भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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२४ | सुभाषीतरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


केतकीकुसुमं भृङ्ग (सु ७२४) ८१।८कैलासीयेति १३७।७०कोल केलिमलं २३०।३६
केतक्य कटु २२४।१११कैलासीयेति कैरवी १३६।५३कोलाकृतिरपा १८८।३५
केदारभाजा (नैषध ७ ३५) २५९।८८कैवर्तकर्कशकर ९२।७५को लानो १८०।१०४५
केदारे कीटशो २००।४१कोक स्तोक ३२०।५०कोलाहले काककुलस्य ८६।४
केनचिन्मधुर (शिशु १० ५४) ३१७।१६कोकानाकुलयं ३०२।१०७को वीरस्य मन (हि १ १७५) ७८।११
केनाजितानि नय ५०।१९९कोकानुद्ग्रीवयन्तः ३२५।६८कोशमूलो हि(का नी १३ ३३)३९४।७०३
केनात्र चम्प (शा प १००३) २३८।६७कोकिल कल (शा प ८४१) २२५।१२५कोशद्वद्धमियं (कुव. ६७) ३९३।६४२
केनादिष्टौ कमल ५५।२३०कोकिलश्रूतशि (सु १६४३) ३८४।२७८कोषः स्फीत (सु १५२३) २६३।२०२
केनाप्यर्थं (शान्ति २ २) ३७५।२४४कोकिलाना (चा नी ३.९) १६३।३८०कोऽहं कौ (शा प १४०४) १५३।४२३
के नाम न विन (पच ४ ५४) ३४९।२६कोकिलो (सा द १० ५९) २२५।१२२कोऽहं ब्रूहि (महा ना २) ३६२।३५
केनासीन (शा प १११०) २१८।७०कोटरान्त स्थितो(सु. १६९७) ९०।४को हि तुला (शा प ११९६) २४८।७१
केऽपि स्वभाव ७२।३९कोदिद्वयस्य २४८।७५कौटिल्यं कच(का.प्र १०.५२३)३१२।२४
के प्रवीणा १९९।१८कोऽतिभार (चा नी ७३) १६३।४०४कौन्तेयस्य सहा २३१।४२
के भूषयन्ति १९७।१९कोऽत्र भूमि (सा द.१० ५१) २९४।२१कौप वारि (शा प ९३३) २३२।८८
केयं भाग्यवती २४१।६०कोऽत्रेत्यह (का नी २२) १४५।१३७कौपीनं धृतवान्ह ९८।३
केयं मूर्त्यन्धकारे (सूक्ति ९९ २) ८१।०४कोदण्डं न १०८।२०९कौपीन शत ३७१।१११
केयं श्यामोपल (प्र.राघव.२ ७) २७३।१९कोदण्डस्तव १०८।२०६कौपे पयसि (शा प ९३२) २३१।६१
केयूरं न करे २५८।५१कोदण्डो २९०।७८कौमुदीव तुहिना (कुव ९१) ११५।४३
केयूरा न विभूष (भर्तृ २ १६) ८५।१४को दुःखी सर्व १९९।१४कौर्म संकोच (हि ३ ४८) १५०।३१६
केयूरीकृतकङ्कणीकृत(सूक्ति ५४.१०)७।८२को दुराव्यस्य १९८।२कौ विख्याता १९९।२२
केलिः प्रदहति (पच १ १८६) ३५२।१४को देश कानि ३६।१७कौ शंकरस्य वल २०२।८८
केलिं कुरुष्व परि (सु ६२३) २३१।६८को वन्द्यो (हि प्र २१) ९०।५कौशेयं कृमिजं (पच १ १०३) ८२।४८
केलिचलाङ्गुलिल १४।१०को धर्मो (हि २ १४९) १७०।७६९कौस्तुभमुरसि (शा प १२०३) २४८।८७
केलीकौतुक २५६।५४को नयति जग २००।४७क्रतौ विवाहे (हि ३ १२४) १५२।३९९
केवल व्यमन(पच २ १५५) १६५।५३९को न याति (भर्तृ २.१०५) १५६।५५६क्रमसरलित २७९।६०
के वा न सन्ति (चात ३) ३८५।३३७को नाम नानुवर्तेत ६५।७क्रमोद्गता (नैषध ७ ९७) २६९।४०२
केश. काश (सा द १० ५) ३७१।१२७को निर्दग्धत्रिपुर ९९।३३क्रयविक्रय (शा प ४०३५) ३६४।२१
केशः कुन्द ३५५।१०कोऽन्धो योऽ १७०।७६३क्रव्यात्पूगे (शिशु १८ ७८) ५३०।१०७
केशालुञ्चनसाम्ये ३६४।६कोप चम्पक २३८।७०क्रान्तकान्तवदन (शिशु १० ३) ३१४।६
केशव पतितं (शा प ५२७) १८६।१कोऽपवाद (किरात ११ २५)१६१।३६८क्रामन्त्य अत्त (ध्वन्या ३) १३२।२९
केशाः सयमिन (भर्तृ १ १२) ३१४।६९कोपप्रसाद (पच.१ ३७) १४८।२४७क्रियते धवल (शिशु १६ ४६)१७५।९२९
केशानाकुलय (सु १८४८) ३४८।१८कोपवलयुन (शिशु १० ३९) ३१५।३२क्रीडन्मन्दरकन्दरो ७।८६
केशान्धकारा (नैषध ७ २३) २५८।४०कोपस्त्वया (अमरु.११३) ३१३।५१क्रीडन्माणव (प्र.राघव ७ ८०) १४२।१३
केशान्बामकरा २५८।३७कोपात्किंचिदु (शृङ्गारति १ २७) ३१०।५क्रीडाकारि तडाग २३१।२९१
केशौ कोमल (शा प ३४५८) २७७।५६कोपातकोमललोल (अमरु ९) ३१०।८क्रीडामिन्नहिरण्य ९६।११
केषांचिद्वदला २३५।१४७कोपो यत्र भुकुटि (अमरु. ३८) ३०९।६क्रीडासु च (शा प १५६८) १४३।४१
केषांचिद्रावि शुक (सु १४३) ३९।२२कोऽध्यन्य (शा प १२२२) १०२।१४क्रुद्धस्य दन्तिन १२८।१६
केषांचिन्निजवेश्म ९५।१२६कोऽप्येष (शा प ३९७६) ३६०।२४क्रुद्धोलूकनखप्र (सु ७१७) २२२।३९
केसरदुमतलेषु २०१।५८को मायति मक्र २००।४५क्रुद्धार स्मर (का प्र.७.२२५) २६।२०२
के स्थिरा. के १९८।९को मोहाय २०३।१०६क्रोडं तातस्य ३।३१
कैलासस्य प्रथ (का प्र ५.१०१७) १३६।३४कोऽयं कोप ३०७।५३क्रोधैर्हृदैष्टिपातै ८।१०२
कैलासाद्रावुदस्ते ७।१०१कोऽयं द्वारि हरि. (सु १०४) २४१।५६क्रोधो मूलम् (वृ.चा २ १३) १६०।३१३
कैलासायितमद्रि (सु २००२) २०६।९६कोऽयं भ्रान्ति (मङ्कट ९९) २१५।१३क्रोधो हि शत्रुः १७३।८८०
कैलासालयभाल (का प्र ४.६४) १२।३९कोऽर्थान्निद्रा (पच १ १५७) १७८।१०११क्रोशान्त. शिशाव ८९।३