत्नी शचीर — 13/72
  • जगन्नाथ मिश्रवर-पदवी — 13/59
  • जगन्नाथ-शचीर देहे — 13/80
  • जगाइ मधाइ पर्यन्त — 8/20
  • जड़लोक बुझाइते पुनः — 17/23
  • जन्म-बाल्य-पौगण्ड — 13/22
  • जन्म सार्थक करि' कर — 9/41
  • जन्मिले चैतन्यप्रभु — 13/21
  • जय श्रीमाधवपुरी कृष्णप्रेमपूर — 9/10
  • जरद्गव हञा युवा हय — 17/162
  • जल-गोमय दिया सेइ — 17/44
  • जल पान करिया नाचे — 17/117
  • जलाभावे कृश शाखा — 12/69
  • जाति-अनुरोधे तबु सेइ — 17/170
  • जानि कार घरे धन — 17/199
  • जानि वा ना जानि — 9/5
  • जानि-सरस्वती मोरे — 16/89
  • जाह्नवीते जलकेलि करे — 16/7
  • जितामित्र, काष्ठकाटा — 12/83
  • जियाइते पारे यदि, तबे — 17/160
  • जिह्वा कृष्णनाम करे, ना — 17/202
  • जीवितेइ मृत सेइ, मैले — 12/70
  • जीयात् कैशोर-चैतन्यो — 16/3
  • ज्योतिर्मय देह, गेह — 13/81
  • ज्योतिर्मय-धाम मोर — 13/84
  • ज्योत्स्नावती रात्रि, प्रभु — 16/28

ज्ञ

  • ज्ञान-कर्म निन्दि' करे — 13/64
  • ज्ञान-कर्म-योग-धर्मे नहे — 17/75
  • ज्ञान-योग-तप आदि — 17/24
  • ज्ञान, योग, तपो-धर्म — 13/65

  • झंझावात-प्राय आमि — 16/43

  • ठेङ्गा लञा उठिला प्रभु — 17/250

  • डाकिनी-शाँखिनी हैते — 13/117

  • ढक्कावाद्ये नृत्य करे — 11/32

  • तत्त्व कहिं कैल शचीर दुःख — 16/23
  • ततक्षणे जन्मिया वृक्ष बाड़िते — 17/80
  • तथा नाना चमत्कार — 14/21
  • तथापि खण्डिबे दुःख — 8/11
  • तथापि दाम्भिक पड़्या नम्र — 17/258
  • तथापि पितार धर्म-पुत्रके — 14/89
  • तथापि भूमिष्ठ नह — 13/87
  • तथा याह, तँहो यदि — 17/57
  • तथा हैते यबे कुलिया — 17/55
  • तपन आचार्य, आर — 10/148
  • तपन-मिश्ररे घरे भिक्षा — 10/154
  • तबु त' ना पाय कृष्णपदे — 8/16
  • तबु यदि प्रेम नहे, नहे — 8/29
  • तबु श्रीवासेर चित्ते ना — 17/228
  • तबे आचार्य-गोसाञिर आनन्द — 17/68
  • तबे आचार्येर घरे कैल — 17/241
  • तबे आमि प्रतिवाक्य कहिल — 17/214

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