सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ५१
| प्रायेण धनिनामेव (शा प ४३४) ६९।७ | प्रिये सदा पूर्णतरं मनोहरे ३१३।४० | बकुलमालिकायापि २८४।१४ |
| प्रायेण नीचलोकस्य क १९९।२७ | प्रिये सलीलं (किरात ८ ४९) ३३८।९२ | बकोट ब्रूम (शा प.८९१) २२९।२२८ |
| प्रायेण श्रीम (भा ५ १।४५) ३९०।५४३ | प्रियो मयैवावचित्ते प्रसूनै ३५२।२३ | बङ्गालिदाम भवतः शुभ ११६।६७ |
| प्रायेण सुकरं (शा प ३९६२) ३६०।२ | प्रीणाति य (भर्तृ स २७९) ३७८।४७ | बत सखि (का प्र १० ४३१) २८४।२१ |
| प्रायेणात्र (पच १ ४४८) १७९।१०२३ | प्रीतिं न प्रकटीकरोति (सु ४९३) ७२।६० | बदरामलका (भामिनी शु ८) २६५।२८५ |
| प्रायो दुरन्त (प्र राघव५ ४९) १५८।२३५ | प्रीतिं वस्तुगुना हरि कुत्र २५१।७६ | बद्धकोपोविकृती (किरात.९ ३४) ३१६।५६ |
| प्रायो यत्किंचिदपि प्राप्नो ८६।९ | प्रीतिर्लक्ष्मीर्व्यय क्लेश १५७।१८४ | बद्धकोशमपि तिष्ठति २९४।१८ |
| प्रारभ्यते न (मुद्रा २ १७) ३९०।५४८ | प्रेक्षणीयकमिव (शिशु १० ८२) ३२९।८ | बद्धा मणिम (पार्वती ५ १५) २६८।३८० |
| प्रारब्धे रति (शा प ३६९७) ३२०।१७ | प्रेङ्खणप्रेक्षणालापान्कुर्वत्य २५३।७ | बद्धा यदर्पणरसेन ४०।५२ |
| प्रारब्धे विपरीतनामनि रते ३२०।१९ | प्रेङ्खद्भाजितरगमुन्मदगज २७२।२ | बद्धा पद्मासनं यो नयन २६।२०७ |
| प्रारम्भतोऽतिविपुलं (सु ४२३) ५८।१९३ | प्रेम सत्यं तयोरेव १६०।३१४ | बद्धा हियोमा त्रिवली गुणेन २६६।३१८ |
| प्रारम्भे (भामिनी. अ. ४६) २२४।१०९ | प्रेमार्द्रा (मालती.५ ७) २८०।९३ | बधिरयति कर्णविवर वाचं ६४।१२ |
| प्रालेयमिश्रमकर (वेणी २ ७) ३२३।१३ | प्रेमैव मास्तु यदि चेत्पथि ५०।१९३ | बन्दीकृस्य (का प्र ५ ११९) ११२।२६८ |
| प्रालेयलेशमिश्रे (पच ३ २३९) ३९१।५८२ | प्रेम्णोऽामितरेवतीमुख २६१।९६ | बन्दी (भर्तृ स ६१२) १८०।१०५२ |
| प्रालेयशैल (शा प ३९२५) ३४६।२३ | प्रेरयति परम (शा प ३६४) ५७।१३१ | बन्धं लब्धत परस्य २२८।२२२ |
| प्रावारैरङ्गारैर्गर्भ (शा प ३९३७) ३४७।१ | प्रेरितः शश (किरात ९ २८) ३००।४४ | बन्धनस्थो हि (शा प.१२०९) २३१।५८ |
| प्रावृषि शैलश्रेणीनितम्ब २१२।२१ | प्रेषिक. प्रैष्यक (शा.प ४०६४) ३६४।९ | बन्धनानि (चाणक्य १५ १७) ३९०।५११ |
| प्रावृषेण्यस्य (शा प ७६८) २११।१ | प्रेषितस्य कुतो (चाणक्य ६१) १६२।३९२ | बन्धु को नाम (हि २ १७४) १६४।४९३ |
| प्रासस्रोतप्रवीरोल्बणरुधिर १३१।१२३ | प्रोज्वलज्वलनज्वाला १९।६३ | बन्धुत्याग (काव्या ३ १४७) ३८१।१५७ |
| प्रासादीयति वैणवादिगहन २५०।२२ | प्रोद्यत्प्रौढार (शा प ३९२४) ३४६।३३ | बन्धुलीकृत्य (हि २ ८०) १६४।४८३ |
| प्रासादे सा दिशि (अमरु १०२) २७९।६५ | प्रोषितवति (प्र राघव ५ ५) २१०।१० | बन्धुकद्युति (शा प ३६५८) ३१४।६८ |
| प्रियकृतपटस्येय (अमरु ११५) ३२१।१९ | प्रौढमौक्तिकरुच पयोमुचा ३४१।४८ | बन्धूकबन्धनुभव २६१।१४९ |
| प्रियतमेन यया (शिशु ६ ५७) ३४६।१८ | प्रौढच्छेदानुरु (छलितराम) ३६५।११ | बन्धूकबन्धुरधर (प्र रा २.८) २७१।३२ |
| प्रियप्राया (उ रामच २ २) ५१।२३७ | प्रौढिं धत्ता कलासु प्रथ १२१।१६५ | बन्धूना सुहृदा चैव १६६।५८१ |
| प्रियमनु (राज त ४ ३२१) ३९१।५९९ | प्लवन्ते धर्मे (भा १३ २२) ३९१।५५९ | बभूव वल्मीकभव कवि. ३६।४२ |
| प्रियमेवा (काम नीति.३ २६) ३७८।४४ | बर्बरेश्च तपस्वी (शा प १४९६) १५४।५९ | |
| प्रियवसतेरपया (सूक्ति ८२ १३) ३२३।४ | फ | बर्ही रौति बका (शा प ३८८७) ३४३।८८ |
| प्रियवाक्य (चाणक्य १६ १७) १५५।८३ | फणीन्द्रेस्ते (कुव ६३) १०२।३५ | बलमार्तभयो (रघु ८ ३१ ) १०४।८६ |
| प्रियविरहमहो (विद्ध ३ २३) २८५।४८ | फल कतक (मनु ६ ६७) ३९०।५२५ | बलवदपि (किरात १० ३७) ३३६।१४ |
| प्रियसखि न तथा पटीरपङ्के २८४।१८ | फल दूरतरे (शा प १०४८) २४२।१७३ | बलवानपि (किरात २.३७) १६४।४९२ |
| प्रियसखि विपद् (शा प ४५१) ९३।८६ | फलं धर्मस्य (शुक ४०) ३९०।५३८ | बलाङ्गीतो (शा प ३६७८) ३१८।११ |
| प्रियसखीसदृशं (शिशु ६ ८) ३३२।६३ | फल स्वेच्छाल् (भोज २७०) ७२।५४ | बलि पातालानिल (भोज २२१) १०१।७ |
| प्रियस्य सुहृदो (मालती ९ ४१) ३६१।७ | फलतीह (पच ५ ९) ३९०।५२८ | बलिकर्णदधी (शा प १२२९) १०२।१७ |
| प्रियदर्शनमेवास्तु (सूक्ति ४९ २) २०३।१ | फलहीनं नृपं (पच १ १६३) १४९।२८१ | बलिना सह (काम नी ९ ४९) १४८।२३२ |
| प्रिया न्याय्या वृ (भर्तृ २ ६१) ५२।२४८ | फलाना च दलाना च २२२।४२ | बलीयसा हीन (पच ३ १२६) ३७७।२२ |
| प्रियामुखीभूय सुखी सुधांशु २६१।१५२ | फलायते कुचद्वन्द्वमिय २७०।४ | बलोपपन्नो (पच ३ १११) ३७७।२३ |
| प्रियाया (सूक्ति ४३.१८) ३२१।२२ | फलार्थी (पच १ ३७८) १४९।२९२ | बल्लाल क्षोणिपाल (भोज ६४) ११६।६८ |
| प्रिया वा (महाना ९ १५) ३८८।४५७ | फलाशिनो मूलतृणाम्बु ६७।४९ | बल्हबलसमर्था मेघनादा १८४।४१ |
| प्रियाविरहितस्या (सूक्ति ४२ १) २७४।१ | फलितस्य रसालशाखिन २३९।१०५ | बहव. पन्नवोऽपीह (सु.२२५५) ७८।२ |
| प्रियासखीभूतवतो मुदं २६९।४१६ | फुलेषु य कम (शा प ८२५) २२३।८० | बहवोऽविनया (म.५.४०) ३९३।६६५ |
| प्रिया हिता (पच.१ ३२) ३७८।५७ | फेनमा (भा १२ १२०५०) ३८८।४५५ | बहि सर्वा (मालती.१ १७) १७७।९७८ |
| प्रियेण संप्रथ्य (किरात ८ ३७) ३३८।८० | बहिरतिनिर्मलरूपं २४७।६३ | |
| प्रियेण सिक्ता (किरात.८.५४) ३३८।९७ | ब | बहिर्न लोला दृगपाङ्ग ३५१।२८ |
| बककोयष्टिमिरुष्टे पल्वले २२।७ | बहु जगद पुर (शिशु ११.३९) ३२८।११ | |
| बकुलकुलमिलन्मिलिन्दमाला ३३२।७५ |