सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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५२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| बहुतरहृते रसातलं १७०।७४३ | बाहू द्वौ च मृणाल (शृ ति १) ३७८।५५ | ब्रह्मघ्ने च सुरापे (पंच ४ ११) ७५।१ |
| बहुधा बहुभि (पच ३ ७५) ३९०।५४० | बाहू प्रियाया जयता मृणा २६४।२२८ | ब्रह्मघ्नोऽपि नर (चाणक्य ८२) ६४।४ |
| बहुधा राज्यलाभेन यस्तो १०१।९ | बिडालभक्षिते दु ख ३७२।१६३ | ब्रह्मज्ञान (भर्तृ ३ १४) ३७५।२२४ |
| बहुनात्र किमु (शा प ३५०६) २९२।२ | बिडौजा पुरा पृष्टवान् १००।३ | ब्रह्म नान्तमपि १८७।२४ |
| बहुनिष्कपद्रोही बहुधा ५४।१३ | बिन्दुद्वन्द्वतरङ्गि (सूक्ति.४.१०६) ३५।२९ | ब्रह्महत्या (मनु ११ ५४) १५४।४७ |
| बहुभिर्न (पच ३ ११९) १६५।५६५ | बिभर्ति वदनेन किं क २०३।१०३ | ब्रह्माण्ड कियद ८०।४३ |
| बहुभिर्बत (शा प २०८५) १४५।१९३ | बिभेति पिशुना (सु ३७८) ५६।१०८ | ब्रह्माण्डं प्रवि १२६।३० |
| बहुभिर्मू (वृ चाणक्य ७ ११) १६९।७१६ | बिभेषि सखि (शा प ३४३३) २८३।२ | ब्रह्माण्डकुम्भकारं १६।५९ |
| बहुनामप्यसा (सु २७४२) १४४।८३ | बिभ्रतौ (शिशु १० ८) ३१४।११ | ब्रह्माण्डच्छत्र (दशकु. पू १) २०१।६६ |
| बहूनामल्पसाराणा (भोजप्र १४५) ८३।३ | बिभ्रत्पाथ कपर्दे सुर ८१।१७ | ब्रह्माण्डमण्डली (भर्तृ स २८४) ७९।३ |
| बहूनि नरशीर्षाणि (सु १४४) ३९।२३ | बिभ्राणा गरलं कण्ठे भुजंग ५५।५२ | ब्रह्माण्डसपुटक्लेवर २७।८ |
| बह्वपि स्वेच्छया (शिशु २ ७२) ८४।५ | बिभ्राणा हृदये (कुव.१५५) २९०।८४ | ब्रह्मा दक्ष कुबेरो (सु ८३) ९।१९ |
| बह्वाशी स्वल्प (चाणक्य ६९) १६२।४०० | बिभ्राणे त्वयि (शा प ११६०) २४५।४ | ब्रह्मादयोऽपि ९१।०८ |
| बाणं हरिरिव कुरुते सुजनो ४७।९७ | बिभ्राणोऽभिनवे (सूक्ति २ ७२) १८।३५ | ब्रह्मानन्दप्रचुरं ३१८।४ |
| बाणकरवीरदमनकशत १०३।६९ | बिम्बाकारंसुधा (भर्तृ स ६१२) १९४।१५ | ब्रह्मा येन (गरुड अ ११३) ९३।९८ |
| बाणाः पञ्च (रत्न ३ १) २८२।१४१ | बिम्बितं मृतपरि (शिशु १० ५) ३१४।८ | ब्रह्मा विष्णुदिने ३७३।१९३ |
| बाणाशिक्षा (शिशु १८ ५६) १३०।८७ | बिम्बोष्ठ एव (नवसाहसाङ्क ) ३१२।९ | ब्रह्मैव सत्यमखिल ३५२।२९ |
| बाणाग्निमस्तकरुणे विकिरण् २८२।१३५ | बिलाद्वहिर्बिलस्यान्त ३६४।१४ | ब्राह्मण ब्राह्म (भा ५ १४२५) ३९०।५२० |
| बाणान्सहर (विद्ध १ २२) २८२।१४३ | बिसमलमशनाय खादु पाना ६०।२४६ | ब्राह्मण (हि.० ९६) १४७।२०२ |
| बाणेष्वारोप्य गुणान्विधाय ६५।१६ | बीजं चिन्तामणिश्चेत्क १२२।१६७ | ब्राह्मण (भा ३ १४०७५) ३८०।१२१ |
| बालक्रीडनमिन्दुशेखर २१।८७ | बीजं चेदिन्द्रदन्तिस्फुरित १३८।८५ | ब्राह्मणा गणका १५६।१३१ |
| बालक्रीडनमिन्दुशेखर १२१।१५३ | बीजैरङ्कुरितं (शा प ८५६) २२६।१६३ | ब्रूत नूतन (दश २ १३) ७९।२ |
| बालया वा (मनु ५ १४७) ३५१।१५ | बीभत्सा (शान्ति १ ७) ३७६।२५७ | ब्रूतेऽन्यस्या (शा प २४२) ३८८।४५० |
| बालसखित्वमकारणहास्यं १७४।८९५ | बीभत्सा (शान्ति १ २०) ३७०।९३ | ब्रूते सप्रति (शा प १२५६) १२२।१८२ |
| बालस्यापि रवे (पचं १ ३५७) ७८।१ | बुध कीटग्वचो ब्रूते २००।३० | भ |
| बाला चन्दन (शा प ३५२९) ३०५।२ | बुधामे न (भोजप्र १२८) १६१।३६७ | भक्तं रक्तं (शा प १५१७) १५४।७२ |
| बालाटाक्षसूत्रितमसती ३७।१५ | बुद्धिं वर्धयति श्रियं वित ८७।३६ | भक्ताना (पच १ ३०७) ९७।१७ |
| बाला तन्वी (सु १४०१) ३१७।२ | बुद्धिप्रभाव (भा ५ १३७४) ३८२।२३५ | भक्ति प्रेयसि (शा प.३७५६) ३५१।३५ |
| बालातप (गरुड पू १०८) ३८२।४८५ | बुद्धिमन्तं (भा १२ ६४९८) ३८३।२३७ | भक्तिप्रह्वविलोकन (रसगगा २ ७) १५।३२ |
| बालादपि (हि २.७९) १६४।४८२ | बुद्धिमत्त्वाभि (वृ श.६९) १६९।७०० | भक्तिप्रह्वाय (शा प १३८) २७।१२ |
| बाला मामियमित्छतीन्दुवद ३७२।१३५ | बुद्धिरूप (प्रसगा.१३) ३८३।२३९ | भक्तिर्भवे (का प्र १० ५२४) ४८।१२६ |
| बालिकारचितवस्त्रपुत्रिका ३७५।२४१ | बुद्धिर्या सत्त्वरहिता (सु ५१२) ७०।२० | भक्ते द्वेषो जडे (शा प ३४१) ६४।४ |
| बालिशस्तुनरो (र ४ ७ १०) ३९३।६३६ | बुद्धिशस्त्र. (शिशु २ ८२) १४६।१८४ | भक्तो गुणी (हि २ १६) १४४।७१ |
| बाले तवाधरसुधारसपान ३१३।४९ | बुद्धिश्च हीयते (भा ३.३०) ३७९।७० | भगवदनभ्युपगमनं ४३।१ |
| बाले नाथ (अमरु ५७) ३०९।७ | बुद्धिश्रेष्ठा (मा ५ १०५६) ३८३।२४० | भगवन्तौ (शा प ४४०) ९०।५ |
| बालेन्दुवक्राण्य (कुमार ३ २९) ३३१।२६ | बुद्धेरगोचर (शान्ति ३ १४) ३६८।३६ | भगिनि (सूक्ति ३९ ७) २८६।१४ |
| बाले बाला विदुषि विबुधा १७८।१००५ | बुद्धौ कल्ल (भा २.२६८०) १६६।६०३ | भगीरथाय (शा प ४००३) ३७४।१९७ |
| बाले मालेयमु (शा प ३८२९) ३३६।३१ | बुभुक्षित किंन (पच ४ १६) ३९०।५४२ | भग्नकुम्भशकल्येन ५९।२१५ |
| बाले ललामले (शा प ३२९३) २५८।४१ | बुभुक्षितैर्व्याकिर (भर्तृ सं.६२१) ६४।११ | भग्ना वयं (सु ३१७९) ६७।५१ |
| बालोऽपि नावमन्त (मनु ७.८) १४२।८ | बृहत्सहाय (शिशु २ १००) ८७।१९ | भग्नाशस्य (भर्तृ २ ९२) ९४।१०९ |
| बाल्ये गेहपतौ निमीलति २५६।४८ | बोधयन्ति न (शा.प.२७४) ७१।९ | भग्नासु रिपुसे (शा प १२४४) १०२।१९ |
| बाष्पाकुलं प्रलपतोर्गृहिणी ३२९।३ | बोधितोऽपि बहुसूक्तिवि ५९।२११ | भग्नेर्दण्डैरात (शिशु १८ ६७) १३०।९६ |
| बाहुपीडनकच (शिशु १० ७२) ३१८।१५ | बोद्धारो (भर्तृ.३.२) ३९०।५३६ | भङ्क्त्वा (शृगाररसाष्टक ५) २९६।१३ |
| बाहुवीर्यं (वृ.चाणक्य.६.११) ३८६।३५९ | भञ्जकीर्तिमपीम १३४।१७ | |
| बाहू तस्या कुचाभोग २६४।२२७ |