सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 485, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 485
५४ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| स्तम्भ १ | स्तम्भ २ | स्तम्भ ३ |
|---|---|---|
| भूतावेशनिवेशिता ३४।५६ | भोगाक्षमस्य १७१।८०६ | भ्रात कोकिल (शा प ८५१) २२९।१४४ |
| भूतैराक्रम्य (भाग ११ ७) ३८५।३०८ | भोगा न (भर्तृ ३ ८) ३७४।२०९ | भ्रात पञ्जर (शा प.१२०६) २४६।४३ |
| भूत्यालेपनभूषित ६।६३ | भोगा (भर्तृ ३ ३६) ३७३।१८६ | भ्रात पान्य (कुव १७८) ३४३।९३ |
| भूत्वा कल्प (प्रब ०१) ३७३।१८४२ | भोगा भङ्गुर (भर्तृ स २०२) ३८५।३२७ | भ्रात पान्थ (शा प ३४०६) ३५५।८६ |
| भूप कूप १४९।२८२ | भोगासक्तैकचेता १९८।१०६ | भ्रात पान्थ प्र (शा प ३८९४) ३४३।९५ |
| भूस्तन्मौलित १२६।१२ | भोगास्तुङ्ग (भर्तृ ३ ३५) ३७३।१८५ | भ्रात प्राणगणप्रयाण ३५७।३६ |
| भूयन्मीलितटीषु १२३।१९१ | भोगिन (पच १.६९) १४६।१७४ | भ्रातप्रम्ये कुविन्द २४६।२८ |
| भूमात्रं कियदेन ३६।१३९ | भोगीन्द्र प्रमदो (सु २६३८) १३७।६४ | भ्रातर्द्विरेफ २८३।१५९ |
| भूमिपतावर्ध १६९।७२० | भोगेच्छा नोप १६८।६८५ | भ्रातर्धार्तराश (भर्तृ स ४९) ७४।३६ |
| भूमिर्मित्रं (काम नी १० २८) १४९।३११ | भोगे रोगभय (भर्तृ ३ ३२) ३७०।९० | भ्रातर्भ्रम्य (शा प ११८४) २२४।१०६ |
| भूमौ स्थिता (भामिनी क २३) ३६२।३० | भोज त्वत्कीर्ति (भोजप्र १२७) ११७।७८ | भ्रातश्चन्दन कि (शा प ९९३) २३७।५४ |
| भूय कण्ठावधृति १९।५६ | भोज त्वद्दानपाथो ११७।७५ | भ्रान्त याचन (शा प ४२१) ७७।५३ |
| भूयस्तराणि यदमूनि ३०१।७२ | भोजनाच्छादने (पच.५ ६०) ३४९।३१ | भ्रान्त देशमनेक (भर्तृ ३ ४) ७७।५४ |
| भूयादेश सता १९।३७ | भोजनान्ते च कि १९६।५ | भ्रान्ता वेदान्तिन ४४।६ |
| भूयिष्ठ द्रविणात्मज ९४।११५ | भोजप्रतापं तु (भोजप्र ९२) ११७।८५ | भ्रान्त्वा (सूक्ति ९७ २८) ११९।१३२ |
| भूयो गर्जितमम्बु (शा प ७८७) २१३।६७ | भोजप्रतापामिर (भोजप्र २१८) ११७।८६ | भ्राम्यची (शा प ३८५७) ३४०।१३० |
| भूयो निपीय ३२७।९ | भोज्यं (चाणक्य २ २) १५५।१२१ | भ्राम्यन्मन्दर (पार्वती ५ २३) १५।३५ |
| भूयो भूयस्त्व १२२।१७३ | भो पान्थ त्वरितो ३५५।८७ | भ्रुवौ काञ्चिल्ली (शा प ३२७४) २५५।२६ |
| भूरिभारभरा (शा प ५६२) २०५।४ | भो पान्य (भर्तृ स ८५०) ३५४।७४ | भ्रूचातुर्या (भर्तृ १ ३) २५१।४१ |
| भूरिशोऽपि च २३९।१०३ | भो मो. करी (शा प ९०५) २३१।६९ | भ्रूचापवल्ली (कुव ८५) २७७।१२ |
| भूरेणुदिग्धा ( ध्वन्या ३) ३६०।२२ | भो भो कि कि (शा प ११५२) २२०।६ | भ्रूचापे निहि (शा प ३५०२) ३१४।७० |
| भूर्ज (शा प १०५६) २४३।१८४ | भो भो श्रीभो (शा प १२५२) ११७।९५ | भ्रूपल्लवो धनुर (शा प ३३८०) २५५।२३ |
| भृशक्रस्य यशा (सूक्ति ९७ २५) १३९।९ | भो मेघ (मृच्छ ५ ४७) २८३।१५१ | भ्रूभङ्ग न करोषि ३०७।६३ |
| भूशय्या (पच १.२९२) ९७।१० | भो रोहिणि त्वमसि २८५।४९ | भ्रूभङ्गे रचि (अमरु २८) ३५९।९९ |
| भूषणाद्युप (मुद्रा ३ २३) १०२।३२ | भो हंसास्ताव (शा प ८०७) २२२।४० | भ्रूभङ्गै क्रियते ३०७।६२ |
| भूसर्पकरंजो (शा.प १२७४) १३२।३१ | भ्रमच्चरणपल्लवक्वण ३४६।२९ | भ्रूभेदै कति (शा प ३७६३) ३५३।४१ |
| भ्रुकुटीकुटिल ३६४।२० | भ्रमति गिरि (सूक्ति १०८ २) २३५।४ | भ्रूभेदो रचित (अमरु ९७) ३५८।६७ |
| भृङ्गश्रेणीश्याम (शिशु १८ ४१) १२९।७८ | भ्रमन्वनान्ते नवमञ्ज ९२।५९ | भ्रूभ्या प्रियाया भवता मनोभू २५९।५८ |
| भृङ्गाङ्गनाजनम (शा प ७९९) २२१।१६ | भ्रमन्स (वृ चाणक्य ६ ६) १५९।२८१ | भ्रूयुग्ममुच्चैर्धनुरञ्जितञ्जय ३६७।३० |
| भृङ्गालीकण्ठमाला ३२७।४१ | भ्रमन्स्वैरं भ्रातर्भ्रमर २२४।९८ | भ्रूरेखायुगल (शा प ३२९७) २५८।५२ |
| भृङ्गालीमुदरे २७२।६६ | भ्रम भ्रमर यूथीषु २२२।४५ | भ्रूविलास (किरात ९ ५६) ३१५।४८ |
| भृत्यैर्विना (पच १ ८८) १४४।८६ | भ्रमय (मालती ९.४२) २८३।१५२ | भ्रूविभ्रमरेखा च तिलोत्तमा २७०।२४ |
| भृशमद्यत याधर ३४६।१९ | भ्रमर भ्रमता (शा प ८१८) २२३।११ | म |
| भेकेन कणता (भट्ट १६) २७७।४६ | भ्रमर मरणमीति २२३।१० | मकरीविरचनभङ्ग्या (शा प ७७) २२१।०८ |
| भैके कोटरशा (भोज २०१) २१३।६५ | भ्रमरहित कीदृक्षो १९६।१० | मक्षिका मशको वेश्या १५६।१२८ |
| भेतव्य (मुद्रा ३ १४) १३९।८ | भ्रमरहिता सा ३०।१९ | मक्षिका व्रणमि (चाणक्य ५८) १६७।६३७ |
| भेदाभेदौ सपादि ३६९।६६ | भ्रमात्प्रकीर्णे (शा प ३०१७) ३४५।४९ | मग्ने मेरो पतति तपने १७।५ |
| भेरीझाङ्कृति १२२।१८४ | भ्रष्टं नृपति (शा प ११०५) २१७।५१ | मङ्गलकलशाद्वयमय २।१२ |
| भैषज्यमेतद्दु (भा ११ ७२) ३९३।६५६ | भ्राजिष्णवो (सु ७८०) २२९।२३८ | मज्जत्वम्भसि (भर्तृ स ४८) ९४।११६ |
| भोक्तुं पुरुष (काम १३ १०) ३८९।४९९ | भ्रात कङ्कण किं ३५६।२९ | मज्जन्तोऽपि (सूक्ति ६ २९) ५२।२५८ |
| भोक्तुं (काम.नी.१३.१०) ३८९।४९९ | भ्रात (शा प ४१६४) ३७४।२०० | मञ्जिष्ठारागदी (शा प २२८०) ३२८।२४ |
| भोग. परो (हृ. श ७२) १६९।७०३ | भ्रात कस्त्व १००।७ | मञ्जुलघौ सभाचितगुणे १८४।४९ |
| भोगस्य भाजन (हि.२.१२५) ३४७।२०८ | भ्रात काञ्चन (शा प ११९३) २४८।७२ | मणि शाणोल्ली ( |