श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 818, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ तबे-ताते तबे कत दिने कैल पद 14/23 | तबे से इहारे भक्ति 17/263 | ताँर यशः-गुण सर्वजगते 8/54 तबे कत दिने प्रभुर 14/21 | तबे सेइ पापी प्रभुर लइल 17/56 | ताँर लीला वर्णियाछेन 10/47 तबे जानि, अपराध ताहाते 8/30 | तबे सेइ यवनरे आमि 17/196 | ताँर शाखा-उपशाखा 12/56 तबे त' करिल प्रभु 16/25 | तबे से ग्रन्थेर अर्थ 17/311 | ताँर शाखागण किछु 12/78 तबे त' करिला प्रभु 17/8 | तरुसम सहिष्णुता वैष्णव 17/27 | ताँर शाखा मुख्य एक 10/24 तबे त' करिला सब भक्ते 17/230 | तर्कशास्त्रे सिद्ध येइ 8/14 | ताँर शिष्य-उपशिष्य 10/16 तबे त' द्विभुज केवल 17/15 | तर्के इहा नाहि माने 17/307 | ताँर शिष्य-गोविन्द-पूजक 8/69 तबे त' नगरे हइबे 17/192 | तर्ज्ज-गर्ज्ज करे लोक 17/140 | ताँर सङ्गे ताते करे वैष्णवेर 13/66 तबे त' सकल लोकेर 13/69 | तर्ज्जन गर्ज्जन शुनि' ना 17/141 | ताँर सङ्गे तीनजन प्रभु 10/117 तबे तोमार हबे एइ 17/58 | तव व्याख्या शुनि' आमि 16/91 | ताँर सङ्गे नाचि' बुले 17/137 तबे दिग्विजयी व्याख्यार 16/40 | तहिँ मध्ये प्रेमदान-'विशेष' 17/316 | ताँर सिद्धिकाले दोंहे ताँर 10/139 तबे दुइ भाइ ताँरे मरिते 10/96 | ताँर आज्ञा मानि' सेवा 10/140 | ताँर स्कन्धे चड़ि' प्रभु 17/19 तबे नित्यानन्द-गोसाञिर 17/16 | ताँर आज्ञा लङ्घि' चल 12/10 | ताँर स्थाने रूप-गोसाञि 10/158 तबे नित्यानन्द-स्वरूपेर 17/12 | ताँर इच्छा, - "प्रभुरसङ्गे 16/16 | ताँरे देखि' प्रभुर हइल 14/63 तबे निस्तारिल प्रभु जागाइ 17/17 | ताँर आज्ञा लजा लिखि 8/81 | ताँरे ना भजिले कभु ना 8/32 तबे पुत्र जनमिल 'विश्वरूप' 13/74 | ताँर उपशाखा यत, असंख्य 11/8 | ताँ-सबार कवित्वे हय 16/101 तबे प्रभु माता-पितार कैल 15/13 | ताँर उपशाखा, -यत 10/48 | ताँ-सबार बोले लिखि 8/72 तबे प्रभु श्रीवासेर गृहे 17/34 | ताँर उपशाखा यत, तार 11/56 | ताँ-सबार सङ्गे यैछे 17/237 तबे 'बल' 'बल' प्रभु बले 17/236 | ताँर कि अद्भुत चैतन्यचरित 8/42 | ताँहा आमा-सङ्गे तोमार हबे 16/17 तबे महाप्रभु तार द्वारेते 17/143 | ताँर कृपा बिना अन्ये 8/82 | ताँहा बइ विश्वे किछु नाहि 13/76 तबे महाप्रभु ताँर हृदे 12/25 | ताँर गर्भे जन्मिला श्रीदास 8/41 | ताँहाते हइल चैतन्येर 10/59 तबे मिश्र विश्वरूपेर देखिया 15/11 | ताँर गुरु-अन्य, एइ 12/16 | ताँहार अनन्त गुण, -करि 10/44 तबे विचारये मने हइया 16/88 | ताँर चरित्रचित्र लोके ना 17/297 | ताँहार अनन्त गुण के 8/60 तबे विप्र लइल श्रीवासेर 17/59 | ताँर पत्नी 'शची'- नाम 13/60 | ताँहार अनुज शाखा-शङ्कर 10/33 तबे विश्वरूप इहाँ पाठाइल 15/21 | ताँर परिकर, ताँर शाखा 10/12 | ताँहार कृपाय हैल पाप 17/59 तबे विष्णुप्रिया-ठाकुराणीर 16/25 | ताँर पुत्र-महाशय श्रीकानु 11/40 | ताँहार चरित्र, शुन 12/19 तबे शची कोले करि' 14/44 | ताँर प्रिय शिष्य इँहो 8/60 | ताँहार प्रसादे शुनेन 8/63 तबे शची देखिल, रामकृष्ण 17/17 | ताँर प्रीतयेर कथा आगे 10/23 | ताँहार भगिनी दमयन्ती प्रभुर 10/25 तबे शिष्यगण सब हासिते 16/98 | ताँर भगनीपति श्रीगोपीनाथ 10/130 | ताँहार साधन-रीति शुनिते 10/103 तबे शुक्लाम्बरेर कैल तण्डुल 17/20 | ताँर भर्त्ता कहिले द्वितीय 16/63 | ताँहार हृदय जानि' कहे 16/93 तबे सप्तप्रहर छिला प्रभु 17/18 | ताँर भुक्त-शेष किछु 13/50 | ताते आदिलीलार करि 17/313 तबे सब शिष्टलोक करे 17/43 | ताँर मध्ये रूप-सनातन 10/85 | तार उपशाखागणे जगत 9/22 तबे सुस्थ हइबेन तोमार 14/46 | ताँर यत शाखा हइल 12/4 | ताते एइ श्लोके देखि 16/52 282 | श्रीचैतन्यचरितामृत