भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

DevanagariHindipublished956 पृष्ठ

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गीताकी बहिरंगपरीक्षा ५९५ इस प्रकार, इस प्रकरणके आरंभमें दिये हुए सात प्रश्नोंका विवेचन हो चुका। अब इन्हींके साथ महत्त्वके कुछ ऐसे प्रश्न उत्पन्न होते हैं, कि हिंदुस्थानमें जो भक्तिपंथ आजकल प्रचलित हैं, उनपर भगवद्गीताका क्या परिणाम हुआ है ? परंतु इन प्रश्नोंको गीता-ग्रंथसंबंधी कहनेकी अपेक्षा यही कहना ठीक है, कि ये हिंदु धर्मके अर्वाचीन इतिहाससे संबंध रखते हैं, इसलिये, और विशेषतः यह परिशिष्ट- प्रकरण थोड़ा थोड़ा करनेपरभी हमारे अंदाजसे अधिक बढ़ गया है, इसीलिये, अब यहींपर गीताकी बहिरंग परीक्षा समाप्त की जाती है।