भारतकोश
सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary

महाकवि नरोत्तमदास द्वारा

DevanagariHindipublished108 पृष्ठ

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१०२ / सुदामा-चरित कवित्त स्याम सों मिताई मैं तो जब ते जताई यासों, तबहीं ते मेरे पाछे कढ़िवे को परी है। याके हँसि बोले हौं न जानत हौं और दुख, कालिका - निकाई राम ! वहै क्रोध भरी है। सेवा छांड़ि दई आगे लठिया लै ठाड़ी भई, हरि पै चलाइबे की कथा कंठ करी है। बठत, उठत, न्हात, खात, सोए आधी रात, ऐसी सावधान ज्यों घरावत की धरी है ॥५॥ दाम ही सों मान औ बड़ाई जस दाम ही सों, दाम ही सों दैवो लैवो दाम ही सों काम है। दाम ही सों तिथिव्रत नेमधर्म दाम ही सों, दाम ही सों देवपूजा दाम ही सों नाम है। दाम ही सों जग में फिरत कवि पंडित हू, जापै नहिं दाम ताको सूखि जात चाम है। राजा और राव बादसाहन को कौन गिने, मेरे जान बीस बिसें दाम ही में राम है ॥६॥ पिता निज पुत्र त्यागै भाई नहिं साथ लागै, नारी मुख देखि भागै पूछत न बात है। चाचा हू चवाव करै मां बहन नित्य लरै, भोजन रिसाय धरै कूकर ज्यौं खात है। लोग कहैं कूर भए भाई सब दूर भए, वृथा जग जन्म जात पाछे पछतात है। सास औ ससुर दैयो लेत न बलैया मैया, आज के जमाने में रुपैया करामात है ॥७॥