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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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११४श्रीरामकृष्णवचनामृत१९ नवम्बर, १८८२

श्रीरामकृष्ण सुरेन्द्र के भाई से कह रहे हैं, “आप जज हैं, बहुत अच्छी बात है। इतना जानिएगा, सभी कुछ ईश्वर की शक्ति है। बड़ा पद उन्होंने ही दिया है तभी बना है। लोग समझते हैं, 'हम बड़े आदमी हैं।' छत पर का जल शेर के मुँहवाले परनाले से गिरता है। ऐसा लगता है, मानो शेर मुँह से पानी उगल रहा है। परन्तु देखो, कहाँ का जल है। कहाँ आकाश में बादल बना, उसका जल छत पर गिरा और उसके बाद लुढ़ककर परनाले में जा रहा है और फिर शेर के मुँह से होकर निकल रहा है।”

सुरेन्द्र के भाई – महाराज, ब्राह्मसमाजवाले स्त्री-स्वाधीनता की बात कहते हैं, और कहते हैं जातिभेद उठा दो। यह सब आपको कैसा लगता है?

श्रीरामकृष्ण – ईश्वर से नया नया प्रेम होने पर वैसा हो सकता है। आँधी आने पर धूल उड़ती है, समझ में नहीं आता कि कौन आम का पेड़ है और कौन इमली का। आँधी शान्त होने पर फिर समझ में आता है। नये प्रेम की आँधी शान्त होने पर धीरे धीरे समझ में आ जाता है कि ईश्वर ही श्रेयः नित्य पदार्थ है और सभी कुछ अनित्य है। साधुसंग और तपस्या न करने पर ठीक ठीक धारणा नहीं होती! पखावज का बोल मुँह से बोलने से क्या होगा? हाथ पर आना बहुत कठिन है। केवल लेक्चर देने से क्या होगा? तपस्या चाहिए, तब धारणा होगी।

“जातिभेद? केवल एक उपाय से जातिभेद उठ सकता है। वह है भक्ति। भक्ति के जाति नहीं हैं। भक्ति से अछूत भी शुद्ध हो जाता है – भक्ति होने पर चाण्डाल फिर चाण्डाल नहीं रहता। चैतन्यदेव ने चाण्डाल से लेकर ब्राह्मण तक सभी को शरण दी थी।

“ब्राह्मण हरिनाम करते हैं, बहुत अच्छी बात है। व्याकुल होकर पुकारने पर उनकी कृपा होगी, ईश्वरलाभ होगा।

“सभी पथों से उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। एक ईश्वर को अनेक नामों से पुकारते हैं। जिस प्रकार एक घाट का जल हिन्दू लोग पीते हैं, कहते हैं जल; दूसरे घाट में ईसाई लोग पीते हैं, कहते हैं वाटर; और तीसरे घाट में मुसलमान पीते हैं, कहते हैं पानी।”

सुरेन्द्र के भाई – महाराज, थिओसफी कैसी लगती है?

श्रीरामकृष्ण – सुना है लोग कहते हैं कि उससे अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। देव मोड़ोल नामक व्यक्ति के मकान पर देखा था कि एक आदमी पिशाचसिद्ध है। पिशाच कितनी ही चीजें ला देता था। अलौकिक शक्ति लेकर क्या करूँगा? क्या उससे ईश्वरप्राप्ति होती है? यदि ईश्वर-प्राप्ति न हुई तो सभी मिथ्या है!


CC-0. In Public Domain. Gurukul Kangri Collection, Haridwar