भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

DevanagariHindipublished956 पृष्ठ

पृष्ठ 860, कुल 956 में से

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पृष्ठ 860

चौदहवाँ अध्याय ८१५ § § मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ ३ ॥ सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः । तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥ ४ ॥ § § सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः । निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥ ५ ॥ तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् । सुखसंगेन बध्नाति ज्ञानसंगेन चानघ ॥ ६ ॥ रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासंगसमुद्भवम् । तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसंगेन देहिनम् ॥ ७ ॥ तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् । प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥ ८ ॥ सत्त्वं सुखे संजयति रजः कर्मणि भारत । ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे संजयत्युत ॥ ९ ॥ (३) हे भारत ! महद्ब्रह्म अर्थात् प्रकृति मेरीही योनि है और मैं उसमें गर्भ रखता हूँ; फिर उससे समस्त भूत उत्पन्न होने लगते हैं। (४) हे कौंतेय । (पशुपक्षी आदि) सब योनियोंमें जो जो मूर्तियाँ जन्मती हैं, उनकी योनि महत् ब्रह्म है और मैं बीजदाता पिता हूँ । (५) हे महाबाहु ! प्रकृतिसे उत्पन्न हुए सत्त्व, रज और तम गुण देहमें रहनेवाले अव्यय अर्थात् निर्विकार आत्माको देहमें बाँध लेते हैं। (६) हे निष्पाप अर्जुन ! इन गुणोंमेंसे निर्मलताके कारण प्रकाश डालनेवाला और निर्दोष सत्त्वगुण सुख और ज्ञानके साथसे (प्राणीको) बाँधता है। (७) रजोगुणका स्वभाव रागात्मक है और उससे तृष्णा और आसक्तिकी उत्पत्ति होती है। हे कौंतेय ! वह प्राणीको कर्म करनेके (प्रवृत्तिरूप) संगसे बाँध डालता है। (८) किंतु तमोगुण अज्ञानसे उपजता है और वह सब प्राणियोंको मोहमें डालता है। हे भारत ! वह प्रमाद, आलस्य, और निद्रासे (प्राणी)को बाँध लेता है। (९) सत्त्वगुण सुखमें, और रजोगुण कर्ममें, आसक्ति उत्पन्न करता है। परंतु हे भारत! तमोगुण ज्ञानको ढँक- कर प्रमाद अर्थात् कर्तव्यमूढतामें, या कर्तव्यके विस्मरणमें, आसक्ति उत्पन्न करता है। | [ सत्त्व, रज और तम, इन तीनों गुणोंके ये पृथक् लक्षण बतलाये गये | हैं। किंतु ये गुण कभीभी पृथक् पृथक् नहीं रहते, तीनों सदैव एकत्र रहा करते हैं।

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