सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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४ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| अनाहूतो विशेथ (हि २ ५२) १६३।४७६ | अनुरागवन्तमपि (शिशु ९ ११) २९४।३८ | अन्तर्मोहनमौ (गीत ८ १७ २) २५१।७९ |
| अनित्ये प्रिय (मा १२ ८७३) ३८१।१७३ | अनुरागवर्तिना तव २८८।१६ | अन्तये सतत (राग ३ २०२) ३८१।१८९ |
| अनिर्वाच्यमानि (कवि २३) ३८१।१७४ | अनुलेपनानि (शिशु ९ २४) २९७।२० | अन्तर्वसति मार्जरी २३१।५९ |
| अनिर्वेदं श्रि(मा ५ १५०३) ३८१।१७६ | अनुवनं वनरा (शिशु ६ ४८) ३४४।३८ | अन्तर्वाणि मन्यमा ५९।२१० |
| अनिश्चितैरध्य(पच ३ २६१) ३८१।१७७ | अनुसरति करिकपो(शा प ८०८) ७३।२२ | अन्तर्विषमया (पच १.२११) ३४८।२२ |
| अनेष्टसप्रयोगा(भा ११ ७३) ३८१।१७९ | अनूनवेगादयमद्विती १२२।३ | अन्तर्विष्णोस्त्रिलोकी (कुव ४९) ११६।५५ |
| अनि सरन्तीमपि १३५।१६ | अनृतं सत्य (भार १३ २२४) ३८८।२१ | अन्तर्हिते शशिनि (शा ७८) ३२३।१२ |
| अनिभालित (शिशु १६ २४) २१७।५५ | अनृतं साहस (चा नी २ १) ३४६।१ | अन्तश्छिद्राणि (शा प क.१०) २४३।२०८ |
| अनिराकृततापसप ५९।२०२ | अनेकचित्त (का नी ९ ३४) ३८१।१८६ | अन्तस्तारं तरलतर २७६।३९ |
| अनिर्देश्योपभोगस्य रूप ३०५।१ | अनेकविद्वज्जनरत्नपूर्ण १०१।७ | अन्तक्रान्तिक (गोमट्ट) ३००।३८ |
| अनिलोंडितकार्यस्य १५८।२३८ | अनेकशास्त्रं बहु १७३।८७८ | अन्यायवस्थोऽपि (पच ४.७६) ४८।१४२ |
| अनिलनिखिलविश्वं प्रा २१४।८ | अनेकसंशयोच्छेदि परो (हि प्र १०) २९।२ | अन्येषु रे (मा १२ ६४९२) ३८१।१९१ |
| अनिशमपि मकरके २७८।२० | अनेकसुषिर वाद्य १८४।५ | अन्नप्रोतबृहत्कपा(म वी च१ ३५) ३६६।५ |
| अनिशं मतङ्ग २२९।१५ | अनेके फणिन. २३६।१६४ | अन्नाकल्पचलत्पयो ३६५।१० |
| अनिष्टादिष्टलाभे (हि १ ५) १६२।४३३ | अनेन पर्यास(सा द १० ६१) १०५।१९९ | अन्नैः कल्पितमङ्ग(शा प ४०७६) ३६६।३ |
| अनीर्युर्गुणदा (मा ५ १४०७) ३८१।१८० | अनेन मर्त्यदे (शा.प.स ४९) १५४।४१ | अन्नै खैरांप (माल्वी ५ १८) ३६१।३५ |
| अनुकुरुत खल (शा प स १०) ४७।११२ | अनेन रम्भोरु (शा प ३३२१) २६२।१८० | अन्धकारगरलं (शा प ३६३५) २९९।२२ |
| अनुकूलविधायिदैव २०९।६१ | अनेन सर्वार्थिकृता १०४।१९४ | अन्यत्वमन्वसमये १७१।७९६ |
| अनुकूला विमलाङ्गी १७०।७५३ | अन्त कटुरपि (शा प.प.१६) ४८।१२२ | अन्नदानात्परं दानं १५८।२१७ |
| अनुकूले विधौ देय यतः ६८।१ | अन्त करणतत्त्वस्य (उत्तर ३ १७) ८९।५ | अन्नवस्त्रसुवर्णानि (शा प ५३६) १९४।१९ |
| अनुकूले सति धातारि ९१।४० | अन्त कुटि (शा प श ३) २१८।७४ | अन्यं मनुष्य ह(मृच्छ.४.१६) ३४०।६६ |
| अनुक्षणमनुक्षणं १३५।२५ | अन्त कूजदुदारकण्ठ ३१४।७५ | अन्यकालपरिहार्य ३१८।१४ |
| अनुगन्तुं सता (शा प नी १) १५३।१ | अन्त क्रूराः ३४८।७ | अन्यतो यदि निजोप ७३।२० |
| अनुचितकर्मारं (हि.२.१४२) १६९।७२९ | अन्त कोधोजिहान १९५।७ | अन्यत्र भीष्माद्वा ३७१।१२१ |
| अनुचितमेवाचरितं ९१।४१ | अन्त पुरचरै (पच १ ६१) १४८।२६३ | अन्यत्र यापितनिशं ३२३।१७ |
| अनुच्छिष्टो दैवेरप २६३।२०० | अन्त पुरधनाध्य १५०।३२८ | अन्यत्र यूय कु(का प्र ३ २०) ३३४।१०६ |
| अनुदिनमधिकं ते २८६।१० | अन्त पुराणा विहित १३९।३ | अन्यत्र व्रजतीति (का प्र ४ ३३) ३५८।७७ |
| अनुदिनमनुकूल १७५।९४३ | अन्त पुरीयसि(सा द १०.२०) १०५।१९५ | अन्यथैव हि सौहार्दं (हि.१.९३) ८८।४ |
| अनुदेहमागतवत (शिशु ७ १३) ३१०।५ | अन्त प्रतप्त (शा प तृ १५) १७६।९७२ | अन्यदा भूषणं (शिशु २ ४४) १५७।१८४ |
| अनुनयति पतिं न ३५७।४४ | अन्त सतोषबा (नैषध.१२ ३९) १३८।८१ | अन्यप्रतापमा (पच १ १३०) १६४।५०३ |
| अनुनयमगृहीत्वा (शिशु.११ ९) ३२२।२ | अन्त सारविहीनस्य ३९।७ | अन्यमाश्रयते १६०।३३३ |
| अनुनेतुं मानिन्या १८५।२९ | अन्त सारैरकु (पच १ १४२) १४२।२७ | अन्यमु (शा प प्र ४) १६९।७३० |
| अनुपाल्यता (किरात ०.२०) १५१।३८८ | अन्तक पर्यवस्था ३७२।१६५ | अन्यान्यन्वनि (शिशु १० २८) ३१५।३१ |
| अनुबन्धं च (मा ५ ११०२) | अन्तरङ्गममञ्जय २५४।२ | अन्यवर्णपरावृत्त्या (शा प १९६) ३७।३ |
| अनुबन्धानुपे (मा ५ ११०८) ३८१।१८३ | अन्तरायतिमिरोप २१।६ | अन्यस्त्रीस्पृहयालवो १९८।३९ |
| अनुभवत ददत वित्तं (विक्रम ७५) ६२।१५ | अन्तर्गता मदनव (शृ न.१६) २८४।२० | अन्यस्य लगति कर्णे ५७।१५४ |
| अनुभवत युवत्यो ३३४।११६ | अन्तर्गतैर्गुणे कि द्वि ८२।३९ | अन्या जगद्धितमयी (रसगङ्गाधर) ३९।२५ |
| अनुभवन्नवदोलम् ३३२।५६ | अन्तर्गूढानर्थानन्वजय ३१।२५ | अन्यानि शास्त्राणि विनो ४३।३ |
| अनुममार न (नैषध ४ ७९) २८२।१२८ | अन्तर्दुष्ट सदा (हि २ ९७) ३८१।१८८ | अन्यायवित्तेन कृतो १७२।८३१ |
| अनुययौ विधि (शिशु.६ २७) ३४१।३३ | अन्तर्नाडीनियमितमरु ९१।३९ | अन्यायोपा (चा नी.१५.६) १६६।५९७ |
| अनुयातानेकजन परं १५१।३७५ | अन्तर्बलान्येवमुमुष्य २३०।२७ | अन्यार्थमङ्गीकृत १०४।१०८ |
| अनुयाति न (द ५९) ३८१।१८४ | अन्तर्भूतो निवसति जडे ४०।२८ | अन्या सा सरसी (शा प ८०६) २२१।२९ |
| अनुरणन्मणिमेखल २६९।४१० | अन्तर्मलिनदेहेन बहि (कविता ८) ५५।६२ | अन्यास तावदु (सु ७३५) २२३।७९ |
| अनुरागवती सध्या(ध्वन्या १.१३) ९१।३५ | अन्तर्मलिनससर्गाच्छुद्ध ८७।२ |