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सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary

महाकवि नरोत्तमदास द्वारा

DevanagariHindipublished108 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 108 में से

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२६ / सुदामा-चरित माना जा सकता है, किन्तु यह अंग अपने आप में सर्वांगीण होता है, उसी से यह अत्यन्त प्रभावोत्पादक बनता है। इसमें जीवन के किसी खण्ड की कोई सुनि- श्चित कथा तथा उदात्त उद्देश्य निहित रहता है। इसमें प्रायः एक रस की प्रधानता होती है। 'सुदामा-चरित' में खण्डकाव्य की अधिकांश विशिष्टताओं का सहज सौंदर्य देखा जा सकता है। इसकी कथावस्तु 'श्रीमद्भागवत' के दशम् स्कन्ध से ले गई है। इसमें सुदामा नामक तपोनिष्ठ ब्राह्मण के प्रौढ़ जीवन का वर्णन हुआ है, जिसमें घोर निर्धनता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा था। द्वारिकापति श्रीकृष्ण उसके सहपाठी तथा बाल सखा थे। दरिद्र सुदामा उनके पास जाना नहीं चाहता था, उसका स्वाभिमानी ब्राह्मण व्यक्तित्व इसमें सबसे बड़ी दीवार थी। सुदामा-पत्नी के अचूक तर्क-तीरों से वह दीवार अन्ततः टूटती है और श्रीकृष्ण की उदात्त मैत्री से उसका दरिद्रय दूर हो जाता है। उसके जीवन के इस खण्ड या आर्थिक समस्या का वर्णन कवि ने बड़ी कलात्मकता के साथ किया है। उसने सुदामा के जीवन के इस मार्मिक अंग को केन्द्र बनाकर कथा की योजना की है, उसमें न तो किसी प्रासंगिक कथा का समावेश किया है और न उसमें किसी प्रकार की नीरसता आने दी है। उसकी कथावस्तु विकास की विभिन्न अव- स्थाओं को पार करती हुई लक्ष्य-सिद्धि को प्राप्त करती है। 'नियताप्ति' की अवस्था, जहाँ पाठक को ज्ञात हो जाता है कि फल प्राप्ति निश्चित है, उसे कवि ने छोड़ दिया है। इससे कथानक में कौतूहल की सृष्टि हुई है और काव्य-सौंदर्य बढ़ा है। 'सुदामा-चरित' का आकार खण्डकाव्योचित है। इसमें कथानायक के समस्त कथावृत्त और जातीय जीवन की विस्तृत व्याख्या को प्रस्तुत नहीं किया गया है। कवि ने निर्धन सुदामा के दारिद्रय से सम्बद्ध तीव्र अनुभूतियों और श्रीकृष्ण की आदर्श-मैत्री की उदात्त भावनाओं को ही व्यंजित किया है। इस क्षेत्र में उसकी सफलता असाधारण है। उसने गणेश-वंदना से अपने इस खण्डकाव्य का श्रीगणेश करके, मूलसंवेद्य से सम्बद्ध कथा को तीव्र गति से आगे बढ़ाया है। मंगलाचरण में ही उसने रचना के प्रतिपाद्य-विषय का संकेत दे दिया है—

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक) · पृष्ठ 21, कुल 108 में से · BharatKosha