श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ५६८ | श्रीरामकृष्णवचनामृत | ३ जुलाई, १८८४ |
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जो मानता हूँ।' उन्होंने 'दयामय, दयामय' कहना न छोड़ा; तब मेरी एक दूसरी अवस्था हो गयी। उस अवस्था में मैंने कहा – 'हटो यहाँ से।' घर के भीतर मैंने उन्हें किसी तरह न रहने दिया। वे सब बरामदे में पड़े रहे।
“कप्तान ने भी जिस दिन मुझे पहले-पहल देखा, उस दिन रात को यहीं रह गया।
“नारायण जब था तब एक दिन माइकेल आया था। मथुर बाबू का बड़ा लड़का द्वारका बाबू उसे अपने साथ ले आया था। मैगजीन के साहबों के साथ मुकदमा होनेवाला था। इस पर सलाह लेने के लिए बाबुओं ने माइकेल को बुलाया था।
“दफ्तर के साथ ही बड़ा कमरा है। वहीं माइकेल से मुलाकात हुई थी। मैंने नारायणशास्त्री को बातचीत करने के लिए कहा। संस्कृत में माइकेल अच्छी तरह बातचीत न कर सका। तब भाषा (बँगला) में बातचीत हुई।
“नारायण शास्त्री ने पूछा, तुमने अपना धर्म क्यों छोड़ा? माइकेल ने पेट दिखाकर कहा, पेट के लिए छोड़ना पड़ा।
“नारायण शास्त्री ने कहा, 'जो पेट के लिए धर्म छोड़ता है, उससे क्या बातचीत करूँ।' तब माइकेल ने मुझसे कहा, आप कुछ कहिये।
“मैंने कहा, न जाने क्यों मेरी कुछ बोलने की इच्छा नहीं होती। किसी ने मेरा मुँह जैसे दबा रखा हो।”
श्रीरामकृष्ण के दर्शनों के लिए चौधरी बाबू के आने की बात थी।
मनोमोहन – चौधरी नहीं आयेंगे; उन्होंने कहा है, फरीदपुर का वह शशधर जायेगा, अतएव मैं न जाऊँगा।
श्रीरामकृष्ण – कैसा नीचप्रकृती है! – विद्या का अहंकार दिखलाता है! उधर दूसरा विवाह किया है – संसार को तिनके बराबर समझने लगा है।
चौधरी ने एम. ए. पास किया है। पहली स्त्री की मृत्यु होने पर बड़ा वैराग्य था। श्रीरामकृष्ण के पास दक्षिणेश्वर प्रायः जाता था। उसने दूसरा विवाह किया है। तीन-चार सौ रुपया महीना पाता है।
श्रीरामकृष्ण – (भक्तों से) – इस कामिनी-कांचन की आसक्ति ने आदमी को नीच बना डाला है। हरमोहन जब पहले आया था तब उसके लक्षण बड़े अच्छे थे। उसे देखने के लिए मेरा जी व्याकुल हो जाता था। तब उसकी उम्र १७-१८ की रही होगी। मैं अक्सर उसे बुला भेजता था, पर वह न आता था। अब बीबी को लेकर अलग मकान में रहता है! जब अपने मामा के यहाँ रहता था, तब बड़ा अच्छा था। संसार की कोई झंझट न थी। अब अलग मकान लेकर रोज बीबी के लिए बाजार करता है। (सब हँसते हैं।) उस रोज वहाँ गया था। मैंने कहा, जा, यहाँ से चला जा; तुझे छूते मेरी देह किस तरह की हो जाती है।