श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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अठारहवाँ अध्याय ८७७ । समर्पित कर देनेसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है, अतएव इस अध्यायका मोक्ष- । संन्यासयोग नाम रखा गया है । ] इस प्रकार बाल गंगाधर तिलककृत श्रीमद्भगवद्गीताका रहस्य-संजीवन नामक प्राकृत अनुवाद टिप्पणीसहित समाप्त हुआ । गंगाधर-पुत्र, पूना-वासी, महाराष्ट्र विप्र, वैदिक तिलक बाल बुध ते विधीयमान । 'गीतारहस्य' किया धीश को समर्पित यह, तौर कौल योग भूमि शकमें सुयोग जान । ॥ ॐ तत्सद्ब्रह्मार्पणमस्तु ॥ ॥ शान्तिः पुष्टिस्तुष्टिश्चास्तु ॥