सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)
Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary
महाकवि नरोत्तमदास द्वारा
DevanagariHindipublished108 पृष्ठ
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परिशिष्ट पाठ-भेद ‘सुदामा-चरित’ की कुछ प्रतियों में निम्नलिखित छन्द भी मिलते हैं : मंगलाचरण छन्द १, २, ३ के स्थान पर निम्नलिखित प्रथम दो छन्द मिलते हैं : गनपति कृपानिधान, विद्या, वेद, विवेक जुत । देहु मोहिं बरदान हर्ष सहित हरिगुन कहौं ॥१॥ हरि चरित्र बहु भाई सेस दिनेस न कहि सकैं । प्रेम सहित चित लाइ सुनौ सुदामा की कथा ॥२॥ सुदामा चंद को मित्र चकोर सदा तेइ भोजन आग विरंचि ने दीनी । पंकज कौ हितु द्यौसपती हिम जारत ताहि यहै प्रन लीनो ॥ कर्मबली सुनु री अबला ! नित संग रहै सबकै पुर तीनो । लच्छिमी-नाथ सखा जिनके तिनके घर बास दरिद्र ने कीनो ॥३॥ दोहा मान-बड़ाई प्रेम-रस गरु आपन औ नेहु । ये पांचौ तबही गये जबै कही कछु देहु ॥४॥