सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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६ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| अभिनवनलिनी (शा प म ५) २२३।७२ | अमरैरमृतं न (सु ४२९) ५९।२०६ | अम्बरमेष रमण्यै ३४५।९ |
| अभिनवनवनीत २२१।२९ | अमलमृणालका २५४।३६ | अम्बरविपिनसिदानी २९७।५ |
| अभिनवनवनीत २२१।३० | अमलात्ममु प्रति(शिशु ९ ३७) ३००।६२ | अम्ब श्राम्यसि तिष्ठ २४१।६५ |
| अभिनवपुलकालीं ३१९।३२ | अमितगुणोऽपि पदा (रसगङ्गाधर) ८२।३७ | अम्ब श्वश्रु यदि त्वया ३५३।५६ |
| अभिनवयवसश्रीशा ३४१।५३ | अमित समित (सा द ४ ७) १०२।३६ | अम्बा कुप्यति तात १८३।६३ |
| अभिन्नवेलौ (काव्या २ १८४) ३८२।२१७ | अमित्रं नैव (मा १२ ५२९८) ३८२।२३० | अम्बा तुष्यति (सु ३१८४) ६६।३४ |
| अभिप्रायं यो(मा ५ १३५८) ३८२।२१८ | अमित्रादुन्नतिं (हरि ११७७) ३८२।२३१ | अम्बुजमम्बुनि जातं ३६।३८ |
| अभिप्रेतार्थसि (सु ९) २।८ | अमित्रो न (मा १ ५५६४) ३८२।२३३ | अम्बुजमम्बुनि मग्न २६२।१७१ |
| अभिभवति (किरात १० २३) ३४०।२५ | अमित्रो मि (मा १२ ४९२५) ३८२।२३४ | अम्भ कर्दमतामु १२१।१६० |
| अभिभूतोऽप्यव १५०।२२७ | अमी तटसमीपनि ३२६।२२ | अम्भसा भिद्य (पञ्च १ ११५) १६४।५०२ |
| अभिभूय सतामव २९४।४४ | अमी तिलास्तै (शा प ११८४) २४६।४२ | अम्भासि जलज (हि १ १९६) १६३।४६५ |
| अभिमतफल (शा प स १४) १०६।१६८ | अमी पृथुस्तम्भभृत ३४४।२२ | अम्भोजप्रकरोऽथ २२५।१४५ |
| अभिमतमहामानग्र (भर्तृ ३ २३) ९७।९ | अमी शिरीष ३३७।६२ | अम्भोजाक्ष्या पुरन ३५६।२४ |
| अभिमान (मा १३ २१८१) ३८२।२२३ | अमीषां जन्तू (शा श २ ९) ३७३।१७९ | अम्भोजिनीवन (भर्तृ २ १५) २२१।१५ |
| अभिमानधनस्य ८०।३१ | अमीषा प्राणाना (भर्तृ.३ ७) ७७।४५ | अम्भोधि स्थल (सु ३१५२) ९४।११८ |
| अभिमानवतो १५१।३९१ | अमी समुद्भूतसरो ३४४।२७ | अम्भोमुचा सलि (सु.२४१३) २०७।६ |
| अभिमानवता(राग १ ०२६) ३८२।२२१ | अमुं कालक्षेपं (शा प ७८४) २१३।५३ | अम्भोरुहमये ज्ञात्वा १९४।३१ |
| अभिमुखनिह (सु.०२७२) १५१।३६८ | अमुना मरुरूपेण २२०।३ | अम्भोरुहाक्षि शंभो ३५९।९७ |
| अभिमुखपतयालुभि ३२०।११ | अमुष्मिन्ना (नैषध १८ २२०) १२७।१९२ | अम्भोवाहमुरद्रि २४३।१०८ |
| अभियुक्ते (मा ५ ९८३) ३८२।२२४ | अमुष्मिन्द्युवानङ्गम २९७।२९ | अम्लानपङ्कजा माला १९३।११ |
| अभियोक्ता (का नी ९ ००) ३८२।२२६ | अमुष्मिन्स्याने (शा प ८७९) ०२७।१९१ | अय खलु मृणालि ३२७।१९ |
| अभिलषन्ति तवा २६१।१४७ | अमुष्मिंल्लाव (सु १५५८) २६८।२६२ | अयं च सुरतजवा (मृच्छ ४ ११) ३५५।२ |
| अभिलषसि यदि (कुव ३८) २८२।१४७ | अमुष्य दो०र्यमिरि(नैषध १ २२) २५२।३ | अय त्रयाणा ग्रामा २६३।२१४ |
| अभिलष्य (का नी ५ १०) ३८२।२२७ | अमुष्य सुषिता २५९।६५ | अयं दरिद्रो (नैषध १ १५) १०५।१२८ |
| अभिवीक्ष्य (शिशु १३ ३१) १२६।३८ | अमुष्य विद्या (नैषध १५) १०५।१२१ | अयं निज परो (शा.प २७३) ७०।९ |
| अभिषिषेणयिषु (शिशु ६ ६४) ३४०।९ | अमुष्या लावण्य मृदु २५४।३० | अयं नेत्रादत्रेर्जनि ३०१।८० |
| अभुक्तौया यस्या (भर्तृ ३ ५९) ८०।३४ | अमुष्योर्वीभ (नैषध १२ ८२) १०६।१६४ | अयं पटो मे पितु ३६४।३९ |
| अभूत्प्राची (सु ००१८) ३२४।३६ | अमुल्यस्य मम (सु १५७०) २६९।४०३ | अय पुर पार्वेण ३०४।१४७ |
| अभूदम्भोरारौ सह ६०।२५० | अमृतं शिशिरे (पञ्च १ १४४) १६४।५०८ | अयं मार्तण्ड (सा द १०.३६) १०६।१६१ |
| अभेदेनोपास्ते (सु ११०२) ५२।२४३ | अमृतं किरति हिमा ४८।१९७ | अयं मृग समायाति १८।१७ |
| अभ्यास कर्मणा (सु १४५४) २५३।१ | अमृतं चैव (मा १२ ६५५२) ३८२।२३६ | अयं मृदुमृणालिनी ३२४।४३ |
| अभ्युत्थानमु (शा प ३७५७) ३५१।३६ | अमृतजलधेः पार्यं पार्यं ३१।३६ | अय मे वाग्गुम्फो ३३४।५ |
| अभ्युद्गता वसु(स क १.७७) १०५।१३५ | अमृतद्रवमाधुरीधुरीणा २६३।२१८ | अयं रत्नाकरो (सा द १० ७०) २१५।६ |
| अभ्युन्नतस्तनयुगा ३०४।४ | अमृतद्रवैर्विदध ३००।६१ | अयं रेवाकुञ्ज कुञ्ज ३५२।३५ |
| अभ्युन्नताङ्गुष्ठ(कुमार १ ३३) २६९।४१२ | अमृतं तदधरबिम्बे २५३।११ | अय वारामेको (भल्लट १०८) २१६।३३ |
| अभ्युन्नतेऽपि जलदे २२०।४ | अमृतं दुर्लभ नृणा १५६।१२५ | अय विपाको वद कस्य २८।५७ |
| अभ्युपयुक्त सद्विर्ग (सु ४७१) ७२।४४ | अमृतममृतं (वामन सू ३ २) २५२।५० | अयं स्वभाव खत ४९।१७६ |
| अभ्रच्छाया (पञ्च २ १२०) १५६।१५१ | अमृतममृतं (शा प ३५१९) २७३।१८ | अय पिण्ड इवो (शा.प.दु.२१) ५४।१७ |
| अभ्रच्छाया तृणा १६०।३२६ | अमृतवचनलीला २२७।१८९ | अयमङ्कुरभा (शा.प.३२७२) २५५।१४ |
| अभ्रध्वानैर्मुखरि २८९।५५ | अमृतस्येव कुण्डानि (सु १४१०) २५१।५ | अयमतिमठरा. प्र (शिशु ४ २०) १४०।१ |
| अभ्रदयनम्धु ३३२।५२ | अमृतोत्प्रेक्षणे रागं (शा प १७) ३२।१० | अयमपि खरयोोषि २९५।५५ |
| अभ्रन्भ्रमक्षरं नास्ति १९६।१५८ | अम्बर विनय (शिशु २० ६२) ३१०।२३ | अयमपि पुरुहूतप्रे २९५।५८ |
| अमन्दमणिनूपुर(शा प ३९२९) ३४६।३८ | अम्बरमनूरुलङ्घयं ४८।१५० | अयमभिनवमेघश्या(मालती ९ ५) १४०।२ |
| अमरतरुकुसुमसौर २२३।५३ | अम्बरमम्बुनि (शा.प.५२८) १८९।५८ | अयममृतनिधानं (भर्तृ स.२०९) ९३।८४ |