सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 115, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
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५—बड़ का दूध आँख में आँजने से आँख आना जल्द अच्छा होता है।
६—लड़की के मूत्र में फाया भिगोकर बाँधने से बच्चों की आँख आना आराम होती है।
७—काली मिर्च, कबीला और पीपल छोटी वरावर ले, महीन पीस सुर्मे की भांति आँख में आँजने से रतौंध आराम होता है।
८—प्याज का रस आँखों में लगाने से रतौंध दूर होता तथा नेत्रों की ज्योति ठीक होती है।
९—हूक के नेचे का चीकट आँख में आँजने से रतौंध आराम होता है।
१०—पलकों का मोटा होजाना, खुजली चलना, खुरकी होना, बालों का गिर जाना, इसके लिए यह दवा बहुत उत्तम है। जस्त दो तोला चार माशा, लोहे के वासन में कोयले की आँच कर पिघलाकर उसपर थोड़ा-थोड़ा वशुए का रस टपकावे। पीलिया सफेद भस्म हो जायगा। उसे आँख में आँजना चाहिए।
(११—जब आँखों के आगे मच्छर या मक्खी उड़ते दिखाई दें और दिन-दिन इसमें विशेषता होती जाय तो जानना चाहिए कि मोतियाबिन्द होगा। इसका शुरू में ही इलाज हो सकता है। बाद में कटवाना ही पड़ता है। नौसादर को सुर्मे की भांति पीसकर आँजने से मोतियाबिन्द में बहुत फायदा करता है।
१२—यह दवा मोतियाबिन्द की बहुत बढ़िया है—इमली के