श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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अध्याय १८] विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति तथा उसका माहात्म्य ८३
| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| मोक्षाय मोक्षरूपाय मोक्षकर्त्रे नमो नमः।<br>आत्मने ऋषये तुभ्यं स्वामिने विष्णवे नमः॥ २३ | मोक्ष, मोक्षरूप तथा मोक्ष प्रदान करनेवाले आपको नमस्कार है, नमस्कार है। आत्मास्वरूप, ऋषि, स्वामी तथा व्यापक शिवको नमस्कार है॥ २३॥ |
| नमो भगवते तुभ्यं नागानां पतये नमः।<br>ओङ्काराय नमस्तुभ्यं सर्वज्ञाय नमो नमः॥ २४ | आप भगवान्को नमस्कार है। आप सर्पोंके पतिको नमस्कार है। आप ओंकारको नमस्कार है। सर्वज्ञको बार-बार नमस्कार है॥ २४॥ |
| सर्वाय च नमस्तुभ्यं नमो नारायणाय च।<br>नमो हिरण्यगर्भाय आदिदेवाय ते नमः॥ २५ | आप सर्व (पूर्णस्वरूप)-को नमस्कार है और नारायणको नमस्कार है। हिरण्यगर्भको नमस्कार है। आप आदिदेवको नमस्कार है॥ २५॥ |
| नमोस्त्वजाय पतये प्रजानां व्यूहहेतवे।<br>महादेवाय देवानामीश्वराय नमो नमः॥ २६ | अज, प्रजापति, व्यूहहेतु, महादेव तथा देवताओंके ईश्वरको नमस्कार है, नमस्कार है॥ २६॥ |
| शर्वाय च नमस्तुभ्यं सत्याय शमनाय च।<br>ब्रह्मणे चैव भूतानां सर्वज्ञाय नमो नमः॥ २७ | आप शर्वको नमस्कार है। सत्यरूप, शान्तिरूप, ब्रह्मस्वरूप तथा सर्वज्ञाताको नमस्कार है, नमस्कार है॥ २७॥ |
| महात्मने नमस्तुभ्यं प्रज्ञारूपाय वै नमः।<br>चितये चितिरूपाय स्मृतिरूपाय वै नमः॥ २८ | आप महात्माको नमस्कार है। आप प्रज्ञारूपको नमस्कार है। चिति, चितिरूप तथा स्मृतिरूप आपको नमस्कार है॥ २८॥ |
| ज्ञानाय ज्ञानगम्याय नमस्ते संविदे सदा।<br>शिखराय नमस्तुभ्यं नीलकण्ठाय वै नमः॥ २९ | आप ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य तथा चैतन्यरूपको सर्वदा नमस्कार है। आप शिखरको नमस्कार है तथा नीलकण्ठको नमस्कार है॥ २९॥ |
| अर्धनारीशरीराय अव्यक्ताय नमो नमः।<br>एकादशविभेदाय स्थाणवे ते नमः सदा॥ ३० | अर्धनारीका शरीर धारण करनेवाले तथा अव्यक्तको बार-बार नमस्कार है। ग्यारह रूपोंमें परिवर्तित होनेवाले आप स्थाणुको सदा नमस्कार है॥ ३०॥ |
| नमः सोमाय सूर्याय भवाय भवहारिणे।<br>यशस्कराय देवाय शङ्करायेश्वराय च॥ ३१ | सोम, सूर्य, भव, भवहारी, यशस्कर, देव, शंकर तथा ईश्वरको नमस्कार है॥ ३१॥ |
| नमोऽम्बिकाधिपतये उमायाः पतये नमः।<br>हिरण्यबाहवे तुभ्यं नमस्ते हेमरेतसे॥ ३२ | पार्वतीपतिको नमस्कार है। उमापतिको नमस्कार है। आप हिरण्यबाहु तथा सुवर्णवीर्यको नमस्कार है॥ ३२॥ |
| नीलकेशाय वित्ताय शितिकण्ठाय वै नमः।<br>कपर्दिने नमस्तुभ्यं नागाङ्गाभरणाय च॥ ३३ | नीलकेश, वित्त तथा शितिकण्ठको नमस्कार है। कपर्दी (जटाजूट धारण करनेवाले) तथा अंगोंके आभूषण-रूपमें सर्पोंको धारण करनेवाले आपको नमस्कार है॥ ३३॥ |
| वृषारूढाय सर्वस्य हर्त्रे कर्त्रे नमो नमः।<br>वीररामातिरामाय रामनाथाय ते विभो॥ ३४ | वृषारूढ़ (बैलपर सवार होनेवाले) तथा सभीके कर्ता और हर्ताको बार-बार नमस्कार है। हे विभो! आप वीरराम, अतिराम तथा रामनाथको नमस्कार है॥ ३४॥ |
| नमो राजाधिराजाय राज्ञामधिगताय ते।<br>नमः पालाधिपतये पालाशाकृन्तते नमः॥ ३५ | राजाओंके भी अधिराज तथा राजाओंके द्वारा प्राप्त |