सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 449, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 449
१८ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां | --- | :---: | ---
| पद्य | पृष्ठ/संख्या | पद्य | पृष्ठ/संख्या | पद्य | पृष्ठ/संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| कतिचिदुद्धतनिर्भरम | ४०।४८ | कपोलपत्रान्तम् (नैषध ७.६०) | २६२।१८६ | करिष्यति कलानाथ | २९३।५ |
| कति ते कबरीभार | १८८।४४ | कपोलपाली तव | २६१।१३५ | करेण करिणा वीर | १२८।१८ |
| कति न सन्ति जना | २८४।१६ | कपोलफलकाव (सा द १० ४३) | २७५।३ | करे वेणीमेणीसद | २७१।४६ |
| कति न सन्ति मही | २३७।४७ | कपोले जान (महा ना ३ ५०) | ३६०।३१ | करे श्लाघ्यस्त्याग (भर्तृ स ७०) | ५२।२४० |
| कति नो विषया | १०५।१३३ | कपोले पत्राली कर (सु १६२७) | ३०६।४७ | करोति योऽ (किरात ३ ५१) | १७४।८८९ |
| कतिपयदिनपर (शा प ६९७) | ५८।१५९ | कपोले पत्राली पुल | २३।१३७ | करोति निर्मलाधार (शा प प्र १५) | ८६।८ |
| कतिपयदिवासस्था (भोज ३९) | २१।८२ | कपोले पाण्डुत्वं किम | २७६।३३ | करोति पूज्यमानो (सु ३६५) | ५६।९७ |
| कतिपयदिनेषु च (कुव ३९) | १२२।१७१ | कपोले मार्जार (शा प १७९) | ३०१।७९ | करोति शोभामलके (भाव ४३) | १९७।२५ |
| कतिपयनिमेषव (शा प १५५) | ३२।१८ | कमठकुलाचल (भर्तृ २ १०९) | ४८।१२१ | करोति नाभ नीति (हि २ १४) | ९१।९ |
| कतिपयसह (किरात १० ३०) | ३४६।१५ | कमण्डलूपमोऽमा (हि २.९१) | १४२।२३ | करौ नुनाना (किरात ८.४८) | ३३८।९१ |
| कति पल्लवि (शा प १०१८) | २३९।१०६ | कमनीयतानिवास | २६०।१२५ | करौ नुनाना नव (किरात ८ ७) | ३४५।५२ |
| कति सन्ति लवङ्ग | २३९।८४ | कमलभूतनया व | १०४।१९२ | कर्कशतर्कविचारव्यय | ४३।३ |
| कथं नाम न सेव्य(हि २ २८) | १४६।१७३ | कमलमनम्भसि (सु १५१६) | ३६३।१० | कर्णत्विग्गुणोत्कर्षारुत्या | ७०।६ |
| कथमपि कृतप्रत्या (अमरु ७५) | २७६।४९ | कमलाकुचकुनकांचल | १४।१२ | कर्णस्त्वच शिबिर्मा (भर्तृ २ ३४) | ७०।११ |
| कथमपि सखि क्री (अमरु १५) | ३०९।८ | कमलाक्ष विलम्ब्य | ३१२।३३ | कर्णाक्सिदन्त (नैषध ७ १०३) | २७०।२५ |
| कथमवनिप (काव्य प्र ५ १३४) | १२६।३६ | कमलासनकमलेक्षण | १६।६ | कर्णाट देहि कर्णावि | ११३।३ |
| कथमिव तव (किरात १० ३६) | ३३६।१३ | कमलिनि म (शा प ३७९३) | २४४।२२२ | कर्णामृत सूक्तिर (शा प १४४) | ३७।१७ |
| कथमिह मनुष्य (शा प १४०) | २९।१२ | कमलिनी मालिनी (सु ७३०) | ३३२।७० | कर्णारुतुदमन्तरे (रसगङ्गाधर) | २०७।२२८ |
| कथमुपरि कला(सा द १० ४७) | ३६३।१६ | कमले कमला शेते | ३६४।१३ | कर्णारुतुदमेव कोकि | २७२।५६ |
| कथयत कथमेषामेनया | ५।४२ | कमले कमले नित्यं | १९५।४० | कणिकादिष्विव खणे (सु १४) | १।४ |
| कथय निपुणे (शा प ३५८२) | २९२।३ | कमले कमलोत्पत्ति | ३१२।१२ | कर्ण चामरचारु (शा प ९१९) | २३८।८२ |
| कदर्यितस्यापि हि (हि २ ६७) | ७७।८ | कमले निधाय कम | २७५।१० | कर्णेजपाना वचनप्र | ४९।१७७ |
| कदली कद (प्र राघव १ ३७) | २६९।२९८ | कमलेव मतिर्मे (सा द १० २७) | १०४।८३ | कर्णे तत्कथयन्ति (सु ४६२) | ६२।२७८ |
| कदा कान्तागारं (शृङ्गारश०) | २७९।७४ | कम्पन्ते गिरय (शा प १०७४) | २१७।४६ | कर्णोत्पलेनापि (नैषध ७ ३०) | २५९।८३ |
| कदाचित्पाञ्चालीवि | १८४।४५ | कम्बुकण्ठि चरण | ३१२।३२ | कर्णोत्तङ्गविसर्पिणी | २७२।६३ |
| कदा भिक्षामक्तै (शान्ति ४) | ३६८।५६ | करकम्पितखड्गस्य | १२२।१७० | कर्तव्यमेव कर्तं (वृ चा ५ ३) | १६०।२१७ |
| कदा वाराण (सा द ३ ०५०) | ३६९।५९ | करकिंमलय (अमरु ९०) | ३२१।१७ | कर्तव्यो हृदि वर्त | २१४।७४ |
| कदा वा साकेते वि | ३६९।५८ | करजालमपूर्वचे (सु ७२) | २७।१७ | कर्पूर इव दग्धो (का प्र १५८) | २५०।५ |
| कदा वृन्दावन्ये न | ३६८।५५ | करतलयुगपरीण | २६५।२७१ | कर्पूरधूलि (का.प्र ७ ३२५) | २७३।१० |
| कदा वृन्दावन्ये वि | ३६८।५७ | करनररविदीर्घध्या | ३२७।११ | कर्पूरधूलिरचिता | २४३।१९३ |
| कनककलशस्य (स क ३ ११०) | २२।१३१ | करप्रचेयासु (शिशु २ ८९) | १४७।१९१ | कर्पूरन्ति सुधाद्रव | १३६।४९ |
| कनककमुकायित | २६७।२८६ | करवदरसदृशमखिल (शा प ५९) | ३।६ | कर्पूरपूरच्छविवाद | १८२।२९ |
| कनकनिकषभासा | २१।७९ | करभदयिते य (शा प ९६०) | २३४।१३२ | कर्पूरप्रतिपन्थिनो | १०७।१८६ |
| कनकभङ्गपिशङ्ग (शिशु ६ ४७) | २४४।२५ | करभदयिते योऽ (सु ६६७) | २३४।१३१ | कर्पूरादपि केत(प्र राघव ७.६८) | १३७।४३ |
| कनकभूषण (पञ्च १ ८२) | १७५।३९ | करमुदयमही (सा द ३ १३१) | २९९।२० | कर्पूराम्बुनिषेक (सूक्ति ४२ ८) | २७७।६० |
| कनकमृगं हत्वा | ३६२।२१ | करयुगमपद्म (शिशु १३ ३७) | १२६।४२ | कर्पूरेण स्थलविर | २५४।४० |
| कन्दर्पज्वरस्य (गीत ४ ९ १२) | २५०।८५ | कररुदनीवि दयि (शिशु ९ ७५) | ३१०।७ | कर्मण फलनिर्वृत्ति | ३८६।३६८ |
| कन्बरा समपहाय क | ९६।४ | करवारिरुहेण सधु | १९८।१११ | कर्मणा बाध्यते (महा ना ?) | ९१।२४ |
| कन्या कामयदुद्वाहं | १००।३३ | करवालकरालवारि | १३५।१७ | कर्मणा मन (शा प १३९४) | १४६।१६६ |
| कन्या निष्कासि | १६६।५७१ | करस्फोटोडम्बरत्या | २०९।५ | कर्मब्रह्मविचारणा विज | ४३।७ |
| कन्याप्रसूतस्य धनु | ३४६।११ | कराग्रजागच्छ (नैषध ७.७९) | २६५।२८० | कर्मभूमिरिमा प्रा(र २ १०९) | ३९३।६४५ |
| कन्या वर (नैषध [?]१०.१) | ३८७।४०१ | करानप्रसार्य रविणा(शा प.७४०) | ७३।१७ | कर्मानुमेया (काम नी ४ ४०) | ३८४।२७२ |
| कपटवचनभाजा के | ३५८।७२ | करालवाचालमु | १२९।४९ | कर्मियत फल (भर्तृ २ ६०) | १६१।३७५ |
| कपिरापे च कापि(कुव.१४५) | २३५।१५१ | कराविव शरीरस्य नेत्र | ८८।१ | कर्षाङ्क सिञ्च (शा प १२७७) | १३२।३२ |
| कलकण्ठ यथा (भोज २८७) | २२५।१२४ |