भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ७३

शङ्कुव्याकीर्णरङ्कद्भुतनि १४।१७शय्या पुष्प (शा प ३४१२) २७६।५३शाखोट शाल्म (शा प १८४२) २४२।१७०
शङ्के तच्चित्तमक्लेश २६४।२५६शय्या वस्त्रं चन्दनं ९६।२शास्त्रेन धर्मं (शा प १५३८) १७२।८१९
शङ्का सन्ति (शा प १११९) २१८।८२शय्या शाद्वल (नागा ४ २) ३७०।९१शान्ता धर्मरुणा २४०।१३२
शठस्तु समय (स पाठोप ४७)३९१।५६१शय्या शैलशिला (भर्तृ ३ ८७)३८५।३२३शान्तिकन्थाल ३६७।१६
शत दयान्न विव (हि ३ ३१) ५५।४२शरजालाश्रित (शा प १५६६) १४३।३९शान्ते मन्मथ (भर्तृ म ७६२) ३२१।२४
शतपदी (भल्लट ७२) २४८।८९शरणं करवाणि ३।७शान्तेमतिर्विवेका ७७।५६
शतमम्युं दण्डधरं ९५।११शरण कि प्रपन्नानि (सु ४६७) ७१।२२शारता (किरात ९ २९) ३००।४५
शतमेकोऽपि (पच १ २५२) १४४।६६शरणागत (शा प ६८३) १६५।५५८शारदा शारदा ३।५
शतह्रदा (रामायण ३ १३ ६) ३९१।५५७शरत्कालस (काव्य प्र ७ ३) २६२।१६५शार्ङ्ग ब्रजक्रमण्डलो ९।१२७
शतेषु जायते ७०।१शरत्पद्मो (भाग ६ १८ ४०) ३९१।५८७शासति त्वयि (रसग तुल्य ) १०३।५६
शत्रुक्षेत्रकलत्र १३७।५६शरदम्बुध (किरात ११ १२) ३७२।१६४शास्त्रं सुनिश्च (वानर्थ २) १७६।१६२
शत्रुणा योजयेच्छ(पच ४ १८)३९०।५४४शरदि न वर्षति (शा प २४५) ४८।१९४शास्त्रज्ञ कपटानु (मृच्छ् ९ ५) १४२।३३
शत्रुर्वर्धति संयोगे १५५।१९०शरदिन्दुकुन्द १९४।२५शास्त्रज्ञोऽपि (भर्तृ स १००) ३५०।७३
शत्रुवाक्या (स पाठोप ३७) १५६।१६२शरदि समग्र (शा प ४९२) १६९।७३३शास्त्राण्यधीत्यापि (हि १ १७१) ३९।२१
शत्रूणा यम १११।२५९शरासने सायकमा १९८।१९८शास्त्रेषु निष्ठा १७२।८३३
शत्रो प्राणानिला १९।४२शरीर क्षामं (मालवि ३ १) २८०।८३शास्त्रोपस्कृत (भर्तृ स १३) ३९।२७
शत्रोरत्यन्तमित्रं १५०।३३२शरीरनिर (भोज प्र ८) १६१।३५१शिक्षितापि ३६४।३८
शत्रोरपत्या (बृह नीति ११०) ३८४।२९७शरीरमेवा (मा १२ ६४७८) ३७८।६४शिखरिणि क नु (सु २०३०) ३१३।४३
शत्रोरपि (कविता ९९) १६०।३४०शरीरस्य गुणाना (हि १ ४९) ८१।९शिखिनि कूजति ३४२।८४
शनिरशनिश्च (काव्य प्र ४ १६) १०३।७३शर्वाणीपाणिता १०१।५६शितैर्बाणैरेके मृध १३१।११५
शनै पन्था १५६।१२६शल्यमपि स्वल (सु ४२१) ५८।१९२शिथिलयति (प्र राघव ७ ८६) ३२४।३४
शनै शनैश्च (पच २ ८४) १६५।५२८शशपदमणिमालं ३२८।१२शिर शार्वं (भर्तृ २ १०) ४१।५९
शनै शनैश्च (पच १ २३८) १४९।२८८शशमृगश्व (शा प ३३९८) २७५।१४शिरश्छाया (शा प ७९) २३१।३५
शनैर्विद्या शनै (वृ चा ३ ३३) १५७।२०४शशाङ्के सनद्धे २९६।४शिरमा वार्यमाणो (शा प ७५३) ९६।१
शपथै सवि (पच १ १२५) १४९।३१३शशिना सह (कुमार ४ ३३) ३७८।६६शिरसा विधृता (सु २६९१) १४४।८८
शबरकुमारिलगुरवो ४३।३शशिनि खल (अष्ट रत्न ६) ९३।८५शिरसि (शिशु १३ १२) १९०।७५
शब्द प्रभूत १९७।३०शशिनीव हिमार्ता (हि १ १०३) ९५।३शिरसि धृतसुरापगे (पुष्प माला ) ११।१३
शब्दवद्भिर (सु १५३०) २६४।२२५शशिमुखि (गीत १० १९ ४) ३०५।१७शिरसि निहितोऽपि (शा प ३६९) ५७।१३२
शब्दशक्त्यैव ३०।९शशी दिवस (भर्तृ स १०) १७७।२९३शिरसि शिरसिजं ३५२।२५
शब्दशास्त्रमनधीत्य ४२।८शशी हर्तु लोभा २६१।१३३शिरासि वयोध्वा १२८।१३
शब्दार्थमात्रमपि (सु १८४) ३३।४१शश्वद्वाणद्वितीयेन (नल च १४) ३५।९शिरीषकोषादपि २६३।२२०
शब्दार्थयो (शा प १७९) ३५।२६शश्वन्निसर्गमलिना २४०।११२शिरोरुहैरलिकुल (शिशु १७ ५८) १२७।७
शमयति ७९।२३शस्त्रं न खलु (कुव ९३) १८७।२९शिरोवेष्टनव्याजतस्ते १२३।५
शमयति ग (विक्रमोर्व ५ १८)३८०।१९८शस्त्रभिन्नभकुम्भेभ्यो १२८।८शिलाघनैर्नाक (किरात ८ ३२) ३३८।७७
शमयति जलधारा (कुव ५०) ३४०।१४शस्त्राशस्त्रिकथैव ३६१।४२शिला बाला जाता ५२।२४५
शमयति यश (सु ३६३) ६१।२५७शस्त्रास्त्रैर्भिन्नदेहोऽपि १४३।५२शिलार्पितपदद्वन्द्वा १८६।७
शमिततापमपोढ (शिशु ६ ३३) ३४१।३९शस्त्रीकृतस्त्वश्वर ३६०।२६शिलासम्यग्धौ(शा प ३३०३) २६०।११०
शमितनिखिल (शा प ३७१०) ३२२।१शस्त्रैर्जीवति शास्त्र ९९।२९शिलीमुखै (विदग्ध मुख ४ ४४) १९४।३३
शर्मागर्भस्य यो १८७।२६शस्त्रैर्हतास्तु रिपवो १७६।१५२शिलीमुखोत्कृत्त १२८।३२
शम्बरस्य च (मा १३ २२३७) ३४८।१८शाखा कण्टक २४२।१६३शिल्प दर्शयितुं ३५९।९६
शम्बरारिरमृतं ३०४।१४६शाखामृगस्य १६६।५८६शिवभालानलोत्थेन ३०३।१४१
शम्पाकस्य रज १२।३६शाश्वतचित (भोजप्र २२२) २३६।७शिवयो सुधाहरिद्रा २।१३
शयानं चानु (र २ ६१ १९) ३९२।६०३शास्वासत (शा प १०५१) २४२।१७६शिव शिव हि शिवेन २५०।११
शयानस्योत्तानं ३२१।२०शाखोटकैश्चन्दन ८७।२६शिशिरकिरण (शिशु ११ २१) ३२३।२७

१० सुभा०अनु०