सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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| संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः | १७ | |
|---|---|---|
| एतललब्धमिदं च ३९४।६७५ | एष क्षुञ्चाति पङ्के दल १४१।५ | औषसातपभयाद (किरात ९ ६१) २९७।७ |
| एतस्मादमृत (शा प १०८५) २१६।२७ | एष ते (कुव १६७) ३८७।३९१ | क |
| एतस्मादिरमे (भर्तृ ३ ६४) ३८२।२५९ | एष बक सह (शा प ८९०) २२९।२२६ | क पृच्छाम सुराः ३८६।३६९ |
| एतस्मिन्दक्षि(शा प ३८१९) ३३५।१४७ | एष वन्ध्यासुतो याति ३६३।५ | कं योजयेत् ३८४।३०४ |
| एतस्मिन्मरुमण्डले(शा प ११२९)२१९।९ | एष वृक्षशिखरे (कुमार ८ ३६) २९४।१५ | क संजघान कृष्णः १९६।१५ |
| एतस्मिन्मलया (शा प ८६७) २२७।१७५ | एष षट्पदयुवा २४३।२०३ | कंस ध्वंसयते मुर २४१।६७ |
| एतस्मिन्वन (शा प १०२०) २४०।१२५ | एष स्वभावो (र २ ३९) ३८७।४०३ | कंसारातेर्वद गमनं २०९।७३ |
| एतस्मिन्विजने वने १३२।३७ | एष सूर्याशुसत (शा प ३८३६)३३६।३३ | कसारिचरणोद्भूत (शा प ७९६) २२१।३ |
| एतस्मिन्सहसा वसन्त २३०।५ | एष स्वर्गतर (शा प ३६३०) ३०१।९४ | क क कुत्र (का प्र ७ २२४) २३१।४८ |
| एतस्या रतिवल्लभ ७५६।४९ | एषा का मुक्तमुक्ता ३२८।८ | क कगोरिपिता २०४।११७ |
| एतस्या करिकु (सूक्ति १) ३३९।११६ | एषा ते हर का सुगा ७२।३ | क कान्तारमगा १९७।३४ |
| एतस्या स्तनपद्म २७०।६१ | एषा धर्मपताकिनी (शा प १०७) ९।१३० | क कुर्याद्भुवन सर्व १९६।७ |
| एतस्योन्नतसर्वक १११।२४८ | एषा पुष्करिणी मरा २२२।३६ | क कौ कं कौं कान् १९६।१६ |
| एता नवाम्बुधरका ७५।२१ | एषा फुल्लकद (मृच्छ.५ ३५) ३५७।३१ | क खे चरति (सूक्ति ९८.०८) १९६।१२ |
| एता करोपी (रघु १६ ६६) ३३८।६७ | एषा भविष्यति विनि २५३।२६ | क खे भाति हुतो २०४।११५ |
| एता संप्रति गर्भ ११५।५२ | एषैव योषिता धन्या ३५१।२ | क पूज्य सुजन २०४।११९ |
| एता स्खलद्दल यस २५३।०५ | एष्यति मा पुनरय ३५२।१९ | क प्रार्थयते मदन(शा प ५५५) १९७।३१ |
| एता स्वार्थपरा (पच ५ ६३) ३४९।३४ | एष्यन्ति या (नैषध ७ १०५) २६९।४१८ | क श्रद्धायति (मृच्छ ५ ३८) ३८०।४१४ |
| एता गुरुश्रोणि (रघु १६ ६०) ३३७।६१ | एष्यन्त्यवश्यमद्य ३४३।१०० | क. स्यादम्बुदया २०४।११२ |
| एतादृशे कलियुगेऽपि ९९।११ | एहि गच्छ पततोत्तिष्ठ (ध्वन्या ३) ६५।५ | क स्वभाव (राग त १ २३०)३८७।३८८ |
| एतानि नि सह (शा प ३४१०) २८४।१९ | एहि स्वागतमा १८०।१०४३ | क स्वभावगभी (सु.३१५९) ६६।१८ |
| एतानि बालधव (शा प ९६९)२३४।१४३ | एहि हे रमणि (शा प ५३७) १९४।२८ | ककुभा मुखानि (शिशु ९ ४२) ३००।६७ |
| एता या प्रेक्ष(शा प ४१९९)३७२।१४४ | ऐ | कचकुचचुचुकाग्रे १५।२१ |
| एतावज्जन्मसाफ (हि २ ४७) १६३।४७० | ऐन्दवादचिं (काव्या ३ १८३)३८७।४०८ | कञ्चिदेव समय समा ७२।११३ |
| एतावत्सरसिजकु २०९।७ | ऐन्द्र वनु (काव्या सू ५ १ २७)३४४।१७ | कटाक्षेणापीष (सा द १० ९८) २८०।७७ |
| एतासु केतकि (शा प १०१३) २३९।९३ | ऐश्वर्य नहुषस्य ११२।२७१ | कटी मुष्टिग्राह्या (सु २३६०) २६५।४६ |
| एता हसन्ति च रु (मृच्छ ४ १४)३५५।८ | ऐश्वर्यमद (भा ५ १।१४७) ३८०।३९८ | कटुकं वा मधुरं १६९।७२१ |
| एते केतकबू (सूक्ति ६१ ३०) ३२४।५० | ऐश्वर्यस्य विभूषण (भर्तृ स ४१) ८४।२० | कटु कृणन्तो मल ४९।१७४ |
| एते ते गिरिकूटसद्म १४०।५ | ऐश्वर्यात्संह (चा नी ३ ३३) ३८७।४०० | कटुतीक्ष्णोष्णलव ३७१।१३९ |
| एते ते दुरति (शा प ३८८२) ३४२।७८ | ऐश्वर्यादनपेत (मुद्रारा १ १४) १५२।४१९ | कटुभिरपि कठोरचक्र २७।५ |
| एतेनोत्कृत कण्ठप्र ११२।२८२ | ओ | कठिनतरदामवेष्टनत्ले २२।१०९ |
| एते पाटीरवाटीनव ३२६।३६ | ॐकारो मदनद्वि(शा प ३६२९)३०१।०२ | कठिनहृदये मुच (अमरु ५३) ३०७।५१ |
| एते वारिकणा किर ३५४।६३ | ओजसापि ख (किरात.९ ३३) ३००।४८ | कण्ठस्य तस्या (कुमार १ ४२) २६३।२१५ |
| एतेषु हा तरुण मा (भोज २०४)२१२।३९ | ओजोभाजा (शिशु १८ ७५) १३०।१०४ | कण्ठस्य विद्धे(शा प ३३२७) २६३।२११ |
| एते सत्पु (भर्तृ २ ६६) ३८३।२६२ | ॐनम परमार्थैक (सु १२) ४।८ | कण्ठालंकारघण्टाघण १०।१४९ |
| एते समुल्लस द्वासो रा ३४७।३ | ओषामासे मत्स(शिशु १८ ३५)१२९।७४ | कण्ठालिङ्गनमङ्गलं २४।१६३ |
| एते स्निग्धतमा (सूक्ति ८ १५) ५६।१२० | ओष्ठपल्लवविदश (किरात ९ ५७)३१५।४९ | कण्ठाश्लेषिणमुञ्चत ३१८।१७ |
| एते हि गुणा (भोज ६७) २४३।२१३ | औ | कण्ठे गद्गदता खेदो (सु ३१७२) ६६।२८ |
| एतैर्दीक्षगन्ध (शा प ९९४) २३८।५५ | औत्सुक्यमात्रमवसा १३९।२ | कण्ठे मौक्तिकमालि २७७।६५ |
| एतौ द्वौ दशकण्ठक २१।८६ | औत्सुक्येन कृत (रत्ना १ ०) १२।२६ | कण्ठे वसन्ती (नैषध ७ ५०) २६३।२२३ |
| एवमेव कुले जाता ३८०।११० | औदार्य भुवनत्रये २३७।३५ | कण्ठोच्छित्तोऽपि हुंकृ ९९।११ |
| एवमेव नहि (सु ४२८) ५९।२१६ | औरस कृतसम्बन्धं ८८।७ | कतरपुरहर पहर्षं हा ७३।२३ |
| एवमेव मनु ३७७।३२ | और्वी इवातिलुब्धा(शा प ४३१) ७२।४० | कति कति न (शा प.९३८) २३३।१०२ |
| एष क्रीडान्सताम्य ३२६।३७ | औषधार्थसुमंत्रा १४४।५११ | कति कति न लताः २२२।६१ |
| ३ सुभा०अनु० | कति कति न (सूक्ति २६ ४) २४०।१९६ |