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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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२५ जून, १८८४परिच्छेद ८४५४१

तरह तरह से आदमियों को समझाते भी हैं जिससे उपदेश के अनुसार वे चल सकें।

"अन्तिम श्रेणी के और उत्तम वैद्य वे हैं जो अगर मीठी बातों से रोगी नहीं मानता, तो बल का प्रयोग भी करते हैं। जरूरत होती है तो रोगी की छाती पर घुटना रखकर जबरन दवा पिला देते हैं। उसी प्रकार उत्तम श्रेणीवाले आचार्य भी हैं। ईश्वर के मार्ग पर लाने के लिए वे शिष्यों पर बल तक का प्रयोग करते हैं।"

पण्डितजी – महाराज, अगर उत्तम श्रेणी के आचार्य हों, तो क्यों फिर आपने ऐसा कहा कि समय के आये बिना ज्ञान नहीं होता ?

श्रीरामकृष्ण – सच है। परन्तु सोचो कि दवा अगर पेट में न जाय – अगर मुँह से ही निकल जाय, तो बेचारा वैद्य भी क्या कर सकता है? उत्तम वैद्य भी कुछ नहीं कर सकता।

"पात्र देखकर उपदेश दिया जाता है। तुम लोग पात्र देखकर उपदेश नहीं देते। मेरे पास अगर कोई लड़का आता है तो मैं उससे पूछता हूँ – तेरे कौन कौन हैं! सोचो उसके बाप नहीं है, परन्तु बाप का ऋण है, तो वह कैसे ईश्वर की ओर मन लगा सकता है? – सुना ?"

पण्डितजी – जी हाँ, मैं सब सुन रहा हूँ।

श्रीरामकृष्ण – एक दिन काली-मन्दिर में कुछ सिक्ख सिपाही आये थे। काली माता के मन्दिर के सामने उनसे मेरी मुलाकात हुई। एक ने कहा – 'ईश्वर दयामय हैं।' मैंने कहा – 'अच्छा? सच कहते हो? कैसे तुम्हें मालूम हुआ?' उन लोगों ने कहा, – 'क्यों जनाब, ईश्वर हमें खिलाते हैं – हमारी इतनी देखभाल करते हैं।' मैंने कहा – 'यह कैसे आश्चर्य की बात हैं? ईश्वर सब के पिता हैं। अपने पुत्रों की देखभाल पिता नहीं करेगा तो और कौन करेगा? क्या पड़ोसवाले उनकी खबर लेंगे?'

नरेन्द्र – तो फिर दयामय न कहें?

श्रीरामकृष्ण – क्या मैं मना करता हूँ? मेरे कहने का मतलब यह है कि ईश्वर अपने आदमी हैं, कोई दूसरे नहीं।

पण्डितजी – बात अनमोल है।

श्रीरामकृष्ण – (नरेन्द्र से) – तेरा गाना मैं सुन रहा था, पर अच्छा न लगा। इसलिए चला आया। कहा, अभी उम्मेदवार है, गाना फीका जान पड़ने लगा।

नरेन्द्र लज्जित हो गये। मुँह लाल हो गया। वे चुप हो रहे।

(६)

श्रीरामकृष्ण ने पीने के लिए पानी माँगा। उनके पास एक ग्लास पानी रखा गया था, परन्तु वह जल वे पी नहीं सके। एक ग्लास जल और लाने के लिए कहा। पीछे से मालूम