भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः २५

क्रौञ्च क्रीडतु (शा प ११२७) २९९।८क्षणमयमपुवि (शिशु ११ ४८) ३२७।१७क्षुद्राः सन्त्रास (सु २२८३) ३६१।४९
केशत्यागकृते ३७६।२५६क्षणाहप्रबोवमायाति ९।५२क्षुद्रो द्रवैस्य कटुना ५७।१४९
क गन्तासि भ्रा (शान्तिश १ १७)७४।३४क्षतातकिल (रघु २ ५३) १५१।३७७क्षुद्रोऽपि तनुते तात ८७।१८
क च ननु जनका ९२।६४क्षते प्रहारा (पञ्च ४ ६३) १७३।८४४क्षुम्पत्प्रत्यर्थिनृपुथ्वी १२२।१६९
क्वचिच्चारुचा १०१।१२क्षत्रियस्यो (सूक्ति ९० ३७) १५०।३२१क्षेत्रग्राम (प्र ३५) ३७९।८२
क्वचिज्झिल्ल्रीनाद (सु ७२३) २२५।१४०क्षन्तव्यो मन्द १६६।५६६क्षोणी क सहते २०४।१२०
क्वचित्कन्था (शा प ४०९८) ३६८।३९क्षपा क्षामी (सूक्ति ६१ १८) ३४१।५५क्षोणीकाम निजा ११५।३६
क्वचित्कार्यञ्चाञ्ची ५५।७२क्षमातुल्यं तपो १६६।६००क्षोणीक्राम निजाम् ११५।३७
क्वचित्कृष्णार्जुन २६०।९८क्षमा बलमशक्ताना (वृ चा १३ २२)८२।३क्षोणी यस्य हिरण्मयी २१५।४
क्वचित्क्वचिदयं २२३।४४क्षमा क्षत्रौ च (हि २ १८०) १६४।४९५क्षोणीपर्यटनं ३७५।२२९
क्वचित्ताम्बू (अमरु १०७) ३२८।१४क्षमाशास्त्रं करे यस्य (वृ चा ३ ३०)८३।१क्षोणीपाल त्वदरि १३२।२५
क्वचित्पाणिप्राप्तं ९३।८७क्षययुक्तमपि (किरात ० ११) १५१।३८९क्षोणीगाश्रयि(भर्तृ स ४७०)१८०।१०४९
क्वचित्पोषोऽपि मित्र ५४।९क्षान्त न (भर्तृ स २३६) ३७४।२१९क्षोमं वत्ते (शा प ३२८३) २५६।४०
क्वचित्पुत्रभ्रष्टै (भर्तृ म ८९) २५३।२९क्षान्तिश्चेद (भर्तृ २ १८) १७८।१०१९क्ष्वेदाभि क(महावीर ६ ७७) १३१।१९९
क्वचिद्भूमौ शय्या (सु २९४०) ८०।३५क्षामक्षामकपोल २७७।५९क्ष्वेलातर्जितसिंह १४१।४
क्वचिद्दुष्ट क्वचि (नीतिसार ९) १५७।१७४क्षाम गात्रमतीव २८६।२७
क्वचिद्दिद्रोही (भर्तृ २.५१) ८९।५क्षार जलं वारि ४९।१७५खचितमपि मायावी (सु ३३८) ५६।८४
क्वचिल्लसद्ग (शिशु १७ ५६) १२७।५क्षार वारि न २३५।१खड्गा नितान्त (सु २३५६) ३६४।४२
क तिष्ठतस्ते पितरौ ४।३०क्षारो वारिनिधि ५३।२६५खड्गनिर्लूनम् (कुमार १६ २६) १२८।११
क दोषोऽत्र मया (सु १४१) ३९।२०क्षितिप किमपि १३९।६खड्गमूलं भवेद्राज्य १५९।२८४
क नु कुलमकलङ्क (भोज ३०४) ९२।६५क्षिपसि (सा द १० ५१) ३७३।१७१खड्गवारि भवत १२४।२
क पिशुनस्य गति (सु ४३२) ५९।२१९क्षिपेदाक्य (शा प १५१२) १५४।६७खड्गहस्तोऽरिमा २०८।३४
क प्रस्थितासि (अमरु ७१) २९८।१४क्षितो हस्तावलम्ब (अमरु २) ८।१०९खड्गा शोणितस (कुमार १६ १५) १२७।७
क यासि (शा प ७४) २३।३४०क्षिप्रमायमना (हि.२ ९५) १६६।१४४खड्गा रुधिरसलिता(कुमार १६ ७) १२७।५
क रुजा हृदय २८२।१२७क्षीण क्षीण समी (सु ५४६) २०९।५खड्गालक्ष्मीस्तथा (नकुल) १४३।५८
क वन तरु (सा द १० ७०) ९२।६६क्षीण (सु १६११) ३०५।११खड्गास्तिष्ठन्तु (सु ०२५२) ३६०।४
क वसति लघु १९७।३२क्षीणयाव (किरात ९ ६२) ३१६।५४खङ्गेन शितधारेण १२८।२२
क वाम्भोद्यौ २१८।७९क्षीणांशु (शा प ३७१४) ३०७।५६खङ्गेनामूलतो (कुमार १६ ३९) १२८।१७
क स दशरथ (पञ्च ३ २५३)३८४।२७९क्षीणो रवि (पञ्च ५ ९०) ३९४।६७९खण्डितानेत्ररुञ्जालि २७।१
क्वाकार्यं (विक्रमोर्व ४ ३४) २८१।११३क्षीबतासुप (शिशु २० ३४) ३१५।३७खद्योतास्तरला भवन्ति २४५।२४१
क्वापि गत २२९।२३६क्षीरक्षालितपाश्च ११४।२१खद्योतो द्योतते (शा प ७३८) २०९।२
केदानी दर्पितास्ते (सु ५८) १९।४०क्षीरसागर (शा प ३५१५) २७३।२खनन्नाखुबिलं (पञ्च.३ १६) २२९।५
केन्दोर्मण्डलमम्बुधि ८८।२क्षीरान्व्हेर्लहरीषु ३०२।१०१खर श्वानं गजं मत्तं १५५।९९
कैतद्कारविन्दं ३७२।१३७क्षीरिण्य स (मृच्छ १० ६०)३९४।७०६खरनखरविमुक्ता (सु ६०५) २४८।९४
कैतनमार्तण्ड ३०३।१२१क्षीरेणारमगतो (भर्तृ २ ६७) ८८।२०खर्वग्रन्थिविमुक्तसंधि २०१।६२
क्षणं सरलवीक्षणं २५६।३९क्षीरोदन्व (नैषध १२.७४) ११०।२४१खल करोति दुर्यु (हनु १३ ११) ५५।५४
क्षणं कान्ता (सूक्ति अनु ३३) १३२।२०क्षीरोदीयन्ति १३८।७५खल सज्जनकार्पास ५५।६०
क्षणं बालो भूत्वा (सु ३१३९) ३६८।३८क्षुत्क्षामा शिशव ६७।६६खल सर्षपमात्राणि (शा १ ३०६९) ५४।१
क्षण मूच्छमिति २८९।६२क्षुत्क्षामाभर्कसञ्च १०१।१खल सत्क्रिय (शा प ३७६) ५४।२६
क्षणक्षयिणि साप (सु २९९) ४६।६३क्षुत्क्षामोऽपि (सु ६१४) २३०।४०खल सुजनपैशून्ये (सु ३३५) ५६।८१
क्षणदासाव (का प ४.८२) १०३।७४क्षुत्तृडाशा कुद्र ७६।१४खलसख्य प्राज्ञात्तुर ४८।१३१
क्षणदृष्टनष्ट (शा प ७६७) २११।१४क्षुद्रा सन्ति (शा प ७७३) २३०।३७खलाना कण्टकाना (चा नी १५.३) ५४।६
क्षणमपि विरह. (शा प ३४८२) २८८।३५क्षुद्रा सन्ति (सु. २८५) ५२।२५७खलाना धनुषा (वृ चा १४ ८५) ५४।१२
क्षणमप्यनु (भोज २४२) १०२।४७खलास्तु कुशला (रसगगाधर) ५४।३६

४ सुभा०अनु०