सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
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८४ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| हर्षक्रोधौ समौ (हि ३.१३२) १४८।२४३ | हा हा देवि (उत्तर राम ३ १९) २७९।६३ | हेतुप्रमाण (शा प ३३५) ६५।८ |
| हर्ष वर्षान्विधत्से चिर २१४।८४ | हिसकान्यपि (पञ्च ३ १ ६) ३७८।४९ | हेतुर्नैसर्गिक १६८।६६७ |
| हर्षादम्भोजनन्मप्रभृति ८।१०६ | हिंसाशून्यमय (भर्तृ स ३५२) ९७।१३ | हेतो कुतोऽप्य (सु २७९) ५१।२१५ |
| हसति लसति हर्षा (सु ३२३२) ६०।२४८ | हितोपदेशं (शा प १५२३) १५४।७६ | हे दारिद्र्य (शा प ४०२) ६५।२ |
| हसन्तीं प्रह (मा १३.२२३८) ३४८।११ | हित्वा त्वामुपरो (कुट्टनी म) ११२।२६९ | हे दावानल (शा प ११५६) २२०।१ |
| हसन्तीं वा हसन्ती वा ३४५।५ | हित्वा दैत्यरिपोरुर. ११०।२३७ | हे पक्षिन्ना (शा प ८०८) ६२।२८२ |
| हस्तं कम्पवती रुणद्धि ३१८।१६ | हित्वा मदं ६०।२३६ | हे पाथोड (भोज प्र २१४) २१४।७६ |
| हस्त इव भूतिम (वासवदत्ता ७) ५७।१५३ | हिमऋतावपि (शिशु ६ ६१) ३४६।२२ | हे पान्थ (शा प ३९३१) ३४७।५० |
| हस्तन्यस्तकुशो (सु १४०५) १०७।१८२ | हिमकर परभागं २१०।३१ | हेमकुम्भमिव ३१८।९ |
| हस्तपङ्कजनिविष्टयो २।१५ | हिमधवल (शा प ३९१९) ३४५।८ | हेमन्तहिम ३४५।१ |
| हस्तस्य भूषणं १५९।२९१ | हिमलवसद्दश (शिशु ७ ७३) ३३४।१२४ | हेमन्ते दधि (भर्तृ स १४४) ३४६।३१ |
| हस्तस्वेदस्रपित इव ३१३।६१ | हिमव्यपाया (कुमार ३ ३३) ३३१।३० | हेमन्ते ३४७।४८ |
| हस्तादपि (शा प ४८५) १५५।१९९ | हिमशिशिर १०६।१४९ | हेमन्ते बहु ३४५।३ |
| हस्ताम्भोजालिमाला ११३।१ | हिमसमयो २३६।९ | हेमन्ते हिमकर ३४७।४९ |
| हस्ताम्भोजे २८९।५२ | हिमाशुखण्ड २०२।७८ | हेममञ्जीर (शा प ३३५९) २६९।४०० |
| हस्ती चाङ्कुश (वृ चा ७८) १६७।६३८ | हिमाशुखण्डा (प्र राघव ६.४३) २९२।२१ | हे मल्लि हे २४८।९० |
| हस्ती वन्य (शा प १२५०) १२२।१८० | हिमानीस्थगिरौ १९९।१७ | हे मातङ्ग २३०।४४ |
| हस्ती स्थूल (वृ चा ११ ३) ७९।२० | हिरण्य (का नी १३ २६) १४५।१२९ | हेमाम्भोरुहप (भर्तृ स ८२३) ३३४।१३३ |
| हस्ती हस्तस (चाणक्य.२८) १६१।३४७ | हीनसेवा न (हि ३ ११) १६४।४९७ | हेम्न कार्यं ३६९।६८ |
| हस्ते चकास्ति २६४।२४० | हीनहृदया दधात्येव १८१।४ | हेयं हर्म्यमिदं ३७१।१०९ |
| हस्तेनाग्रे वीत (शिशु १८ ४८) १३०।८३ | हीयते हि (हि प्र ४३) ८६।९ | हेयोपादेय ८।११५ |
| हस्ते शस्त्रकिणाङ्कितो २०।६३ | हुंकारैर्ददता (नागा ३ ५) ३१४।७६ | हे रङ्ग हेमतुलया २४६।३४ |
| हा तात (शा प ३९७०) ३६०।१८ | हुतमिष्टं च १०२।३४ | हे राजानस्त्यज (सु १६७) ३३।५० |
| हा धिक् सा (विक्रमोर्व.१) २८१।११४ | हुतहुताशनदीप्ति (रघु ९ ४०) ३३२।५० | हे लक्ष्मि क्षणिके ६३।२७ |
| हा मातस्त्वरि (नारायणभट्ट) ३६२।३७ | हूनीसीमन्त (शा प ३९३०) ३४७।४५ | हेलाप्रस्थान ११३।२९१ |
| हारं वक्षसि (भामिनी प्रा ९४) २३५।१५० | हृतोऽङ्गराग (शा प ३८४९) ३३८।७० | हेलाविदलित २३०।१९ |
| हार कुरङ्गशा २६६।३०१ | हत्वा पञ्चवन २८१।१०७ | हेला स्यात्कार्य १६२।४१८ |
| हार प्रलम्बित १७६।६६७ | हृदयं कौस्तुभ (शा प.११९) २२।१०३ | हे हर्यक्ष २३१।५३ |
| हार गुम्फति ३५९।९५ | हृदयं हरन्ति ३४९।५९ | हे हेमकार २४६।२३ |
| हारयिष्यति ३१९।४४ | हृदयतृणकुटीरे २५०।१७ | हे हेमकेतकि २३९।९५ |
| हारस्यातिदुराप २४६।३२ | हृदयमाश्रयसे (नैषध ४ ७५) २८५।४३ | हे हेमन्त (शा प ३९२३) ३४५।४ |
| हारहीरकरिरम्य ३५५।७ | हृदयमिषुभि (विक्रमोर्व २ १०) २७९।७१ | हे हे मित्र जिता ४३।३० |
| हारानाहर देव (शा प १२३६) १०८।१९८ | हृदयानि सता (शा प २३४) ४६।४१ | हे हेरम्ब १२।३० |
| हारावशेषा ननु २८८।३९ | हृदये कुरु २४६।२१ | हे हेला (वाक्यप पुञ्ज २ २४९) २१७।३५ |
| हारीता (शा प.८७१) २२७।१७६ | हृदि बिस (साहित्य कौ ११ ५) २८२।१३७ | हेषन्ते यज्जित १०७।१७७ |
| हारो जलार्द्रव (अमरु.९८) २५०।१५ | हृदि लमेन (शा.प १८४६) ३५।२५ | ह्रेषाघोषैर्हरीणा १२७।२३ |
| हारो नारोपित (हनु.ना.५ २४) २८३।१ | हृदि लज्जोदरे ७३।१९ | ह्रदाम्भसि (किरात ८ ४३) ३३८।८६ |
| हारो भाति कुच १८२।४९ | हृदि विद्ध (काम नी ३ २४) ३९१।५७३ | ह्रीतया गतनिवि ३१६।१ |
| हारोऽयं (साहित्य कौ ११ ८) २६६।३०४ | हृष्यति देवता (चाणक्य ५१) ३८६।३५३ | ह्रीभरादवनत (शिशु.१०.५२) ३१७।१४ |
| हालाहलं खलु (भामिनी प्रा.९०) ६०।२३३ | हे कीर २२७।१८८ | ह्रीविमोह (शिशु १० ५२) ३१५।२५ |
| हालाहलो (कुव २७) ६३।२६ | हे कूप त्वं २२०।९ | ह्रेपयति (सु ४३४) ५८।१९४ |
| हावहारि (शिशु १० १३) ३१५।१६ | हे कोकिला (भर्तृ स ८ २२) २२५।१३७ | ह्लादनताप २५५।३० |
| हासस्तूतकणिका ३५०।८१ | हे गङ्गाधरपत्ति १२।४३ | |
| हा हन्त मानस २२१।२० | हेतु कोऽपि ४३।८ |
समाप्तोऽयं सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानुक्रमकोशः