श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभक्तके द्वारा महाप्रभुके चरणोदकका पान, श्रीअद्वैताचार्यके पुत्र गोपालकी नृत्य करते हुये मूर्च्छा और महाप्रभुकी कृपासे पुनः चेतनताकी प्राप्ति, सभीके द्वारा स्नान और उसके बाद प्रसादका सम्मान, श्रीनित्यानन्द और अद्वैतप्रभुकी प्रेम-कलहलीला और सभीके द्वारा श्रीजगन्नाथके नव-यौवनका दर्शन। तेरहवाँ अध्याय— 497-527 श्रीजगन्नाथकी पाण्डुविजयका दर्शन, राजाके द्वारा मार्गकी झाडू लगाकर सफाई करना, रथके आगे सात मण्डलियोंमें महाप्रभुका नृत्य और बलगण्डि उपवनमें विश्राम। चौदहवाँ अध्याय— 529-562 विश्रामकालमें प्रतापरुद्रका वैष्णववेशमें एकान्तमें महाप्रभुके चरण दबाना, उनके मुखसे कालोचित श्लोकका पाठ सुनकर प्रेममें आविष्ट महाप्रभुका उनको आलिङ्गनका दान, सभीके द्वारा बलगण्डिमें भोगके प्रसादका सम्मान, महाप्रभुके द्वारा रथका सञ्चालन, इन्द्रद्युम्न सरोवरमें भक्तोंके साथ जलक्रीड़ा, हेरा पञ्चमी-यात्राका दर्शन, स्वरूप दामोदरका महाप्रभु और श्रीवाससे वैकुण्ठ धाम एवं लक्ष्मीके ऐश्वर्यके साथ ब्रजधाम और श्रीराधाके ऐश्वर्य, माधुर्य तथा प्रेमके तारतम्यको बतलाना; कुलीन-ग्रामके भक्तोंको महाप्रभुके द्वारा प्रत्येक वर्ष श्रीजगन्नाथके लिये मजबूत रेशमी डोरी लानेका आदेश। vi ।