श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ श्रवण-षोल श्र श्रवण-मात्रे कण्ठे कैल १५/५ श्रीईश्वरपुरी-रूपे अङ्कुर ९/११ श्रीकृष्णचैतन्य, अद्वैत १७/३३३ श्रीकृष्णचैतन्य-दया करह ८/१५ श्रीकृष्णचैतन्य नवद्वीपे १३/८ श्रीकृष्णचैतन्यलीला १७/३३१ श्रीगदाधरदास-शाखा १०/५३ श्रीगदाधर पण्डित-उपशाखा १२/७८ श्रीगोपाल-नामे आर १२/१९ श्रीगोपालभट्ट-एक शाखा १०/१०५ 'श्रीगोविन्द-देव' नाम ८/५१ श्रीगोविन्द-नाम ताँर १०/१३८ श्रीगौरीदास पण्डिते प्रेमोद्दण्ड ११/२६ श्रीचन्द्रशेखर वैद्य, द्विज १०/११२ श्रीचैतन्य-नित्यानन्द १३/१२४ श्रीचैतन्य-नित्यानन्दे करि' ११/२७ श्रीचैतन्य मालाकार पृथिवीते ९/९ श्रीचैतन्य-माली कैला १७/३२२ श्रीचैतन्येर अति प्रिय १०/७४ श्रीजगदीश पण्डित हय ११/३० श्रीजीव, गोपालभट्ट ९/४ श्रीजीव पण्डित नित्यानन्द ११/४४ श्रीधरेर लौहपात्रे कैल १७/७० श्रीनाथ चक्रवर्ती, आर १२/८३ श्रीनाथ पण्डित-प्रभुर १०/१०७ श्रीनाथ मिश्र, शुभानन्द १०/११० श्रीनित्यानन्द-पद बिना ११/४७ श्रीनित्यानन्द-वृक्षर स्कन्ध ११/५ श्रीनित्यानन्देर तेंहो ११/३६ श्रीनिधि, श्रीगोपीकान्त १०/११० श्रीनृसिंह-उपासक-प्रद्युम्न १०/३५ श्रीनृसिंह तीर्थ, आर ९/१४ श्रीपति, श्रीनिधि-ताँर १०/९ श्रीपुरुषोत्तमदास-ताँहार ११/३८ श्रीमन्त, गोकुलदास ११/४९ श्रीमाधव घोष-मुख्य ११/१८ श्रीमाध्वाचार्य, कमलाकान्त १०/११९ श्रीमान्पण्डित शाखा १०/३७ श्रीमान् सेन प्रभुर सेवक १०/५२ श्रीमुकुन्द-दत्त शाखा १०/४० श्रीमुरारि गुप्त-शाखा १०/४९ श्रीयदुनन्दनाचार्य-अद्वैतेर १२/५६ 'श्रीयुत लक्ष्मी' अर्थे १६/७७ श्रीरघुनाथदास, आर १७/३३५ श्रीराधार दासीमध्ये याँर १०/१३७ श्रीराधार प्रलाप यैछे १३/४१ श्रीरामदास आर, गदाधर ११/१३ श्रीरामदास, माधव, आर १०/११८ श्रीरूप-रघुनाथ-चरणेर एड् ८/८४ श्रीरूप, सनातन, भट्ट-रघुनाथ ९/४ 'श्रीलक्ष्मी'-शब्दे १६/७३ श्रीवत्स पण्डित, ब्रह्मचारी १२/६२ श्रीवल्लभसेन, आर सेन १०/६३ श्रीवास कहेन तबे रास १७/२३९ श्रीवास कहे,-'वंशी १७/२३३ श्रीवास-गृहेते गिया गदा १७/९४ श्रीवास पण्डित आर १०/८ "श्रीवास पण्डितेर स्थाने आछे १७/५७ श्रीवास-पुत्रेरे ताँहा हैल १७/२२८ श्रीवास बलेन,-'ये १७/९६ श्रीवास वर्णन वृन्दावन १७/२३४ श्रीवासादि गदाधरादि यत १७/३३३ श्रीवासादि यत महाप्रभुर १७/३०० श्रीवासे कराइलि तुइ भवानी १७/५२ श्रीवासे कहेन प्रभु करिया १७/९५ श्रीवासेर ब्राह्मणी १३/११० श्रीवासेर वस्त्र सिये दरजी १७/२३१ श्रीवासेरे दुःख दिते नाना १७/३६ श्रीविजयदास-नाम प्रभुर १०/६५ श्रीवीरभद्र गोसाञि-स्कन्ध ११/८ श्रीशची-जगन्नाथ १३/५४ श्री'-शब्दे, 'लक्ष्मी'-शब्दे १६/७६ श्रीशिखि माहिति, आर १०/१३६ श्रीसदाशिव कविराज-बड़ ११/३८ श्रीस्वरूप-श्रीरूप १७/३३५ श्रीहट्ट-निवासी श्रीउपेन्द्रमिश्र १३/५६ श्रीहरि आचार्य, दास-पुरिया १२/८४ श्रीहरिचरण, आर माधव १२/६४ श्रीहर्ष, रघुमिश्र, पण्डित १२/८५ शृङ्ग-वेत्र-गोपवेश, शिरे ११/२१ ष षड्वर्ग, अष्टवर्ग, सर्व १३/९० षष्ठ परिच्छेदे 'अद्वैत १७/३१९ षोड़श वत्सर कैल १०/९३ षोड़शे कहिलुँ 'कैशोर १७/३२७ षोलसाङ्गेर काष्ठ तुलि' ये १०/११६ षोलसाङ्गेर काष्ठ ये तुलि' ११/१६ 294 | श्रीचैतन्यचरितामृत