भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

१/१०८-११० ] अनुवाद-मैं श्रीचैतन्य महाप्रभु, श्रीनित्यानन्द प्रभु और श्रीअद्वैताचार्यकी महिमा और उनके भक्तों, भगवद्भक्ति, भगवन्नाम, प्रेम एवं रसतत्त्वका पृथक्-पृथक् विचारपूर्वक वर्णन करूँगा, जिसे श्रवण करनेसे समस्त वस्तुतत्त्वके सारका ज्ञान हो जायेगा ॥ १०८-१०९ ॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ ११० ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिषण्डे गुर्वादि-वन्दन-मङ्गलाचरणं नाम प्रथमः परिच्छेदः। अनुवाद-श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ ११० ॥ श्रीचैतन्यचरितामृतके आदिषण्डमें गुरु आदिका वन्दन-मङ्गलाचरण नामक पहले अध्यायका अनुवाद समाप्त। पहला अध्याय | ४१

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