सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ५५
| मणिर्लुठति (नीतिरत्न १२) २१७।४७ | मधुर सुधाव (सा द १० १७) २७०।१५ | मनोभुर्मुग्धासु क्षिपति १०६।१५९ |
| मणिहारलता विभाति तन्व्या २६६।३०५ | मधुरमिव वदन्ति स्वागतं १४१।३ | मनो मधुकरी मेघो मानिनी १५७।१८५ |
| मण्डलीकृत्य (शा प ५६९) २०७।२० | मधुरया (शिशु ६ २०) ३३२।६८ | मनोरथरथारूढ (सु ३२४१) ७६।१९ |
| मण्डले मण्डलाकारो रेखा २०७।१० | मधुरवचनै (सुधारति १ ४२) २५४।३९ | मनोरथान्करोत्युच्चैर्जनो ९१।१९ |
| मतिरेव (गुणरत्न ८) १७५।९२५ | मधुरस्वना घृतोर्णा मध्या १८६।६ | मनोरागस्तीव्रं (मालती २ १) २८४।२७ |
| मत्तेभकुम्भपरि (पचं १ २२०) ३१९।२७ | मधुरिमरुचि (का प्र १० ५१६) ५९।२०८ | मन्त्रतन्त्रार्पित (शा प १३५१) १४२।२१ |
| मत्तो हिनस्ति सर्वं मिथ्या १००।५ | मधुरेणदृशा (काव्या ३ २०) ३८९।४६९ | मन्त्रबीजमिदं (हि २ ४५) १४७।२१४ |
| मत्वा परीक्ष्य (भा ५ १४८७) ३८८।४६१ | मधुरोन्नतश्रु (शिशु ९ ७९) ३११।११ | मन्त्रभेदेऽपि (भा १५ १९३) १४७।२२८ |
| मत्वा चापं शशिमुखि निज २६७।३३८ | मञ्चुव्रतौघ (कुव १११) ३०४।१५२ | मन्त्रसस्कारसपन्नास्तव २९३।१ |
| मत्वा लोकम (सा द ६ १८७) १०३।५७ | मञ्जूके माध्वीक पिबसि २२४।९७ | मन्त्रिणा पृथ्वि (हि २ १६७) १४७।२१५ |
| मत्वा सारं गुणाना (सु ४९४) ७२।६१ | मथो मन्दं मन्दं मरुति १८२।४३ | मन्त्रिणा (पच १ १३८) १६४।५०७ |
| मत्स्यादयोऽपि जानन्ति नीर १५५।९१६ | मध्यं तनुकृत्य (नैषध ७ ८०) २६५।२८१ | मन्त्रे तीर्थे द्विजे (विक्रम ६४) ३७८।५४ |
| मदकलकृतान्तकासर २८४।८ | मध्यं तव (सा द १० १५) २६६।३१४ | मन्त्रो द्वावि (शा प ४१५८) ३७५।२२१ |
| मदनदहन (शा प ३४१३) २७५।२१ | मध्यं विष्णुपदं कुचौ शिव २७२।६८ | मन्त्रो योव (शिशु २ २९) १४६।१८१ |
| मदनमपि गुणैर्विशेषयन्ती २७२।१३ | मध्यत्रिवली (शा प ३३४६) २६७।३३४ | मन्थक्ष्माधरघूर्णिता (सु ३५) १५।३७ |
| मदनमवलोक्य (शा प ८२४) २२२।४९ | मध्यमोपलनिभे (किरात ९ २) २९०।२२ | मन्थानभूमिधर (कुव २७) ३०४।१५७ |
| मदमयमदमयदुरगं (सु ३१) २२१।१५ | मध्यस्य प्रथ्रिमा (सा द ३ ५८) २५६।५१ | मन्यायस्तारणी (वेणी १ २२) ३६६।१३ |
| मदरक्तस्य (भा ५.१४८४) २९४।७०० | मध्यात्ससानीय सुसारभा २६७।३३७ | मन्दं निक्षिपते पदानि ३३।५२ |
| मदर्थसद्भू (नैषध १ १३७) ३६२।१९ | मध्याह्ने (दश रू २ ५०) ३३९।१२३ | मन्दं निधेहि (शा प ३६२०) २९८।१५ |
| मदसिफमुखै (किरात २ १८) ७९।१८ | मध्याह्नार्क मरीचिका ११।३ | मन्दं मन्दं श्रवणपुटकोपान्त २५६।४१ |
| मदाम्भसा (शिशु १७ ६८) १२७।३७ | मध्याह्ने चलतालवृन्त ३३७।४८ | मन्द मरुद्वहति गर्जति वारि २७४।३ |
| मदुक्तिश्वेद्दन्तर्मद (कुव १३६) ३३।४६ | मध्याह्नेऽति (शा प ३८६१) ३३९।१२१ | मन्दं मुद्रितपास (अमरु.१२७) ३४१।५२ |
| मदेकपुत्रा जननी (नैषध १ ३५) ३६२।१८ | मध्याह्ने दव (शा प ४०१४) ३६२।३६ | मन्दमग्रिमधुर्य्य (कुव ६५) ३२२।४ |
| मदोपशमनं शास्त्र ३९।११ | मध्याह्ने नूनमापोऽपि तिग्म ३३६।३४ | मन्दमन्दगमना करिणो २४४।१४ |
| मद्गेहे मुशकीव (सु ३१९७) ६८।७७ | मध्याह्ने हरितो हुताशन २३७।७७ | मन्दश्चन्द्रकिरी (शा प १२५४) ११६।६६ |
| मद्यपस्य कुत सत्य दया १००।३ | मध्ये न कृशिमा स्तने ३५६।९ | मन्दस्मितेन (भामिनी क १२) २७८।४६ |
| मद्यपा कि न जल्पन्ति १६६।५९२ | मध्यन (सा द १०८६) २६५।२६७ | मन्दाकिनीपय पान १५८।२४१ |
| मद्यमन्दविगल (शिशु १० १७) ३१५।२० | मध्यन सा (कुमार १ ३९) २६७।३२५ | मन्दार कुसुम (विद्ध २ ३) २७९।५६ |
| मद्युगमध्योत्पन्ना कृतयुग ९८।८ | मध्येऽथ बलिसद्म दृष्टि २६६।२९८ | मन्दारमाला (शा प ६७) १०१।६१ |
| मद्वाणि मा कुरु (भामिनी शा २८) ४०।५० | मन प्रकृत्यैव (सु १२०६) २७७।१३ | मन्दारमेदुरमरदरसाल २२२।८७ |
| मधुकरगणश्वतं (शा प ८२९) १७७।९९८ | मनसा चिन्तित (दृ श ३८) १६१।३७६ | मन्दोद्धूते शिरोभिर्मणि ११२।२८३ |
| मधुकर तव (शा.प ८१५) २२२।४७ | मनसि (शा प ३३८१) ३२९।५ | मन्दोप्यमन्दतामे (मालवि.२ ७) ८६।१० |
| मधुकर मा कुरु शोकं २२२।६२ | मनसि वचसि (भर्तृ स १९) ५१।२२१ | मन्दोऽयं (सूक्ति ५९९) ३३२।९२ |
| मधुकरैरपवाद (शिशु ६ ९) ३३२।६४ | मनसैव कृतं पाप न १६७।६३५ | मन्दिन्द्या (शान्तिश ३ ८) ७५।१६ |
| मधु द्राक्षा (भामिना शा २९) ३५।१६ | मनस्यन्यद्वचस्य (वृ चा २ ६०) ५५।५० | मन्ये तद्रूप (शा प ३३५७) २६८।३८८ |
| मधु द्विरेफ कुछ (कुमार ३.३६) ३३१।३१ | मनस्विनो न (दृ श ८७) ८०।२१ | मन्ये मायैमम (शा प ४०९०) ३६७।३ |
| मधुधारेव न मुञ्चसि मानिनि ३०५।१३ | मनस्सिहृदय धत्ते (दृ श ९) ८०।२० | मन्येऽमुना कर्ण (नैषध ७ ६४) २६१।१२९ |
| मधुना सिञ्चेन्निम्ब्र निम्बं १६०।३१६ | मनस्वी म्रियते (हि १ १३३) ८०।१९ | मन्ये मृत्यो सपत्नी जगति १२२।१६८ |
| मधुप इव (भामिनी प्रा १७) २४४।२१७ | मनागनभ्यावृ (शिशु २ ४३) १६३।७१७ | मन्येऽरण्ये कुलगिरि ११४।२० |
| मधुपराजिपरा (हरिविजय) ३३०।१ | मनीषिण (भोजप्र ५८) १७४।९०२ | मन्ये सत्यमहं लक्ष्मी समु ६२।७ |
| मधुपानप्रवृ (सा द १० ९५) १०२।४२ | मनुष्यजातौ तुल्याया (सु ३२१४) ९७।७ | मन्ये समास (शा प ३३५०) २६७।३२४ |
| मधुपानसमुल्लसत्प्रवाल ३२०।१० | मनोजराजस्य सितातपत्र २९१।१६ | मन्ये शशरीरमपि तवैव १०७।१८९ |
| मधुपे मालतीपुष्पं सतुण २२२।४६ | मनो धावति सर्वत्र १५८।२२६ | मम करग्रहणाय (शा.प.५९३) १८२।३८ |
| मधुमधुरिमभङ्गी मेजिरे ३४४।४२ | मनोऽपि शङ्कमानाभि २१३।८ | मम प्रिया कैरविणी करेण ३०४।१४९ |