भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः३९
धन्या केयं स्थिता (मुद्रा १ १) ८।१०५धान्याना (हि ३ ५५) १४८।२३५धैर्यमाधाय लज्जा ३०४।२
धन्याना गिरि (भर्तृ ३ १५) ३७४।२२०धारयित्वा त्वया(भोज २३४) १०२।४६धैर्यमुलबण (शिशु १० ६८) ३१८।११
धन्या सा गृह २८०।९४धाराधरस्त्वद (भोज २२५) १२५।७धैर्यलावण्य १०३।५४
धन्यासि या (काव्यप्र ४ १७) ३२८।१०धारावीश (भोज २०२) ११७।८९ध्माता भालत २११।४३
धन्यास्ता (शा प ३७४८) ३२८।२०धाराधौतं (शा प ३८८१) ३४२।७९ध्माता भालत २९५।६७
धन्यास्ते कवयो ३४।५८धारेश त्वत्प्रतापेन(भोज १७३) ११०।८०ध्यानव्याज (शा.प १३१) २६।२०५
धन्यास्ते ये (गरुड पू अ ११५) ६६।२९धार्मिक (काम नी १ ११) १४२।३ध्यानशस्त्र १६०।३३०
धन्योऽय मणि २१७।५०धार्ष्टर्यलङ्घित (किरात ० ७२) ३१६।६४ध्रियते याव (शिशु २ ३५) १५१।३६२
धन्वन्तरिक्षपण ३७।३७धावन्त (शा प ६१००) ३६९।१८ध्रुवं ध्वसो (प्रब ८२) ३६२।३३
धम्मिल्लं परि (शा प ३१७४) ३२८।५धावन्तमनु १२३।२ध्वजपट ३३२।५५
धम्मिले नव (सा द ४ ९) १९४।१३धावित्वा सुस (शा प ४१५९) ३७५।२२२ध्वनिरिति २१८।७८
धम्मिल्लो भंग (सूक्ति ७८ १५) ३२०।५१धिक् चेष्टितानि (शा.प ९९६) २३७।४८ध्वस्त काव्यो (शा.प ३९९९)३६३।४१
धरणिधर ११५।५१धिक् तस्य मूर्ख (शा प ३३२३)२६२।१८६ध्वान्तोघे ३०२।१०२
धराध्र तव १३२।२७धिक्त्वा रे (शा प १९४) १००।३२
धर्म पालय ११२।२७०धिग्गृहं (स्काद वै अ २०) १५६।१३५न कठोर न (काव्या. २ ३२४) २५०।३
धर्मे प्रसङ्गादपि ३७५।२४०धिग्जीवि (स्काद काशी अ १) १७३।८७१न कदाचित्सता (सु ३०५) ४७।८३
धर्मे प्रत्न (गरुड पू अ ११५)२८०।४८८धिग्धिन्ता (शाति ४ १०) ३७१।१९२न करोति १९४।२४
धर्म प्रागेव (नवरत्न ४) १५३।४२२धिग्स्वैतां ६५।१४न कर्मणा ल (भा १२.७३६)१९२।४६०
धर्म एव प्लवो (भा ३ ११८३)३९४।६९०धिग्वारिंदं (शा प ८६५) २२६।१६१न कश्चि (शा प १३७६) १४६।१६०
धर्मशास्त्रार्थं (शा प १३४३) १४२।१६धीर वारि (अमरु १२) ३४३।९४न कश्चि (बृहस्पति नी ११४) १६१।३४६
धर्महन्त्यर्जिते १६६।५८८धीरध्वनिमिर (भामिनी अ ५९) २९२।१८न कश्चिदपि (शा प. ६४७) १५४।४०
धर्मात्मा (र गो २ ११४ १८)३९४।६९४धीराणा १६७।६४९न कस्यचित्कश्चि (हि.२ ४६) १७२।८३५
धर्माख्याने श्म (वृ चा १४.६)३९४।६८६धुनोति चांसि (काव्यप्र.१०.३०) ९३।९२न काकारि ३७४।२१२
धर्मार्थं प्रभ (र ३ ९ ३०) ३९४।६७७धुनोतु ध्वान्तं २५७।२५न का निशि (नैषध १ ३०) २५३।९
धर्मार्थौपजवनो (का.नी १ १४)३८७।३८७धुन्वन्त्यमूनि ३३३।८२न कामभोगा ३४९।५१
धर्मारम्भेऽप्य ५७।१४१धुन्वानाश्चन्द ३२६।३३न कार्येषु न ३५०।११
धर्मार्थ यस्य (भा ३ ९५) १६२।४६२धूम पयो (सु ४४३) ६०।२४४न काल (शा प १३२०) १६०।३३४
धर्मार्थकामत (हि २ १७९) १६४।४९४धूमव्याकुल १२।३२न कालस्य न (शा प ३९८८) ३६०।११
धर्मार्थकाम (ब्रह्म अ १२०) १५९।२५५धूमाङ्गाढमली (राजत ४ ११) ३९३।६४९न कालस्य (र ४ २७ ७) ३९३।६५३
धर्मार्थकाममोक्षेषु ३०।११धूमायन्ते व्य (भा ५ १३१९)२९३।१६६२न किंचित्(काम नी.११ ४७) ३९२।६४६
धर्मार्थकामहीनस्य (सु २१६७) ६६।२४धूमायिता (भामिनी अ ९९) २४८।८२न कुर्या २३२।७८
धर्मार्थो यत्र न १६७।६११धूर्त स्त्री वा (हि ३ १३१) १४८।२४२न कुर्यादभि (शा.प १५२६) १५५।८०
धर्मे तत्परता (वृ चा १२ १५) ५३।२६२धूर्तधोरण १२५।१४न कुल वृत्त (भा ५ ११३४) ३९४।६७१
धर्मो यशो नयो २९।७धूलिधूसरसर्वाङ्गो (शा.प ५७५) ८९।७न कुले वापि २४४।२१८
धवलकुसुमभाख १२२।७धूलीधारामिरन्धास्त १३३।४७न केनापि श्रुतं ३६।३४
धवलयति समग्र ५१।२१९धूलीधूसर (काव्याल ७.३२) २०८।३५न केवलं मनुष्येषु (शा प ४४४) ९०।३
धवलान्यात (पच.१.४३) १४८।२५३धूलीभिर्दिवमन्ध (नैषध १२.९९)१२४।९न कोकिला (शा प ८९२) २२९।२२७
धवलीकरोति २६३।२०९धृततुषार (शिशु ६ ६०) ३४६।२१नक्र. खस्थान (पञ्च.३ ४४) ८६।१
धातस्तात (भर्तृ स ५४५) ६१।२६५धृतधनुषि (शा.प ३९६५) ३६०।१३न क्रीडासु ३७२।६२
धातु परीक्षा १६०।३३२धृतबिस (किरात. १० २४) ३४०।२६न क्रोध ६।६८
धातु (काव्यप्र. १० ३९) २८९।५४धृत्वा पदस्खलन (भामिनी क ५)३६२।२९न क्रोधयालु १६६।६०५
धातुवादेषु १५५।१०३धृष्ट कि ३०७।६४न क्वचिच्च ८०।१६
धातुश्चतुर्मुखीकण्ठ ३।१धैर्य यस्य (शान्तिश ४ ९) ३७०।१०३न क्वापि १८२।३२
धान्याकनागर (शा प ४०३३) ३६४।४१धैर्य हि कार्यं (पच / २२५) ३८३।२६०नक्षत्रक्षिति ३२२।१३