सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 434, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 434
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ३
| अदम्भा हि रम्भा २५३।१७ | अधरे मधुरा सरस्व २७०।३० | अनन्नोद्भूतभूतोघम (सु २००६) ७८।३ |
| अदाता पुरुषस्त्यागी (शा प ४६८) ७०।२ | अधरोऽयमवीरा (कुव ७०) २६१।१४१ | अनन्यक्षुण्णश्रीमलय ३७६।२४ |
| अदातारं दातृप्रवर १०६।१५६ | अधरोऽयं कुरङ्गा २६१।१४४ | अनन्यसाधारणका २६७।३३६ |
| अदाता वंशदोषेण १६१।३८२ | अधर्मेण च (म २ १६१) ३८०।१४६ | अनपेक्षितगुरुवचना (सु २) ३०।१० |
| अदातुर्मनसः कापि न ७।१२१ | अधाक्षीच्चो ल(शा प १२६७)१९९।१०३ | अनभिज्ञो गुणाना यो १४८।२७१ |
| अदुगों विषय कस्य (हि ३ ५४)१४३।६४ | अधारि पद्मेषु तद् (नैषध १ २०)२५२।१ | अनभिध्या पर (भा १३ ५८६) १५४।३८ |
| अदृष्टपूर्वमस्माभिर्य (सु १७२९)३४३।९७ | अविकरतलन (का प्र ७ २३३)२८६।१२ | अनन्यासेन (काव्या २ २४७)३८१।१५३ |
| अदृष्टपूर्वा (भाग १० १२५।९)३७९।७९ | अधिगतपरमार्थान्पृ(भर्तृ.२.१४) ३९।७६ | अनंन्नवृत्ति श्रवणाम् ३१।२८ |
| अदृष्टमुखभङ्गस्य युक्त (सु ५०३) ७३।८ | अधिगमनमनेकास्ता २०९।११ | अनयनपथे प्रिये न २८८।७ |
| अदृष्टव्यापारं (का नी ९ ३८)२२९।२३९ | अधिदेहली हन्त हेम २७५।१५ | अनयोरनवद्याङ्गि(काव्या ८ ७)३१२।१६ |
| अदृष्टे दर्शनोत्क (का प्र ५ १२८)२९१।१ | अधिपञ्चवटीकुटीरव २१।७८ | अनर्घ्यमपि मणि १६०।३२१ |
| अदेशकाल (पञ्च ३ ११३) ३७९।७७ | अधिभिल्लपल्लिगल ३७।९ | अनर्थकं विप्र(भा ५ १०७८) ३८१।१५५ |
| अद्भुतस्तर्कपाथोधिर् ४२।१ | अधियामिनि गजगा २९८।६ | अनर्थमर्थत (भा ० १९५५) ३८१।१५६ |
| अद्य द्यूतजिताथ (सु २११०) ३१६।४ | अधिरजनि जगाम (शिशु ७ ५०) ३१०।२ | अनर्थित्वाम्नतुष्यणा ३४८।१४ |
| अद्य धारा सदाधारा ११७।८३ | अधिलवङ्गममी( शिशु ६ ३६) ३४७।११ | अनलस्तम्भनवि (शा प ३४४३) २८४।६ |
| अद्य शीतं वरीवर्ति ३४५।७ | अधिश्रीरुद्याने त्वमसि २४०।११८ | अनलपदधारिपु (नैष १ १०)१०५।१२५ |
| अद्यापि तत्प्रचलकु(सु १२९१)२७८।३९ | अधीतव्यवहारज्ञं मौलं १४२।२ | अनवरतधनुर्ज्यास्फा १४१।२ |
| अद्यापि तां कन(शा प ३४६९)२७८।४१ | अधीतिबोधाचर (नैषध १ ४)१०५।१२० | अनवरतपरोपकरण ४७।१०६ |
| अद्यापि तिष्ठति दृशो (कुव ९६)२७९।५३ | अधीत्य चत्तु (शा.प ४१७४)३७५।२३२ | अनवसरे गुणवानपि(शा प ३०६)८२।३३ |
| अद्यापि दुर्निवारं ४८।१२३ | अधुना मधुकरापतिना १८८।४६ | अनवसरे च यदुक्त १७०।७५६ |
| अद्यापि नूनं हरको २८२।१२५ | अष्टपरिषतञ्निचोल २७८।३० | अनवाप्यं च (भा ५ १३०४) ३८१।१५८ |
| अद्यापि नोज्झति (कौ.५० ) ५०।२०० | अधोऽध पश्यत (हि २ २) १६३।४६७ | अनस्ति सीदति (शा प १६२) २३४।१४२ |
| अद्यापि सा मन(शा प ३४७०)२७८।४२ | अधोविधानात्क(नैषध १ १८)१०५।१३१ | अनस्तमितसाह (शा प १०९८) २१७।४९ |
| अद्यापि सुन्दरि तया २९१।१२ | अध्याक्रान्ता वसेति १०७।१७४ | अनाकाशे (शा प ३३२४) २६३।१९७ |
| अद्यापि स्तनशैलदुर्गे(हनु ना २)३०२।९५ | अध्यायोथनवेदि मार्ग १३४।२४ | अनाकृतैरैव (शा प ३२८९) २५५।२७ |
| अद्याप्युन्मदयातु (शा प ४०६७)३६५।७ | अध्याहार स्मर(नैषध.१२ ५७)१३६।३५ | अनागतविधा (शा प नी ११) ६२।६ |
| अद्यारभ्य कठोरका ३६१।४५ | अध्रुवेण शरी (विक्रम १६७) ३८०।१४७ | अनाघ्रातं पुष्प (अ शा २ १०) २५५।२५ |
| अद्यारभ्य यदि प्रिये (सु १२५९) ३०९।९ | अध्वनि पदमहपर ३०।१३ | अनातुरोत्कण्ठि (मालवि ५०) ३८१।१५९ |
| अद्यैव कुरु(मा १२ ६५२५) ३८०।१४३ | अध्वन्यध्वनि तरव २३६।१० | अनात्मवान् (का नी ५ ४) ३८१।१६१ |
| अद्यैव हसितं (शा प ४१६८)३७२।१२१ | अध्वन्यध्वनि भूरूह २४१।१४२ | अनादायी व्ययं १६७।६५३ |
| अद्योत्सङ्गवसद्भुजंग ३२६।३० | अध्वन्यस्य वधूर्वि(सु १६८०)३३५।१४३ | अनादिष्टोऽपि भूप १४४।९१ |
| अद्रोह सर्व (म ३.१६७८) ८४।७ | अध्वन्यैर्मकरन्द ३३५।१४५ | अनाहतचमूपतिप्रहि १५।२४ |
| अद्विसवीक्षणं चक्षुरद्वि २८७।१ | अध्वा जरा (भा ५ १५२३) ३८०।१४९ | अनादेयं नादरीत(म ८ १७०)३८१।१६२ |
| अद्वैतं सुखदु ख (उत्तर १ ३९) ५२।२६७ | अध्वानं नैकचक्र २९५।६९ | अनादेयस्य (म ८.१७१) ३८१।१६४ |
| अद्वैतोक्तिपदन्पदन्नपि ३७६।२५५ | अनङ्कुरितकूर्चक. स ३४९।७१ | अनायन्ता (भा ३ ८३) ३८१।१६५ |
| अध करोषि रला (शा प.स.५) २१५।४ | अनङ्गमङ्गल (का प्र ७ १४१) २५९।७२ | अनाम्नायमला(भा ५ १५२४)३८१।१६७ |
| अधना धनमि(चा.नी.४ १८) १५९।२८९ | अनङ्गरङ्गपीतोडस्या. २६८।३८३ | अनायके न (शा प १४६६) १५४।३६ |
| अधर्मं बाधते भूयो (वृ.६४) १६९।१६८ | अनङ्गेनाबलास (शा प ३०७६) २५०।१ | अनायासकृशं म(शा द.१० ६७) २५४।४ |
| अधर किसलयरोग २५५।८ | अनङ्गोऽयमनङ्ग(शा प ३७९८) ३१२।११ | अनारतपरिखलन् १३३।१८ |
| अधरः किसल (अ.शा १ १८)३८०।१४४ | अनधिगतमनोरथ (विक्रम ६३) ३१३।४४ | अनारम्भा (भा ५ १११३) ३८१।१६८ |
| अधर खलु बिम्ब २६१।१४३ | अनध्वन्या० (कविता १०५) ३८१।१५२ | अनार्यप्रज्ञाना (शा प.३७७८) ३५२।३४ |
| अधरममृतं क २६१।१५३ | अनन्तनामधेयाय (सु ११) १।३ | अनार्यवृत्तम (भा ५.१४३२)३८१।१७० |
| अधरस्य मधुरिमाणं १७७।७९९ | अनन्तपदविन्यासरचना ३२।१२ | अनावृतनवद्वार (द १९) ३८१।१७१ |
| अधरे नववीटिका २५१।२९ | अनन्तपार किल १७३।८७९ | अनालोच्य प्रेमगा. (सु ११७०) ३८०।१४ |