भारतकोश
श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

DevanagariHindipublished711 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 711 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 76

१३ अगस्त, १८८२ | परिच्छेद | ५३

गायक – महाराज, किस उपाय से उन्हें प्राप्त किया जा सकता है?

श्रीरामकृष्ण – भक्ति ही सार है। ईश्वर तो सर्वभूतों में विराजमान हैं। तो फिर भक्त किसे कहूँ – जिसका मन सदा ईश्वर में है। अहंकार, अभिमान रहने पर कुछ नहीं होता। 'मैं'रूपी टीले पर ईश्वरकृपारूपी जल नहीं ठहरता; लुढ़क जाता है। मैं यन्त्र हूँ।

(केदार आदि भक्तों के प्रति) “सब मार्गों से उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। सभी धर्म सत्य हैं। छत पर चढ़ने से मतलब है, सो तुम पक्की सीढ़ी से भी चढ़ सकते हो, लकड़ी की सीढ़ी से भी चढ़ सकते हो, बाँस की सीढ़ी से भी चढ़ सकते हो, रस्सी के सहारे भी चढ़ सकते हो और फिर एक गाँठदार बाँस के जरिये भी चढ़ सकते हो।

“यदि कहो, दूसरों के धर्म में अनेक भूल, कुसंस्कार हैं, तो मैं कहता हूँ, हैं तो रहें, भूल सभी धर्मों में है। सभी समझते हैं मेरी घड़ी ठीक चल रही है। व्याकुलता होने से ही हुआ। उनसे प्रेम आकर्षण रहना चाहिए। वे अन्तर्यामी जो हैं। वे अन्तर की व्याकुलता, आकर्षण को देख सकते हैं। मानो एक मनुष्य के कुछ बच्चे हैं। उनमें से जो बड़े हैं वे 'बाबा' या 'पापा' इन शब्दों को स्पष्ट रूप से कहकर, उन्हें पुकारते हैं। और जो बहुत छोटे हैं वे बहुत हुआ तो 'बा' या 'पा' कहकर पुकारते हैं। जो लोग सिर्फ 'बा' या 'पा' कह सकते हैं, क्या पिता उनसे असन्तुष्ट होंगे? पिता जानते हैं कि वे उन्हें ही बुला रहे हैं, परन्तु वे अच्छी तरह उच्चारण नहीं कर सकते। पिता की दृष्टि में सभी बच्चे बराबर हैं।

“फिर भक्तगण उन्हें ही अनेक नामों से पुकार रहे हैं। एक ही व्यक्ति को बुला रहे हैं। एक तालाब के चार घाट हैं। हिन्दू लोग एक घाट में जल पी रहे हैं और कहते हैं जल। मुसलमान लोग दूसरे घाट में पी रहे हैं – कहते हैं पानी। अंग्रेज लोग तीसरे घाट में पी रहे हैं और कह रहे हैं वाटर (Water) और कुछ लोग चौथे घाट में पी रहे हैं और कहते हैं अकुवा (aqua) एक ईश्वर, उनके अनेक नाम हैं।”

$$\square\ \square\ \square$$