सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
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संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः
| पाद/प्रतीक | संदर्भ | पाद/प्रतीक | संदर्भ | पाद/प्रतीक | संदर्भ |
|---|---|---|---|---|---|
| सहकारे चिरं (भोजप्र २८६) | २२५।१२३ | साधनं सुमहद्य (का प्र ७ १५१) | ७९।१२ | सा मे यद्यपि | २८१।१०३ |
| सह कुमुदकदम्बै | ३०३।१२८ | साधर्म्येण कथं | १२०।१४९ | सामैव हि | १४९।३१२ |
| सहचरी शपथ | २८५।५ | साधयति (सु ४०१) | ५८।१७६ | मामोपायनय (सु २२८५) | ७८।१२ |
| सहजमलिनवक्र (प्रबोध १२) | १७५।९४० | सावारणतहू(सूक्ति ३३ ३०) | २३८।६४ | सान्ना दानेन (मनु ) | १४८।२३१ |
| सहजानघदृश.(शिशु १६.२९) | ५९।१९८ | सा वारयत्य | २६४।२६२ | साम्नैव यत्र (पच १ ४०९) | ३९१।५६४ |
| सहजोऽपि (दृ श २६) | १६८।६८२ | साधु चन्द्रम (सूक्ति ५३ ३५) | २६२।१७८ | साम्य (विद्ध शा १ २५) | ३३३।१०० |
| सह तया स्मर | २८२।१३३ | साधुरेव (दृ श २) | ४६।५४ | सायं चन्द्रकला | २७४।३१ |
| सह परिजनेन | ७७।५ | साधुरेवार्थिभि (भर्तृ स ७९२) | ७३।४ | साय दामग्रथन | २८६।१८ |
| सह वसतामप्य (सु ३९९) | ५८।१७५ | साधु व्याकरण | ४३।९ | सायं नायमुदेति | ३०२।११७ |
| सहसा विद (किरात २ ३०) | १७५।९३५ | साधुष्वेवातित (सु ४०८) | ५८।१८४२ | सायं स्नानमुपा (का प्र ८ ७९) | २९३।१२ |
| सहसा हृदये | २८५।४ | साधूना दर्शनं पुण्य (शुक ६८ १) | ८६।७ | सायक्रसहायबाहो (काव्यप्र ७ ४) | १८४।५५ |
| सहसिद्धमिदं (सु २४८) | ४८।१४६ | साधो कुण्डलघट | २४८।८८ | सा यावन्ति (शा प ३५८०) | ३११।२० |
| सहस्रकरपूरणा | १०६। ७० | साधो प्रकोपि (हि १ ८६) | ४५।२३ | सारङ्गाक्ष्या कुच | २६६।३१० |
| सहस्रशीर्षा पुरुष (शा प ४९४) | १८१।१ | साध्वी मा वी (गीत १२ २४ १) | ३५।१७ | मारङ्गो न लता (सु ६१८) | २३३।१९५ |
| सहस्रास्यो नाग | ५५।१ | साध्वीव भारती (सु १४५) | ३२।१७ | सारसवत्तावि (शा.प ४००१) | १२२।१७९ |
| सहायबन्ध (मा ५ १३७१) | ३९१।५७१ | साध्वीत्रीणा (नीतिरत १५) | १७८।१००२ | सारखते स्रोतसि | १०१।८ |
| स हि गगन (हि १ २१) | ९३।८३ | सानन्द नन्दिहस्ता (सु ८१) | ३।३५ | सा राजहंसैरिव | २६९।२४४ |
| सहिष्ये विरह (काव्या २ १५१) | ३३०।३ | सानन्दं सदनं (चाणक्य १२ १) | ८९।४ | सा रामणी (अल कौस्तु अ १) | २७१।३४ |
| सहृदया कवि (सु १५९) | ३३।२८ | सानन्दरुन्दुक | ३४६।३६ | सारासारपरि (सु २८२०) | १४४।१०२ |
| सहैमकटकं वत्ते | २६४।२३९ | सानन्दप्रमदाकटाक्ष(शृ ति १ ४) | ३२।४९ | सा रोमाञ्चति (गीत ४ ९ ९) | २९०।८८ |
| सहोदरा कुङ्कुमकेस | ३१।२९ | सानन्दमेष (अल कौस्तु वि १) | २२३।८३ | सार्थकानर्थकपदं | २७०।४२८ |
| स ह्यामलय (हि २ ९२) | १४२।२२ | सानन्दा गणनायके | ९।१४० | सार्थ मनोरथ (शृगार ति १२०) | ३०६।१ |
| सासारिकसुखासक्तं | १५७।१८२ | सा न भ्राति न | २९०।८७ | सार्वभौमभवनं (शाति श २ २६) | ३६७।३० |
| साक कुरग (का प्र ५ १२१) | १०५।१४२ | सानुज काननं | १९९।२८ | सालकाननयुक्ता (शा प १२७५) | १३९।१ |
| साक्र प्रावगणैर्लु | २१७।४१ | सान्त्वप्रायै | ३२९।१३ | सालक्तकं (अमरु १२८) | ३१०।४ |
| सा कविता सा (प्रसगा भ १३) | ३०।१८ | सान्द्रा मुद | २६१।२०१ | सालक्तकेन (अमरु ११६) | ३१०।३ |
| साकारो (पच ३ ८६) | १४४।७२ | सान्द्रानन्दजुर (गीत ९ १८ ३) | २५१।४७ | सालस मुखर (शा प १३१९) | १४४।९८ |
| साकृत निजसविदे (सु ११७) | ४१।७४ | सान्द्रामोदवती | २३२।९२ | सावलेपमुपलि (किरात १३ ८६) | ५९।१५८ |
| साकूतमधुरकोमल | ३५।६ | सान्द्राम्भोद (शिशु १८ ३६) | १२९।७५ | सावशेषपदमूक्त(शिशु १० १६) | ३१५।१९ |
| साकूतस्मितमा (गीत २ ६ १२) | २४१।६९ | सान्ध्यमस्तमित | २९४।२० | सावित्रीमात्र | १६७।१६३ |
| साक्षर पुरुषं | १५६।१५५ | सान्ध्यरागरु (भट्टोपमन्यु ) | २९३।९ | सा विद्याधर | २८१।१०६ |
| साक्षरा विपरीता | १५८।२०३ | सा पत्यु (अमरु २९) | ३५८।६४ | सा विरहदहनदूता | २८८।१० |
| साक्षात्किलाष्ट (महावीरच ७ ९) | १४०।१ | साप्तपदीन (सु २४५) | ४८।१४३ | साशङ्कस्य (सु २५६७) | १०८।१९५ |
| साक्षात्प्रेमाव (शा प ४११९) | ३७३।३८७ | सा बाढ भवते (शृगार ति १२२) | ३१०।६ | साश्चर्यं युवि (सु ३६२) | ६२।२७५ |
| साक्षादभूत्क्षय | ३२०।४ | सा बाला वय (अमरु ३४) | २८०।९२ | सा श्रीर्या न (गरुड पुराण ) | १५७।१७१ |
| साक्षान्मघवत (शा प ४००७) | ३६१।२ | सा भार्या या (भा १ ३०२७) | १५४।६१ | सा सचराचम | २८१।१०४ |
| सागसि प्रियतमे (सु २०१४) | ३१४।२ | साभिमानम (सु ३१०) | ४७।८५ | सा सर्वथैव रक्ता | २८८।८ |
| सागसेऽपि न (सु ३२३) | ४७।८४ | सामगायनपूतं मे (शा प ४०६२) | ३६४।७ | सा सा सपद्यते बु (विक्रमच ५३) | ९१।३४ |
| साग्रयोऽपि किल | १०१।११ | सामदाने भेद | १५०।३२० | सा सुन्दर तव (काव्याल ६ १०) | २८०।४ |
| साटोपव्योमहट्टोषित | २७।१३ | सामवादा (शिशु २ ५५) | ३९१।५६६ | सा सेवा या (पच १ ४७) | १४८।२५५ |
| सा तन्वीति (सूक्ति ४२ १) | ३३५।१४२ | सा मा द्रक्ष्यति(गीत ११ २० १) | २९३।४ | सा सौन्दर्यनिधि | २८१।१९६ |
| सा तोरणान्ति (सूक्ति.३८ ३) | २७५।१९ | सामादित्सञ्जि (पच १ १६८) | १४९।२८७ | सा स्तनाञ्जलि | २६४।२५७ |
| सा दुग्ध्व (विद्ध शा १ ३८) | २७१।३६ | सामुद्रास्तिम (राजत ४ ६२९) | ३८६।३८० | साङ्गे मा कुरु | ३५८।७६ |
| सा दृष्टा येर्न (सु १२५४) | २७०।१ | साहजिकरूपवत्या | ३१२।२१ |