श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 850, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनुभाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका अध्यात्म रामायण-9/11; अमृतप्रवाह भाष्य-6/97; आदिपुराण-8/246; इतिहाससमुच्चय-8/246; उज्ज्वलनीलमणि-1/87; 2/66; 6/13; 8/172, 175, 202-205; 14/141-153, 159, 165, 168; उपदेशामृत (रूपगोस्वामीकृत)-12/195; ऐतरयोपनिषद्-6/143-144; कठोपनिषद्-6/87; 8/307-309; 9/195; 11/37-38; कर्णूल-म्यानुयेल-1/106; कल्याण-कल्पतरु-12/7-9, 59-61; कात्यान-गृह्यसूत्र-8/127; काशीखण्ड-9/157; कूर्मपुराण-6/180; कौपीन-पञ्चक (शङ्कराचार्य)-6/121; गज्जाम-म्यानुयेल-7/113; गरुड़-पुराण-8/246; गोपालतापनी-उपनिषद्-8/137; गोविन्द भाष्य (श्रीमद्भागवत)-11/195; गौतमीय-तन्त्र-13/142; चैतन्यचन्द्रामृत-7/37; 8/246; 10/175-177; चैतन्यचन्द्रोदय-नाटक-10/106; चैतन्यचन्द्रोदय-नाटक (टिप्पनी)-10/105; चैतन्यभागवत-4/186; 5/140; चैतन्याष्टक-13/207; छान्दोग्योपनिषद्-6/145; 9/270; 12/194; तत्त्व-सन्दर्भ-6/135; तन्त्र-12/212, 215; ताञ्जोर गेजेटियार-9/74, 78-79; तैत्तरीय उपनिषद्-6/143-145, 172; 8/266; तैत्तरीय श्रुतिभाष्य (राघवेन्द्र यति)-6/143-144; दक्षिण आर्कट म्यानुयेल-9/38, 73; दक्षिण कानाड़ा म्यानुयेल-9/245; दुर्गम-सङ्गमनी-8/202-205; नरोत्तमदास ठाकुरकी प्रार्थना-8/137; 11/67; 12/135; नारायणव्यूह स्तव-8/246; पदामृत-समुद्र (राधामोहन ठाकुर)-3/114; पद्मपुराण-8/35-36, 44; 11/32; पूर्णप्रज्ञ-दर्शन-6/135; पत्थरके पटलपर लिखे श्लोक-7/113; प्रेमविवर्त्त-8/192; प्रेमविलास-विवर्त्त-8/192; बाजसेनकी शाखा-8/121; बाधूल-शाखा-6/143-144; बृहदारण्यक-श्रुति-12/194; बृहद्वामन-पुराण-8/246; बृहद्विष्णु-पुराण-3/99; बृहद्भागवतामृत-8/248; 14/126; बृहन्नारदीय-पुराण-8/246; बोम्बाइ गेजेटियार-9/245, 280, 281, 316; ब्रह्मसंहिता-8/137; 10/179-181; ब्रह्मसूत्र-6/135, 147; 8/266, 308-310; भक्तिरत्नाकर-1/35-44, 189; 9/82; भक्तिरसामृतसिन्धु-2/35, 47, 66, 72; 3/127, 162; 4/202; 6/12; 8/202-205; 12/135; 13/142; 14/157; भविष्यपुराण-6/137; भरद्वाज-संहिता (पञ्चरात्र)-1/263; भागवत-1/189; 2/29-34; 3/96, 97, 181; 4/179, 186; 5/28; 6/95, 143, 144, 263-265; 8/5, 44, 57, 60, 64, 127, 245-257, 264-266; 9/74, 80, 94-96, 102, 181, 195, 201, 218, 234, 260, 264, 270, 360, 362; 10/10, 11, 175-177; 12/32, 56, 184; 13/139, 142; भागवत-तात्पर्य (मध्व)-9/11; भावार्थ-दीपिका-6/95, 144; 8/5; भिजागापटम्-गेजेटियार-8/3; मध्व-विजय-9/245; मध्व-भाष्य-6/137, 147; मनःशिक्षा (दास गोस्वामी)-8/64; मनुसंहिता-10/154; महाभारत-8/127; 9/175, 310; मुकुन्दमालास्तोत्र-9/271; मुण्डकोपनिषद्-6/172; 8/307-309; 12/59-61; मुरारी-कड़चा-10/185; राधारस-सुधानिधि-13/207; रामायण-9/218, 312; लघुभागवतामृत-6/263-265; 9/138-139; 12/212, 215; लघुभागवतामृत-टीका (बलदेव)-6/263-265; विद्यापतिको गीतिग्रन्थ-3/114; विवर्त्तविलास (बाउलका ग्रन्थ)-8/192; विलापकुसुमाञ्जली-1/283-284; वेदान्तदर्शन (गौड़ीय)-8/192; वेदान्त-पारिजात-6/135; वेदार्थसंग्रह (श्रीरामानुज)-8/57; वैष्णव-मञ्जुषा-9/244-245; 10/90; 11/84; शरणागति (ठाकुर भक्तिविनोद)-3/194; 7/69; श्वेताश्वतरोपनिषद्-6/143-144, 150; 8/264; 9/102; श्रीभाष्य-6/135; श्रुति-8/266; सप्तशती-8/90; सर्वज्ञसूक्त-6/198; सर्वसम्वादिनी-6/135; 8/192; स्कन्दपुराण-6/147; 8/246; स्तवमाला-7/37; स्मृति-10/137; हरिभक्तिविलास-4/59-62; 8/127; 12/126-127 । ii ।