श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 961, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ 3/217–219 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला अनुभाष्य—चैःभाः अन्त्यखण्ड, दूसरा अध्याय देखें। बङ्गालमें आटिसारा गाँव, वराहनगर, अम्बुलिङ्ग- छत्रभोग, उत्कलमें प्रयागघाट, सुवर्णरेखा, जलेश्वर, रेमुणा, याजपुर, वैतरणी, दशाश्वमेधघाट, कटक, महानदी, भुवनेश्वर (बिन्दु-सरोवर), कमलपुर, आठारनाला आदि स्थानोंसे होकर महाप्रभुने श्रीनीलाचलमें प्रवेश किया॥ 217॥ तृतीय अध्यायका अनुभाष्य समाप्त। श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 219॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे संन्यासकरणाद्वैतगृहे भोजनविलासवरणं नाम तृतीय-परिच्छेदः। अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस चैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ 219 ॥ श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डमें संन्यास ग्रहण करनेके बाद श्रीअद्वैत-गृहमें भोजन-विलास-वर्णन नामक तीसरा अध्याय समाप्त। 110 ।