सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 113, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
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३—कान बहरे होजायें या घुन-घुन शब्द सुनाई दे ती अदरक का रस शहद, सैधा नमक और तिल का तैल मिलाकर कान में वार-वार भरो।
४—कान में कोई कीड़ा घुस गया हो तो कोई-सा भी तेल गुन-गुना करके कान में डाल दो।
५—कान बेथते समय अनाड़ीपन से कान सूज जायें तो मुल-हठी, मजीठ और अरण्ड की जड़ पीस घी-शहद मिलाकर लेप कर दो, पक जायें तो ज़रूम की तरह इलाज करो।
नजला-जुकास कहने को मामूली रोग हैं, पर बड़ी तकलीफ देता है। यह खयाल शलत है कि ठण्ड लगने से जुकास होता है।
नाक के रोग जुकास तो दूसरे बीमारों से उद्दरक लगता है।
झोंक आना, नाक बन्द होना या बहना, सिर का भारीपन जुकास का साधारण चिन्ह है। इस बीमारी में पसीना लेना अच्छा है। खूब मेहनत करो, गरम पानी से नहाओ और गरम पानी पियो। गरम पानी में पैरों को रखो और गरम पानी बहुत-सा पियो। ऊपर कम्बल ओढ़ लो, जिससे खूब पसीना आवे। झन्झ हो तो हल्का जुलाव भी ले लो।
( १—गोहूँ की भूसी चार माशा, गिलोय चार माशा, सोफ चार माशा, काली मिर्च सात दाने, मुनकका सात दाने। पाँच छटाँक पानी में पकाओ, दो छटाँक रहे तो दो तोला मिश्री मिला-छानकर पीओ, जुकास की बहुत अच्छी दवा है। )
२—वनकसा एक तोला इसी तरह पकाकर पियो।