श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
DevanagariHindipublished956 पृष्ठ
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The Hindu Philosophy of Life, Ethics and Religion ॐ तत्सत् । श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र गीताकी बहिरंगपरीक्षा, मूल संस्कृत श्लोक, भाषा-अनुवाद, अर्थ- निर्णायक टिप्पणियाँ, पूर्वी और पश्चिमी मतोंकी तुलना, इत्यादिसहित । लेखक लो. बाल गंगाधर तिलक अनुवाद श्रीमान् माधवरावजी सप्रे 70833 बीसवाँ संस्करण तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥
- गीता ३.१९ शके १९०४ : सन् १९८२ मूल्य ७५ रुपये