भारतकोश
श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण

Linga MahaPurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished833 पृष्ठ

पृष्ठ 85, कुल 834 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 85

अध्याय १८] विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति तथा उसका माहात्म्य ८३

संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
मोक्षाय मोक्षरूपाय मोक्षकर्त्रे नमो नमः।<br>आत्मने ऋषये तुभ्यं स्वामिने विष्णवे नमः॥ २३मोक्ष, मोक्षरूप तथा मोक्ष प्रदान करनेवाले आपको नमस्कार है, नमस्कार है। आत्मास्वरूप, ऋषि, स्वामी तथा व्यापक शिवको नमस्कार है॥ २३॥
नमो भगवते तुभ्यं नागानां पतये नमः।<br>ओङ्काराय नमस्तुभ्यं सर्वज्ञाय नमो नमः॥ २४आप भगवान्‌को नमस्कार है। आप सर्पोंके पतिको नमस्कार है। आप ओंकारको नमस्कार है। सर्वज्ञको बार-बार नमस्कार है॥ २४॥
सर्वाय च नमस्तुभ्यं नमो नारायणाय च।<br>नमो हिरण्यगर्भाय आदिदेवाय ते नमः॥ २५आप सर्व (पूर्णस्वरूप)-को नमस्कार है और नारायणको नमस्कार है। हिरण्यगर्भको नमस्कार है। आप आदिदेवको नमस्कार है॥ २५॥
नमोस्त्वजाय पतये प्रजानां व्यूहहेतवे।<br>महादेवाय देवानामीश्वराय नमो नमः॥ २६अज, प्रजापति, व्यूहहेतु, महादेव तथा देवताओंके ईश्वरको नमस्कार है, नमस्कार है॥ २६॥
शर्वाय च नमस्तुभ्यं सत्याय शमनाय च।<br>ब्रह्मणे चैव भूतानां सर्वज्ञाय नमो नमः॥ २७आप शर्वको नमस्कार है। सत्यरूप, शान्तिरूप, ब्रह्मस्वरूप तथा सर्वज्ञाताको नमस्कार है, नमस्कार है॥ २७॥
महात्मने नमस्तुभ्यं प्रज्ञारूपाय वै नमः।<br>चितये चितिरूपाय स्मृतिरूपाय वै नमः॥ २८आप महात्माको नमस्कार है। आप प्रज्ञारूपको नमस्कार है। चिति, चितिरूप तथा स्मृतिरूप आपको नमस्कार है॥ २८॥
ज्ञानाय ज्ञानगम्याय नमस्ते संविदे सदा।<br>शिखराय नमस्तुभ्यं नीलकण्ठाय वै नमः॥ २९आप ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य तथा चैतन्यरूपको सर्वदा नमस्कार है। आप शिखरको नमस्कार है तथा नीलकण्ठको नमस्कार है॥ २९॥
अर्धनारीशरीराय अव्यक्ताय नमो नमः।<br>एकादशविभेदाय स्थाणवे ते नमः सदा॥ ३०अर्धनारीका शरीर धारण करनेवाले तथा अव्यक्तको बार-बार नमस्कार है। ग्यारह रूपोंमें परिवर्तित होनेवाले आप स्थाणुको सदा नमस्कार है॥ ३०॥
नमः सोमाय सूर्याय भवाय भवहारिणे।<br>यशस्कराय देवाय शङ्करायेश्वराय च॥ ३१सोम, सूर्य, भव, भवहारी, यशस्कर, देव, शंकर तथा ईश्वरको नमस्कार है॥ ३१॥
नमोऽम्बिकाधिपतये उमायाः पतये नमः।<br>हिरण्यबाहवे तुभ्यं नमस्ते हेमरेतसे॥ ३२पार्वतीपतिको नमस्कार है। उमापतिको नमस्कार है। आप हिरण्यबाहु तथा सुवर्णवीर्यको नमस्कार है॥ ३२॥
नीलकेशाय वित्ताय शितिकण्ठाय वै नमः।<br>कपर्दिने नमस्तुभ्यं नागाङ्गाभरणाय च॥ ३३नीलकेश, वित्त तथा शितिकण्ठको नमस्कार है। कपर्दी (जटाजूट धारण करनेवाले) तथा अंगोंके आभूषण-रूपमें सर्पोंको धारण करनेवाले आपको नमस्कार है॥ ३३॥
वृषारूढाय सर्वस्य हर्त्रे कर्त्रे नमो नमः।<br>वीररामातिरामाय रामनाथाय ते विभो॥ ३४वृषारूढ़ (बैलपर सवार होनेवाले) तथा सभीके कर्ता और हर्ताको बार-बार नमस्कार है। हे विभो! आप वीरराम, अतिराम तथा रामनाथको नमस्कार है॥ ३४॥
नमो राजाधिराजाय राज्ञामधिगताय ते।<br>नमः पालाधिपतये पालाशाकृन्तते नमः॥ ३५राजाओंके भी अधिराज तथा राजाओंके द्वारा प्राप्त
श्रीलिंगमहापुराण · पृष्ठ 85, कुल 834 में से · BharatKosha