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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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३ जुलाई, १८८४परिच्छेद ८६५६९

कर्ताभजा चन्द्र चैटर्जी आये है। उम्र साठ-पैंसठ की होगी। मुख पर कर्ताभजावालों के श्लोक रहते हैं। श्रीरामकृष्ण के पैर दबाने के लिए जा रहे थे, उन्होंने पैर छूने ही न दिये, हँसकर कहा, इस समय तो खूब हिसाबी बातें कर रहा है। भक्तगण हँसने लगे।

अब श्रीरामकृष्ण बलराम के अन्तःपुर में श्रीजगन्नाथ-दर्शन करने के लिए जा रहे हैं। वहाँ की स्त्रियाँ उनके दर्शनों के लिए व्याकुल हो रही हैं।

श्रीरामकृष्ण फिर बैठकखाने में आये। हँस रहे हैं, कहा, “मैं शौच को गया था, कपड़े बदलकर श्रीजगन्नाथ के दर्शन किये और कुछ फूल-दल चढ़ाये।

“विषयी लोगों की पूजा, जप, तप, सब सामयिक हैं। जो लोग ईश्वर के सिवा और कुछ नहीं जानते, वे साँस के साथ साथ उनका नाम लेते हैं। कोई मन ही मन सदा ‘राम ॐ राम’ जपता रहता है। ज्ञानमार्गी ‘सोऽहम् सोऽहम्’ जपते हैं। किसी-किसी की जीभ सदा हिलती रहती है।

“सदा ही स्मरण-मनन रहना चाहिए।”

(४)

शशधर आदि भक्तगण। समाधि में श्रीरामकृष्ण

पण्डित शशधर दो-एक मित्रों के साथ कमरे में आये और श्रीरामकृष्ण को प्रणाम करके आसन ग्रहण किया।

श्रीरामकृष्ण – (सहास्य) – हम लोग वधू-सखियों के समान शय्या के पास बैठे हुए जाग रहे हैं कि कब वर आयें।

पण्डित शशधर हँस रहे हैं। अनेक भक्त उपस्थित हैं। बलराम के पिता भी उपस्थित हैं। डाक्टर प्रताप भी आये हुए हैं। श्रीरामकृष्ण फिर बातचीत कर रहे हैं।

श्रीरामकृष्ण – (शशधर से) – ज्ञान का पहला लक्षण है, स्वभाव शान्त हो; दूसरा, अभिमान न रहे। तुममें दोनों लक्षण हैं।

“ज्ञानी के और भी कुछ लक्षण हैं। साधु के पास वह त्यागी है, कार्य करते समय – जैसे लेक्चर देते हुए – वह सिंह के समान है, स्त्री के पास रसराज है, रसशास्त्र का पण्डित। (पण्डितजी और दूसरे लोग हँसते हैं।)

“विज्ञानी का और स्वभाव है। जैसे चैतन्यदेव की अवस्था। बालकवत्, उन्मत्तवत्, जड़वत्, पिशाचवत्।

“बालक की अवस्था में कई अवस्थाएँ हैं – बाल्य, कैशोर्य, यौवन। किशोरावस्था में दिल्लगी सूझती है। उपदेश देते समय यौवनावस्था होती है।”

पण्डितजी – किस तरह की भक्ति से वे मिलते हैं?