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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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१५० | श्रीरामकृष्णवचनामृत | २५ फरवरी, १८८३

“कोई कोई सोचते हैं कि हम भजन-पूजन करते हैं – हम जीत गये। परन्तु हारजीत उनके हाथों में है। यहाँ एक वेश्या मरने के समय ज्ञानपूर्वक गंगा-स्पर्श करके मरी !

चौधरी – किस तरह उनके दर्शन हों?

श्रीरामकृष्ण – इन आँखों से वे नहीं दीख पड़ते। वे दिव्यदृष्टि देते हैं, तब उनके दर्शन होते हैं! अर्जुन को विश्वरूप-दर्शन के समय श्रीभगवान् ने दिव्यदृष्टि दी थी।

“तुम्हारी फिलासफी (Philosophy) में सिर्फ हिसाब-किताब होता है – सिर्फ विचार करते हैं। इससे वे नहीं मिलते।

रागभक्ति – अहैतुकी भक्ति

“यदि रागभक्ति – अनुराग के साथ भक्ति – हो तो वे स्थिर नहीं रह सकते।

“भक्ति उनको उतनी ही प्रिय है जितनी बैल को सानी।

“रागभक्ति – शुद्धा भक्ति – अहैतुकी भक्ति। जैसे प्रह्लाद की।

“तुम किसी बड़े आदमी से कुछ चाहते नहीं हो, परन्तु रोज आते हो, उन्हें देखना ही चाहते हो। पूछने पर कहते हो – ‘जी, कोई काम नहीं है, बस दर्शन के लिए आ गया।’ इसे अहैतुकी भक्ति कहते हैं। तुम ईश्वर से कुछ चाहते नहीं, सिर्फ प्यार करते हो।”

यह कहकर श्रीरामकृष्ण गाने लगे। गीत का मर्म यह है : –

“ ‘मैं मुक्ति देने में कातर नहीं होता, किन्तु शुद्धा भक्ति देने में कातर होता हूँ।’

“मूल बात है ईश्वर में रागानुगा भक्ति और विवेक-वैराग्य चाहिए।”

चौधरी – महाराज, गुरु के न होने से क्या नहीं होता ?

श्रीरामकृष्ण – सच्चिदानन्द ही गुरु हैं।

“शवसाधना करते समय जब इष्टदर्शन का मौका आता है, तब गुरु सामने आकर कहते हैं, ‘यह देख अपना इष्ट।’ फिर गुरु इष्ट में लीन हो जाते हैं। जो गुरु हैं वे ही इष्ट हैं। गुरु मार्ग पर लगा देते हैं।

“अनन्त का तो व्रत, पर पूजा विष्णु की की जाती है। उसी में ईश्वर का अनन्त रूप विराजमान है।

सर्वधर्मसमन्वय

(राम आदि भक्तों से) “यदि कहो किस मूर्ति का चिन्तन करेंगे, तो जो मूर्ति अच्छी लगे, उसी का ध्यान करना। परन्तु समझना कि सभी एक हैं।

“किसी से द्वेष न करना चाहिए। शिव, काली, हरि – सब एक ही के भिन्न भिन्न रूप हैं। वह धन्य है जिसको उनके एक होने का ज्ञान हो गया है।