सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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१४ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| उडडुराजमुखी मृग २५।३९ | उत्तुङ्गस्तनपर्वताद् २६८।३६६ | उदयन्नेव सविता (कुव ५६) ८८।१५ |
| उड्डीन विहगैरमंत २९।१८ | उत्तुङ्गस्तनभरता २५३।१५ | उदयमयते (का प्र १० ४३३) ३२७।१८ |
| उड्डीना गुणपत्रिण (शा.प.३९५)७४।३७ | उत्तुङ्गस्तनभार २६८।३६७ | उदयमुदित (शिशु ११ १२) ३२२।८ |
| उत्कण्ठयति (कुव ५०) ३४।१८ | उत्तुङ्गस्तनमण्डलोपरि ९६।९ | उदयशिखरि (शिशु.११ ४७) ३२७।१६ |
| उत्कर्णोऽयमकाण्ड २०।७४ | उत्तुङ्गस्तनशैलदुस्तर २७४।३२ | उदये सविता रक्तो ४५।१९ |
| उत्कर्षवाचिजगुणो ४८।१९९ | उत्तुङ्गस्तरु (शा प १०५९) २८३।१९५ | उदरद्वयभर (शा.प.६४) ३६४।१७ |
| उत्कूजन्सु वटे(सूक्ति.१४/२)२२६।१४७ | उत्थापित सय (रघु ७ ३०) १२८।२६ | उदर्कभूतिमि १५८।२३६ |
| उत्कूल ज्वलिता (शा प ४०७७)३६६।४ | उत्थाय हृदि लीयन्ते (शा प ४०१)६५।१ | उदस्य धैर्यं (किरात ८ ५०) ३३८।९३ |
| उत्कुलोत्कूल्य (मालती ५ १६) ३६६।७ | उत्थायोत्थाय (शा प ६६८) १६१।४३२ | उदस्योच्चै (शा प.१२१२) २३५।१६० |
| उत्क्रान्तानामा (शिशु १८७३)१३०।१०२ | उत्थिता (का नी ५ ६०) ३८३।२४६ | उदारचरितस्त्या (शा प ३८९) ७१।१४ |
| उत्क्षिप्तं कर (सा द.३ ७६) ३५६।३० | उत्थितो निशि २६१।१४५ | उदारस्य तृणं वित्तं १५६।१८४७ |
| उत्क्षिप्ता अपि १२८।१४ | उत्पतन्ति (पच २ १३०) ३८३।२४७ | उदासीना लीनामपि २५४।३३ |
| उत्क्षिप्य करि (कुमार.१६ ३४) १२८।१५ | उत्पत्त्युत्पन्नशिष्टा १९३।२९० | उदाहरण (किरात ११.६५) ७९।१४ |
| उत्क्षिप्योच्चै (शिशु १८.३८) १२९।७६ | उत्पन्नम (हि ४.७) ३८३।२४८ | उदित प्रिया (शिशु ९ ६९) २७८।३३ |
| उत्खातं निधि (भर्तृ ३ ५) ७७।४९ | उत्पाद्यत्यखलमिदं २८६।३ | उदितवति (शा.प ११४१) २४४।२१२ |
| उत्खातच्छिन्न २९८।३९ | उत्पादिता (भर्तृ स ४२३) ७०।३६ | उदितवति परस्मि १९१।८० |
| उत्खातदैवत (शा प ४००४) ३६२।२१ | उत्पुल्य य शिख २३०।३१ | उदितेऽपि तवावनीन्द्र १३३।७ |
| उत्खाताम्प्रति (हनु ९ ३५) १४२।१५ | उत्फुल्लारा (शिशु १८ ५३) १३०।८५ | उदितोरुसादमति (शिशु ९.७७) ३११।९ |
| उत्तंस केकिपिच्छैरमरकत २९९।२२ | उत्फुल्लगल्लैरा (शा प १६२) ३२।८ | उदीरितोऽर्थ (पच १ ४४) १७४।९११ |
| उत्तंस कौतुक (शा.प ११०७) २३९।१०९ | उत्फुल्लपङ्कजनिषक्त ३३३।८१ | उदेति पूर्वं कुसु(अ.शा ७ ३०)१०४।१९३ |
| उत्तंसेषु न नर्ति (शा.प १२९४)२१७।५९ | उत्फुल्लमानसरसीरुह २२१।२७ | उद्गर्तन्दुभवि (किरात ९ २४) ३००।४१ |
| उत्तत्तोऽयमुदंगम ३३७।५८ | उत्फुल्लरभ्यसह २३९।१११ | उद्गर्भहणतरु (वामन का १३५) ३०१।६९ |
| उत्तमं सुचिर नैव (सु ३०६) ४६।६८ | उत्फुल्लामलकोमलो २१।८१ | उद्घाटितनवद्वारे (ऊट) ३६७।१७ |
| उत्तमं स्वार्जितं १६०।३१९ | उत्फुल्लार्जुनसर्ज(मालती ९ १७)३४२।६५ | उद्दण्डे भुजदण्डे १०३।६५ |
| उत्तमं प्रणिपा (पच ४ ७४) १५८।२४६ | उत्सङ्गरङ्गलितोरु (शा प ५४९) २०६।१ | उद्घानाम्बुदवर्धमान २१९।१६ |
| उत्तम क्लेशविक्षोभं (वृ श १०) ४६।५५ | उत्सवे व्यसने चैव (चा नी १७) ८८।५ | उद्दामदानद्विप (कुमार १४ ४१)१२८।४२ |
| उत्तमर्णधनदान ७३।२८ | उत्साद्य कुन्तलम ३२५।१० | उद्दामदिग्द्विरदच २९७।२४ |
| उत्तमस्तोषमायाति १६९।७०८ | उत्साहसम्पन्नम (पच.२ १०९) ६३।२५ | उद्दामद्युमणिद्यु (सूक्ति.६०.२०)१३७।४६ |
| उत्तमा (शा प.१४८७) १५४।५६ | उत्साहस्य प्र (शा प १४०९)१५०।३१९ | उद्दामभ्रमिवेगविस्तृत(सूक्ति.२.३२)६।७१ |
| उत्तमानापि स्त्रीणा(रसगगाधर)३४९।३७ | उत्सिक्त कुसुमा ३२६।२९ | उद्दामार्वुदवर्धिता (सु २५५५)३५७।३८ |
| उत्तमोऽप्यधमस्य (वृ.श ७०) १६९।७०१ | उच्छङ्खलम्बुजदृशा ३३३।८० | उद्दामाकार्शदीय्य १८४।७४ |
| उत्तरङ्गय कुरङ्ग(श प ३५५७) ३०५।१६ | उदञ्चत्कावेरी (शा प ३८१०)३३४।१३२ | उद्धतैरेव (शिशु.१० ३२) ३१५।३५ |
| उत्तरन्ति विनि (कुमार ८ ३५) २९४।१४ | उदञ्चदक्षोजद्वय २५५।३४ | उद्धतैनिभृत (शिशु १०.७६) ३१९।१९ |
| उत्तरीयविन (शिशु १० ४२) ३१६।२ | उदञ्चय दृगञ्चलं ३०६।३९ | उद्धर्तु किल शैलकेलि २९९।२ |
| उत्तानामुपधाय २७०।४२९ | उदधिरवधिर्व्याप्तं ५१।२१७ | उद्भूतपाशुपटलानुमित १३९।२ |
| उत्तोनो (का प्र ७ ३०४) ३७१।१९९ | उदन्वच्छिन्ना (भर्तृ ३ २०) ५१।२३३ | उद्धयेत तनुलतेति २७७।५७ |
| उत्तालालकबभ्र २५६।५५ | उदमज्जि कैट (शिशु ९ ३०) ३००।५५ | उद्धूयेत नतभ्रू २८८।२१ |
| उत्तिष्ठ क्षणमेक (पच २ २४) ६७।६८ | उदयगिरितटस्थ. (सु २०२८) २९५।४७ | उद्बन्धकेश (रघु.१६ ६७) ३३८।६८ |
| उत्तिष्ठ दूति (सा द ३ ८३) ३५८।६९ | उदयतटान्तरित २९९।९ | उद्भासिताखिल (भर्तृ २ ४९) ६०।२३८ |
| उत्तिष्ठन्त्या (वेणी [पा ]१ ३) ९६।१४ | उदयति कलमन्द्रै ३०१।७७ | उद्विग्नं किमिदं २६५।२९५ |
| उत्तिष्ठमान (शिशु २ १०) १४१।२९६ | उदयति तरुणिम २५५।१२ | उद्वेगं प्रतिपद्य २६६।२९६ |
| उत्तुङ्गमत्तमातङ्गम २२९।३ | उदयति यदि (विक्रम २४९) ५१।२२२ | उद्यत्करकरवाल (शा प १३२) २७।२१० |
| उत्तुङ्गवातायनगो ३७३।१६९ | उदयति वित (शिशु ४.२०) ३२७।५ | उद्यतेष्वपि (हि ३.१५) १४४।७० |
| उत्तुङ्गशैलशिखर (सु ८३७) २३०।२६ | उदयमुदयरीक्षणाय २५३।१६ | उद्यद्वहिंषि दर्दुरा (शा.प.३३९७)३३०।३ |