सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंशरीर के ऊपरी हिस्से की बीमारियाँ / ९९
मुँह के रोग—
१—होंठ फट जाय या घाव हो जाये तो घी में मोम मिलाकर लगाओ ।
२—दुखती डाढ़ में होशियारी से सेहुंड के दूध का फाया रक्खो । दर्द उसी समय बन्द हो जायगा और डाढ़ टूट-टूट कर गिर जायगी, कष्ट न होगा । पर दूसरी डाढ़-दाँतों में न लगे ।
३—मौलसिरी की छाल का कुल्ला करने से भी दुखती डाढ़ को आराम होता है ।
४—जो दाँत सड़ गया हो, पीप जाती हो, जड़ें हिल गई हों, काला पड़ गया हो, उसे जल्द-से-जल्द उखाड़ दो । वरना जहर पेट में जाकर और बीमारियाँ खड़ी करेगा ।
५—जीभ फट गई हो या छाले पड़ गये हों या मैली रहती हो तो सबसे पहले जुलाब लो, फिर केले की जड़ का रस और मिश्री लगाओ ।
६—मुँह सूज गया हो तो जामुन, आम, मौलसिरी और चमेली के पत्तों के पानी का ग़रारा करो ।
कान के रोग—
१—कान में दर्द हो तो लौंग कड़वे तेल में जलाकर गुन-गुना कान में डाले ।
२—कान बहने लगा हो तो पिचकारी से साफ़ कर कौड़ी पीली कुल्हिया में जलाकर काग़ज़ की नलकी से उसकी राख कान में फूँक दो ।