भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ

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३८ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

पद्य / पादपृष्ठ/संख्यापद्य / पादपृष्ठ/संख्यापद्य / पादपृष्ठ/संख्या
दोग्ध्री धान्यं(मा १२ २७३३)३८८।४३९द्वन्द्वो द्विगुरपि१८९।५१धत्ते बर्हभरे३१४।७२
दोर्दण्डद्वयकुण्ड (रसगङ्गाधर)१०८।२०८द्वयमिदमलन्तस (सु १८१३)३४४।१२धत्ते भरं (भामिनी अ ८९)२३६।१४
दोर्दण्डद्वयलीलया१०।१५१द्वात्रिंशद्द (शा प ११९९)२४८।८०धत्ते वक्षसि३६५।५१
दोर्दण्डाञ्चित (सूक्ति ५५ ३)३६३।२३द्वारं खद्भि (सूक्ति १७ ७८)१०८।२०२धत्ते वियोगि१९९।२९
दोर्योस्तदन्तखण्ड सक२।२८द्वार गृहस्य (सु १८४३)३४७।१२धत्से मूर्धनि२३७।२९
दोर्भ्यां (काव्यप्र १० ११)१०६।१४८द्वार द्वार रट७१।१०धनं तावदसुलभं (हि १ १८९)६४।७
दोर्भ्यां सय (शा प ३६८६)३१।९४०द्वारि चक्षुर (किरात. ९.४३)३५७।४१धनं तावलब्ध कथ (प्रव ७७)३६८।४४
दोलाया जघ (सूक्ति ५१.१४)२५६।४५द्वारि प्रविष्ट१७३।८४८धनं यदि गतं (कविता ४३)६७।५२
दोषजातमवधीर्य४९।१६१द्वारि स्तम्भ३५२।११धन यदिह मे७१।२३
दोषपोषमभियाति५९।२१३द्वारे कल्पतरुगृहे२०१७३धन (वृ.चा १५ २१)१५९।२७५
दोषभीतेर (हि १ ५७)१६४।४७९द्वारे द्वारे परेवाम७४।४८धनक्षय शिष्टगर्हा(प्र भ १७)३८८।४२७
दोषमपि गुणवति (सु २४४)८२।३८द्वारे रुद्धमुपे (सु ३२३८)१५३।४२०धननाशेद (भा १२ ६६१९)३८७।४२३
दोषाकरोऽपि (भोज १३८)५०।१९५द्वारोपान्तनिर (काव्यप्र. ३ २)३०४।६धनधैर्यमराजैश्च१०१।३
दोषागमन३०३।१३९द्वाविमावम्भसि (भा ५ १०३०)६५।८धनबाहुल्यमहेतु (सु ५२२)७०।३०
दोषानपि गुणीकर्तुं (सु २१५)४६।७२द्वाविमौ न (भा.५ १०२७)३८३।२५३धनमपि परदत्तं (सु ३०७)६५।१८
दोषालोकन५७।१५१द्वाविमौ पुरुषौ (सु २९७३)१५५।१०८धनमर्जय काकुत्स्थ (प्र म.४)६४।३
दोषो गुणानां४८।१३८द्वाविमौ (भा ५ १०२८)१५५।१०५धनमस्तीति (शा प १४४६)१५३।२१
दोषोऽपि१५८।२४५द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५४९)१५५।१०९धनवानिति हि (हि १ १६८)३७४।२०८
दौर्गल्येन समीरिना७४।३९द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५४७)१५५।१०४धनवान्क्रोध३७९।९४
दौर्जन्य (शा प १०३१)२४१।२४३द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १९३३)१५५।१०६धनवान्बलवाँलोके (हि १ १२३)६५।१
दौर्मनष्या (भर्तृ स २३)१७८।१०१०द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५५०)१५५।१०७धनहीनो न ही(वृ चा १० १)३८७।४२१
द्या निरुन्ध (किरात. ९ २०)३००।३७द्वावेव क (र गो २ ६१ १७)३८८।४३६धनहेतोर्य ईहे(भा १२ ७८५)३८६।३५१
द्वामारोहति (सूक्ति २७ १५)२१६।३०द्वि शर नाभि (हनु १ ४९)१६५।५५३धनागमेऽधिकं१६८।६८१
द्युति वहन्तो (किरात ८ ३९)३३८।८२द्विजकुलपते२२७।१९६धनानि जीवित चै (हि १ ४४)२८६।३४६
द्यूतं पुस्तक१५७।२०५द्विजराजशेखरो३६४।३६धनानि भूमौ पश (भर्तृ ३ ३५)९२।५५
द्यूतं यो यम (पच. १ ५७)१४८।२६६द्विजा (शा प १३८४)१४४।१००धनानि विद्वत्क११७।७३
द्रवतवात्सर्वं (हि.१ ९३)१६३।४५१द्विजातिपूजा (भा.५ १२५४)३८७।४२०धनाशाया खली (वृ श ६१)६४।११
द्रविणार्जनज परि (सु ५२४)७०।३१द्वित्रै केलि३५७।३५धनाशा कैतव३५५।४
द्रव्यप्रकृति (काम नी. ५ २)१४८।२५७द्वित्रैव्योम्नि३२५।५४धनाशा जीवि (हि १ ११२)१६६।५८४
द्रष्टव्येषु किमुत्तम (भर्तृ १ ७)२५२।५५द्विधा (सूक्ति १०९ ८)२६१।१५५धनिक (गरुड.पू.अ ११०)१५३।३४
द्राक्षा प्रवेहि२२७।१८६द्विरददन्तवलक्ष (शिशु ६ ३४)२४१।४०वनिनोऽपि नि (सा द १०.६६)४६।५३
द्राक्षा म्लानमुखी२९।१०द्विर्भव पुष्प (रसगङ्गाधर)११६।५८वनिनोऽप्यदानभोगा (भोज.१६)७२।४३
द्रागाक्रम्योद१३४।२७द्विषतामुदय. (किरात २ ८)१५१।३८६धनु पौष्प मौवीं (भोज १७१)५२।२५२
द्रागैन्द्रीमनु२९५।६६द्विषा त्रास (कुमार १६ ४२)९१।३९धनेन कि यो (हि २ ९)१७४।८९८
द्राघीयसा धाष्ट्य (सूक्ति ५ १)३७।१६द्वीपादन्यस्मादपि (रत्ना १ ७)९१।३९धनेन वाससा प्रे (द श ४४)३८७।४०४
द्राघीयास (शिशु १८.३३)१२९।७२द्वेषादिवैक्क३८३।१६९वनेनाधर्मल (भा ५ १२५१)३९४।७००
द्रुत यस्या२५२।४५द्वेषिद्वेष (पच १.६०)१४८।२६५धनेतु जीवित (शा प ४२५)१६८।६५७
द्रुततरकरदक्षा. (शिशु ११ ८)३२३।२४द्वेष्या (नैषध १२ १२)११०।२३४धनैर्निष्कुलीना (नीतिसार ३)६४।१२
द्रुततरमितो (सु ६४९)२३३।१०९धनैर्वियुक्तस्य (मृच्छ ५ ४०)६६।४४
द्रुतद्रवद्रथचरण१२७।९धत्तरकण्टक२४३।१११धन्यस्तन्वि स२९२।३२
द्रुतशातकुम्भ (शिशु ९ ९)२९४।३७धत्तूर धूर्तं२४३।११०धन्यस्त्वमसि२८३।१५६
द्रुतसमीरचले (शिशु ६ २८)३४१।३४धत्ते चक्षुर्मुफु (मालती.३.१२)२७४।५धन्या शरदि३४४।७
द्रुमा पाण्डुप्रथा३२४।४०धत्ते नायक१२०।१४१धन्या शुचीति (सु १८१)२९।१९
द्रोग्धव्यं न च(भा.३ ११४७)३९४।६९२धत्ते पद्मल्ल३३७।४४धन्या (शा प. १०४७)२४२।१७२
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